अमूल्य लहू से बचे हुए जन [Amulya lahu se bache huea Jan)
Dm
hindiOriginal Key: Dmrepentance
अमूल्य लहू से बचे हुए जन [Amulya lahu se bache huea Jan)
Key: Dm
Instrument: guitar
Dmअमूल्य Bb लहू से Cबचे हुए Dm जन,
Dm प्रतापमय Bb ईश्वर की Cहै सन्ताDmन;
Dm प्रभु का भजन Fगाओ सन्तगण,
Fआदर, Cमहिमा, Bbस्तुति जयAगान,
Dmआदर, Gm महिमा, Amस्तुति जयDmगान।
Dmबीत रहा था यह जीवन, कुमार्ग से मेरा यह Cतन (2)
Bbकहता था मैं Gmकुवचन, Amथा नहीं मन में Dmशान्ति और चैन।
Dmचलता था मैं चाकल पथ में, जिसके अन्त में था Cमरण (2)
Bbनरक के दण्ड को Gmअपनाकर, Amकमाई करता था Dmपाप का धन।
Dmजीवित सत्य ईश्वर का, लेता नहीं था उसका Cनाम (2)
Bbदुनिया के Gmधर्म-कर्म से, Amजाना चाहता था Dmस्वर्ग-धाम।
Dmअसीम करुणा के कारण, किया मानव रूप Cधारण (2)
Bbदेकर क्रूस पर Gmअमूल्य प्राण, Amकिया हमारा Dmपूर्ण तारण।
Dmपवित्र लहू की धारा में, शुद्ध हुआ मैं अब Cपापी जन (2)
Bbखोला जो आत्मिक Gmयह नयन, Amभर दिया प्रभु ने Dmस्वर्गीय ज्ञान।