पुराना नियम · 2 इतिहास · अध्याय 23 / 36
2 इतिहास 23
1सातवें वर्ष में यहोयादा ने अपनी शक्ति बढ़ाई उसने ये शतपति नियुक्त किए; यरोहाम का पुत्र अजर्याह, यहोहानान का पुत्र इश्माएल, ओबेद का पुत्र अजर्याह, अदायाह का पुत्र मासेयाह और जिक्री का पुत्र एलीशापात और उन्हाेंंने उससे वाचा बांधी।
2तब वे सम्पूर्ण यहूदा में घूम-घूमकर यहूदा के सब नगरों में से लेवियों और इस्राएल के पूर्वजों के घरानाेंं के मुखियों को एकत्र करके यरूशलेम ले आए।
3तब उस सारी मण्डली ने परमेश्वर के भवन में राजा के साथ वाचा बांधी और यहोयादा ने उनसे कहा, “देखो, राजा का पुत्र ही राज्य करेगा, जैसा कि यहोवा ने दाऊद के वंश के विषय में कहा है।
4तुम्हें यह करना होगाः विश्राम के दिन आने वाले तुम याजकों और लेवियों में से एक तिहाई लाेग द्वारपाली करें,
5और एक तिहाई लोग राजभवन में रहे। और एक तिहाई लोग नींव के फाटक के पास रहे। और सारी प्रजा के लोग यहोवा के भवन के आंगनों में रहे।
6याजक और सेवा-टहल करने वाले तो भीतर आ सकते हैं, क्योंकि वे पवित्र हैं, परन्तु उनके सिवाय और कोई यहोवा के भवन में प्रवेश न करने पाए। शेष सब लोग यहोवा की आज्ञा माने।
7और लेवीय अपने-अपने हाथ में हथियार लिए हुए राजा को घेरे रहें, और जो कोई भवन में घुसे, वह मार डाला जाए। जब राजा अन्दर आए और बाहर निकले तब तुम इसी प्रकार उसके साथ रहना।”
8अतः लेवियों और यहूदा के समस्त लोगों ने यहोयादा याजक की इन सब आज्ञाओं का पालन किया। और उनमें से प्रत्येक ने अपने लोगों को साथ लिया अर्थात् विश्राम दिन को अन्दर आने वाले और विश्राम दिन को बाहर जाने वाले दोनों को अपने साथ लिया, क्योंकि यहोयादा याजक ने किसी भी दल को छुट्टी न दी थी।
9तब यहोयादा याजक ने उन शतपतियों को राजा दाऊद के भाले और छोटी ढालें जो परमेश्वर के भवन में थीं, दे दी।
10तब उसने सब लोगों को, जो अपने-अपने हाथों में हथियार लिए थे, भवन के दाहिनी ओर से लेकर बाईं ओर तक वेदी और भवन के पास राजा के चारों ओर खड़ा कर दिया।
11तब उन्होंने राजकुमार को बाहर लाकर उसके सिर पर मुकुट रखा, और उसे साक्षीपत्र सौंपकर राजा बनाया। फिर यहोयादा और उसके पुत्रों ने उसका अभिषेक करके कहा, “राजा चिरंजीव रहे!”
12जब अतल्याह ने उन लोगों का हल्ला सुना जो भाग-भागकर राजा का गुणगान कर रहे थे तो वह यहोवा के भवन में लोगों के पास आई।
13और उसने देखा, कि राजा प्रवेश-द्वार पर अपने खम्भे के पास खड़ा है, और प्रधान और तुरही बजाने वाले राजा के पास खड़े हैं, और देश के सब लोग आनन्द मना रहे हैं और तुरहियां बजा रहे हैं, और गाने वाले अपने बाजे बजा-बजाकर स्तुति कर रहे हैं, तब अतल्याह अपने कपड़े फाड़कर चिल्लाने लगी, “राजद्रोह! राजद्रोह।”
14तब यहोयादा याजक ने सेना पर नियुक्त अपने शतपतियों को बाहर ले जाकर उनसे कहा, “उसे अपनी पंक्तियों के बीच से निकालकर ले जाओ और जो कोई उसके पीछे चले वह तलवार से मार डाला जाए।”
15अतः उन्होंने उसे पकड़ लिया और जब वह राजभवन के घोड़ाफाटक के द्वार के पास पहुंची तो उन्होंने उसे मार डाला।
16तब यहोयादा ने अपने और सब लोगों के और राजा के बीच वाचा बांधी कि हम यहोवा की प्रजा होंगे।
17तब सब लोगों ने बाल के भवन जाकर उसे ढा दिया, और उसकी वेदियों और मूर्तियों को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और बाल के पुजारी मत्तान को वेदियों के सामने ही घात किया।
18इसके अतिरिक्त यहोयादा ने यहोवा के भवन की सेवा लेवीय याजकों के हाथ में सौंप दी जिनको दाऊद ने यहोवा के भवन की सेवा पर ठहराया था कि वे मूसा की व्यवस्था के अनुसार होमबलि चढ़ाएं तथा दाऊद की चलाई हुई विधि के अनुसार आनन्द मनाएं और गाए।
19और उसने यहोवा के भवन के फाटको पर द्वारपालों को इसलिए ठहराया कि जो किसी भी रीति से अशुद्ध हो, वह भीतर जानेे न पाए।
20और वह शतपतियों और रईसों और प्रजा के शासकों और देश के सब लोगों को साथ लेकर राजा को यहोवा के भवन से नीचे ले गया और ऊपरी फाटक से होकर राजभवन में आया। और उन्होंने राजा को राजगद्दी पर बैठाया।
21तब सब लोग आनन्दित हुए और नगर में शान्ति हुई; क्योंकि उन्होंने अतल्याह को तलवार से मार डाला था।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)