पुराना नियम · 2 इतिहास · अध्याय 17 / 36
2 इतिहास 17
1तब उसका पुत्र यहोशापात उसके स्थान पर राजा बना, और उसने इस्राएल के विरफ़द्ध अपनी स्थिति को सुदृढ़ किया।
2उसने यहूदा के सब गढ़वाले नगरों में सेना नियुक्त की, तथा यहूदा देश एवं एप्रैम के उन नगरों में जिन पर उसके पिता आसा ने अधिकार कर लिया था, सैनिक-टुकड़ियां स्थापित की।
3और यहोवा यहोशापात के संग रहा क्योंकि उसने अपने मूलपुरफ़ष दाऊद के आरम्भिक दिनों के आदर्शों का अनुसरण किया और बाल देवताओं की खोज नहीं की,
4परन्तु अपने पिता के परमेश्वर का खोजी रहा, उसकी आज्ञाओं का पालन किया और इस्राएल के समान काम नहीं किए।
5अतः यहोवा ने उसके हाथ में राज्य को सुदृढ़ किया, और समस्त यहूदा के लोग यहोशापात के पास भेंट लाया करते थे। उसका धन तथा वैभव बहुत बढ़ गया।
6वह यहोवा के मार्गों में चलते हुए गर्व का अनुभव करने लगा। उसने यहूदा से ऊंचे स्थान और अशेराओं को फिर से हटा दिया।
7तब उसने अपने राज्य के तीसरे वर्ष में बेन-हैल, ओबघाह, जकर्याह, नतनेल और मीकायाह नामक अपने अधिकारियों को यहूदा के नगरों में शिक्षा देने के लिए भेजा।
8उनके साथ शमायाह, नतन्याह, जबघाह, असाहेल शमीरामोत, यहोनातान, अदोनिय्याह, तोबिय्याह और तोबदोनिय्याह नामक लेवीय तथा इनके संग एलीशामा और यहोराम नामक याजक थे।
9वे यहोवा की व्यवस्था की पुस्तक को अपने साथ लेकर यहूदा में शिक्षा देते रहे और उन्होंने यहूदा के सब नगरों में जा-जाकर लोगों को शिक्षा दी।
10यहूदा के आसपास के भूभाग के सब राज्याेंं में यहोवा का ऐसा भय समा गया कि उन्होंने यहोशापात से युद्ध न किया।
11कुछ पलिश्ती यहोशापात के पास भेंटें तथा कर के रूप में चांदी लाए। अरब के लोग भी भेड़-बकरियां अर्थात् सात हजार सात सौ मेढ़े तथा सात हजार सात सौ बकरे लाए।
12अतः यहोशापात अति महान् होता गया और उसने यहूदा में किले और भंडार-नगरों का निर्माण किया।
13यहूदा के नगरों में उसके पास विशाल भंडार थे और यरूशलेम में योद्धा अर्थात् शूरवीर रहते थे।
14और उनके पितृ-कुलों के अनुसार उनकी गिनती इस प्रकार थीः यहूदा में से सेना के सहस्रपति ये थे; अदना तो सेनाध्यक्ष था और उसके साथ तीन लाख शूरवीर योद्धा थे;
15उसके अधीन यहोहानान सेनापति और उसके साथ दो लाख अस्सी हजार योद्धा थे;
16और उसके अधीन जिक्री का पुत्र अमस्याह, जो स्वेच्छा से यहोवा के लिए समर्पित हो गया, और उसके साथ दो लाख शूरवीर योद्धा थे
17बिन्यामीन में से एल्यादा शूरवीर योद्धा जिसके साथ दो लाख योद्धा थे जो धनुष और ढाल से लैस थे।
18उसके अधीन यहोजाबाद था, जिसके साथ युद्ध के लिए तैयार एक लाख अस्सी हजार हथियार बन्द सैनिक थे।
19ये वे है जो राजा की सेवा में लगे थे। ये उनसे अलग थे जिन्हें राजा ने समस्त यहूदा के गढ़वाले नगरों में तैनात किया था।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)