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पुराना नियम · 1 इतिहास · अध्याय 12 / 29

1 इतिहास 12

1ये वे हैं जो सिकलग में दाऊद के पास आए जबकि वह अब तक कीश के पुत्र शाऊल के कारण छिपा हुआ था; और ये उन शूरवीरों में थे जिन्होंने युद्ध में उसकी सहायता की थी।

2वे धनुष से लैस थे, और दाहिने-बाएं, दोनों हाथों से गोफन के पत्थर और धनुष के तीर चला सकते थे। वे शाऊल के बिन्यामीनी भाइयों में से थे।

3अहीएजेर प्रधान था, और दूसरा योआश था। ये गिबावासी शमाआ के पुत्र थे। फिर अजमावेत के पुत्र यज़ीएल और पेलेत, फिर बराका और अनातोती येहू,

4गिबोनी यिशमायाह, जो तीसों में पराक्रमी और उनके ऊपर भी था। फिर यिर्मयाह, यहज़ीएल, योहानान, गदेरी योजाबाद,

5एलूजै, यरीमोत, बाल्याह, शमर्याह, हारूपी शपत्याह,

6एल्काना, यिशिय्याह, अजरेल, योएजेर, याशोबाम-ये सब कोरहवंशी थे-

7और गदोरी यरोहाम के पुत्र योएला और जबघाह।

8और गादियों में से कई एक अलग होकर जंगल के गढ़ में दाऊद के पास आ गए। वे शूरवीर, युद्ध-विघा में प्रशिक्षित, तथा ढाल और भाला चलाने में निपुण थे। उनके चेहरे सिंह के चेहरों के समान थे, और वे पहाड़ों पर रहनेवाले मृगों के समान तेज़ दौड़नेवाले थे।

9पहला था एजेर, दूसरा ओबघाह, तीसरा एलीआब,

10चौथा मिशमन्ना, पांचवां यिर्मयाह।

11छठा अत्तै, सातवां एलिएल,

12आठवां योहानान, नवां एलजाबाद,

13दसवां यिर्मयाह, और ग्यारहवां मकबन्नै था।

14ये गादी लोग सेना के प्रधान थे; इनमें जो सबसे छोटा था वह सौ के बराबर और जो बड़ा था वह हजार के बराबर था।

15ये वे है जिन्होंने पहले महीने में यर्दन को पार किया जब उसके सब किनारे डूबे हुए थे, और इन्होंने पूर्व और पश्चिम दोनों ओर घाटी में रहने वाले सब लोगों को भगा दिया।

16तब बिन्यामीन और यहूदा-वंशियों में से कुछ वीर गढ़ में दाऊद के पास आए।

17दाऊद उनके स्वागत के लिए निकला और उनसे कहने लगा, “यदि तुम मित्रभाव से मेरी सहायता करने आए हो तो मेरा मन तुमसे मिला रहेगा, पर यदि विश्वासघात करके मुझे शत्रुओं के हाथ पकड़वाने आए हो तो हमारे पूर्वजों का परमेश्वर इस पर दृष्टि करे और न्याय करे, क्योंकि मेरे हाथ से कोई अन्याय नहीं हुआ।”

18तब तीसों के प्रधान अर्थात् अमासै में पवित्र आत्मा समा गया और उसने कहाः “हे दाऊद, हम तेरे हैं! हे यिशै के पुत्र, हम तेरे साथ हैं! कुशल, हां तेरा कुशल हो, और तेरे सहायकों का कुशल हो, क्योंकि तेरा परमेश्वर ही तेरी सहायता किया करता है!” तब दाऊद ने उन्हें ग्रहण किया और उन्हें टुकड़ियों के प्रधान बनाये।

19जब दाऊद पलिश्तियों के साथ होकर शाऊल के विरफ़द्ध लड़ने को गया, तब मनश्शे के भी कुछ लोग उसके साथ हो लिए, परन्तु वे उनकी सहायता न कर पाए क्योंकि पलिश्तियों के अधिपतियों ने आपस में विचार-विमर्श करने के बाद उसे यह कहकर लौटा दिया कि वह हमारे सिर कटवाकर अपने स्वामी शाऊल से फिर मिल जाएगा।

