पुराना नियम · 1 शमूएल · अध्याय 4 / 31
1 शमूएल 4
1इस प्रकार, शमूएल का वचन सारे इस्राएल के पास पहुंचा। उन्हीं दिनों में इस्राएल ने युद्ध में पलिश्तियों का सामना करने के लिए निकल कर एबेनेज़ेर के समीप डेरा डाला, जबकि पलिश्तियों ने अपेक में डेरा डाला।
2तब पलिश्तियों ने इस्राएल के विरुद्ध व्यूह-रचना की। जब घमासान युद्ध छिड़ गया तब इस्राएल पराजित हो गया। पलिश्तियों ने युद्ध-भूमि पर ही चार हज़ार मनुष्यों को मार डाला।
3तब सैनिक अपने शिविर में लौटे तब इस्राएल के प्राचीनों ने कहा, “यहोवा ने हमें पलिश्तियों से आज क्यों पराजित किया है? आओ, हम शीलो से यहोवा की वाचा का सन्दूक ले आएं जिससे वह हमारे बीच में रहे, और हमारे शत्रुओं की शक्ति से हमको छुटकारा दे।”
4अतः उन्होंने लोगों को शीलों भेजा। वे वहाँ से करूबों पर विराजमान सेनाओं के यहोवा की वाचा का सन्दूक उठा लाए, और एली के दोनों पुत्र, होप्नी और पीनहास भी परमेश्वर की वाचा के सन्दूक के साथ वहाँ थे।
5जब यहोवा की वाचा का सन्दूक शिविर में पहुंचा तब सारा इस्राएल इतने उच्च स्वर से ललकार उठा कि पृथ्वी गूंज उठी।
6जब पलिश्तियों ने ललकार की आवाज़ सुनी, तब उन्होंने कहा, “इब्रियों के शिविर में इस ललकार का क्या कारण है?” तब उन्होंने समझ लिया कि यहोवा का सन्दूक शिविर में आ गया है।
7पलिश्ती इससे भयभीत हो गए क्योंकि उन्होंने कहा, “परमेश्वर शिविर में आ गया है।” फिर उन्होंने कहा, “हम पर हाय! क्योंकि ऐसी बात पहले कभी नहीं हुई।
8हम पर हाय! हम को ऐसे महाप्रतापी देवताओं के हाथ से कौन छुड़ाएगा? ये तो वही देवता हैं जिन्होंने मरुभूमि में मिस्रियों को सब प्रकार की महामारियों से मार डाला था।
9हे पलिश्तियों, हियाव बांधो, और पुरुषार्थ करो। अन्यथा इब्री जिस प्रकार तुम्हारे गुलाम रहे हैं उसी प्रकार तुम उनके गुलाम हो जाओगे। अतः पुरुषार्थ के साथ युद्ध करो।”
10पलिश्तियों ने इसी प्रकार युद्ध किया जिससे इस्राएल पराजित हुआ, और प्रत्येक मनुष्य अपने तम्बू को भाग गया। उस दिन महा संहार हुआ जिसमें इस्राएल के तीस हज़ार पैदल-सैनिक मार डाले गए।
11साथ ही परमेश्वर का सन्दूक भी छीन लिया गया, तथा एली के पुत्र होप्नी और पीनहास, दोनों मारे गए।
12उसी दिन एक बिन्यामीनी सैनिक अपने कपड़े फाड़े और सिर पर धूल डाले हुए युद्ध-पक्ति से भागकर शीलो पहुंचा।
13जब वह वहाँ पहुंचा तब एली द्वार के पास अपने आसन पर बैठे हुए मार्ग की ओर उत्सुकता के साथ ताक रहा था क्योंकि उसका हृदय परमेश्वर के सन्दूक के लिए कांप रहा था। वह मनुष्य समाचार देने के लिए नगर में आया, और सारा नगर चिल्ला उठा।
14एली ने चिल्लाने की आवाज़ सुनकर कहा, “इस हलचल और हाहाकार का क्या कारण है?” तब उस मनुष्य ने तुरन्त जाकर एली को सारा समाचार कह सुनाया।
15एली की आयु तो अट्ठानवे वर्ष की थी, तथा उसकी आंखें धुंधली पड़ गई थीं जिससे वह ठीक से नहीं देख सकता था।
16उस सैनिक ने एली से कहा, “मैं ही वह व्यक्ति हूँ जो युद्ध-पंक्ति से आया हूँ। मैं आज ही युद्ध-पक्ति से भागकर आया हूँ।” तब उसने पूछा, “मेरे बेटे, क्या समाचार है?”
17समाचार लाने वाले ने उत्तर दिया, “इस्राएल पलिश्तियों के सामने से भाग गया है, और सेना के लोगों का भयानक संहार हुआ है, होप्नी और पीनहास, तेरे दोनों पुत्र भी मर गए हैं, तथा परमेश्वर का सन्दूक छीन लिया गया है।”
18जैसे ही उसने परमेश्वर के सन्दूक का नाम लिया, एली अपने आसन से पीठ के बल द्वार के पास गिर पड़ा जिससे उसकी गर्दन टूट गई, और वह मर गया, क्योंकि वह बूढ़ा और भारी था। उसने तो इस्राएल का न्याय चालीस वर्ष तक किया।
19इस समय उसकी बहू, पीनहास की पत्नी गर्भवती थी, तथा उसके प्रसव का समय बहुत ही समीप था। जब उसने समाचार सुना कि परमेश्वर का सन्दूक छीन लिया गया, तथा उसके ससुर और पति की मृत्यु हो गई तब उसे प्रसव-पीड़ा उठी जिससे वह दुहर गई और एक बच्चे को जन्म दिया।
20उसकी मृत्यु के समय उसके आसपास खड़ी स्त्रियों ने उससे कहा, “भयभीत मत हो, क्योंकि तेरे पुत्र हुआ है।” परन्तु उसने न तो उत्तर दिया और न ध्यान दिया।
21उसने लड़के का नाम यह कहकर ईकाबोद रखा, “इस्राएल से महिमा उठ गई,” क्योंकि परमेश्वर का सन्दूक छीन लिया गया था, तथा उसके ससुर और पति नहीं रहे।
22उसने कहा, “इस्राएल से महिमा उठ गई है, क्योंकि परमेश्वर का सन्दूक छीन लिया गया है।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)