20जब वह सिकलग को जा रहा था, तो ये मनश्शे-वंशी भागकर उससे आ मिले, अर्थात् अदना, योजाबाद, यदीएल, मीकाएल योजाबाद, एलीहू, और सिल्लतै जो मनश्शे गोत्र में सहस्रपति थे।

21और उन्होंने लुटेरों के दलों के विरफ़द्ध दाऊद की सहायता की, क्योंकि वे बड़े शूरवीर और सेना के प्रधान थे।

22लोग दिन प्रतिदिन दाऊद के पास उसकी सहायता करने के लिए आते रहे, यहां तक कि परमेश्वर की सेना के समान एक बड़ी सेना बन गई।

23जो लोग युद्ध के लिए हथियार बांधे हुए हेब्रोन में दाऊद के पास इसलिए आए कि यहोवा के वचनानुसार शाऊल का राज्य उसके हाथ में कर दें, उनके दलों की गिनती यह है।

24यहूदा की सन्तान में से जो ढाल और भालों से लैस तथा युद्ध के लिए तैयार थे उनकी संख्या छः हजार आठ सौ थी।

25शिमोनियों में से सात हजार एक सौ शूरवीर युद्ध के लिए आए।

26लेवियों में से चार हजार छः सौ थे।

27हारून के घराने का प्रधान यहोयादा था, और उसके साथ तीन हजार सात सौ आए।

28सादोक नामक एक जवान शूरवीर भी अपने पिता के घराने के बाईस प्रधानों सहित आया।

29और शाऊल के भाई बिन्यामीनियों में से तीन हजार आए, क्योंकि इस समय तक उनमें से अधिकांश लोगों की निष्ठा शाऊल के घराने के पक्ष में रही थी।

30और एप्रैमियों में से बीस हजार आठ सौ बड़े-बड़े शूरवीर आए जो अपने पूर्वजों के घरानों में नामी पुरफ़ष थे।

31और मनश्शे के आधे गोत्र में से अठारह हजार आए जिन्हें नाम लेकर नियुक्त किया गया था कि आकर दाऊद को राजा बनाए।

32और इस्साकारियों में से ऐसे लोग आए जो समय को पहचानते थे, और यह भी जानते थे कि इस्राएल को क्या करना चाहिए। उनके प्रधान दो सौ थे, और उनके सब भाई उनके अधीन थे।

33जबूलून में से ऐसे पचास हजार लोग सेना में गए जो युद्ध के सब प्रकार के हथियार लेकर व्युह की रचना कर सकते थे और जिन्होंने सम्पूर्ण मन से दाऊद की सहायता की।

34नप्तालियों में से एक हजार प्रधान थे जिनके संग ढाल और भाले लिए हुए सैंतीस हजार आए।

35दानियों में से अट्ठाईस हजार थे, जो व्यूह की रचना कर सकते थे।

36आशेर में से चालीस हजार थे जो व्यूह रचना के लिए सेना में गए।

37और यर्दन पार के रूबेनी, गादी और मनश्शे के आधे गोत्र में से युद्ध के लिए सब प्रकार के हथियार लेकर एक लाख बीस हजार पुरफ़ष आए।

38ये सब योद्धा जो युद्ध में व्यूह रचना कर सकते थे, मन में यह ठानकर हेब्रोन में दाऊद के पास आए कि दाऊद को समस्त इस्राएल का राजा बनाए। और शेष इस्राएल भी दाऊद को राजा बनाने के लिए एक मत थे।

39और वहां दाऊद के साथ वे तीन दिन तक ठहर कर खाते पीते रहे, क्योंकि उनके भाइयों ने उनके लिए तैयारी की थी,

40वरन् जो इनके निकट के, यहां तक कि इस्साकार, जबूलून और नप्ताली तक के थे, वे गदहों, ऊंटों, खच्चरों, और बैलों पर बड़ी मात्र में मैदे की रोटियां, अंजीर की टिकियां, किशमिश के गुच्छे, दाखमधु, तेल, बैल, और भेड़ें लाए। इस्राएल में वास्तव में बड़ा आनन्द था।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)