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पुराना नियम · 2 इतिहास · अध्याय 28 / 36

2 इतिहास 28

1जब आहाज राजा बना तब वह बीस वर्ष का था, और उसने सोलह वर्ष तक यरूशलेम में राज्य किया। उसने अपने मूल पुरफ़ष दाऊद के समान नहीं किया। दाऊद तो वही करता था जो यहोवा की दृष्टि में ठीक था।

2परन्तु आहाज इस्राएलियों के राजाओं के मार्ग पर चला और उसने बाल देवताओं की मूर्तियां भी ढलवाईं।

3इसके अतिरिक्त उसने बेन-हिन्नोम की घाटी में धूप जलाई और उन जातियों के घिनौने कामों के अनुसार, जिन्हें यहोवा ने इस्राएलियों के सामने से निकाल दिया था, अपने ही बेटों को आग में होम कर दिया।

4और वह सब ऊंचे स्थानों और पहाड़ियों पर तथा सब हरे वृक्षों के नीचे बलिदान चढ़ाया और धूप जलाया करता था।

5इसलिए उसके परमेश्वर यहोवा ने उसे सीरिया के राजा के हाथ में कर दिया; जिसने उसे हरा दिया और उसके यहां से बहुतों को बन्दी बनाकर दमिश्क पहुंचाया और वह भी इस्राएल के राजा के हाथ में कर दिया गया जिसने उसे बड़ी मार से मारा।

6रमल्याह के पुत्र पेकह ने तो यहूदा में, एक ही दिन में एक लाख बीस हजार को जो सब-के-सब शूरवीर थे घात किया। उन्होंने तो अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा को त्याग दिया था।

7और जिक्री नामक एक एप्रैमी वीर ने राजपुत्र मासेयाह को और राज भवन के प्रधान अज्रीकाम को और राजा के मन्त्री एलकाना को मार डाला।

8तब इस्राएलियों ने अपने भाइयों में से दो लाख स्रियों को बन्दी बनाकर उनसे बहुत-सी लूट ले ली। फिर वे लूट को सामरिया ले आए।

9परन्तु वहां यहोवा का एक नबी था। उसका नाम ओदेद था, उसने सामरिया आने वाली सेना के पास जाकर उनसे कहा, “देखो, इसलिए कि तुम्हारे पूर्वजों का परमेश्वर यहोवा, यहूदा से क्रोधित था उसने उन्हें तुम्हारे हाथ में कर दिया। परन्तु तुमने बड़े क्रोध से उन्हें ऐसा घात किया जो स्वर्ग तक पहुंचा।

10और अब तुम यहूदा और यरूशलेम के लोगों को अपने लिए दास-दासी बनाकर दबाए रखने का विचार कर रहे हो। परन्तु क्या निश्चय ही तुमने स्वयं अपने परमेश्वर यहोवा के विरफ़द्ध अपराध नहीं किए हैं?

11इसलिए अब मेरी सुनो और इन बन्दियों को जिन्हें तुमने अपने भाइयों में से बन्दी बनाया है, लौटा दो क्योंकि यहोवा का कोप तुम पर भड़का है।”

12तब एप्रैमियों के कुछ मुख्य पुरफ़ष-योहानान का पुत्र अजर्याह, मशिल्लेमोत का पुत्र बेरेक्याह, शल्लूम का पुत्र यहिजकिय्याह, और हल्दै का पुत्र अमासा-युद्ध से लौटने वालों का सामना करने के लिए उठे,

13और उन्होंने उनसे कहा, “तुम इन बन्दियों को यहां मत लाओ क्योंकि तुमने जो विचार किया है उससे हम यहोवा के सम्मुख दोषी ठहरेंगे और इससे हमारा पाप और दोष और अधिक बढ़ जाएगा। क्योंकि हमारा दोष इतना बड़ा है कि उसका प्रकोप इस्राएल पर भड़का हुआ है।”

14तब उन हथियारबन्द लोगों ने बन्दियों और लूट को अधिकारियों और सम्पूर्ण सभा के सामने छोड़ दिया।

15तब उपरोक्त लोगों ने उठकर उन बन्दियों को लिया और लूटे हुए कपड़ों में से उनमें के सब नंगों को पहनाया, और उन्हें कपड़े और जूतियां दीं, उन्हें भोजन खिलाया और पानी पिलाया। फिर उन पर तेल मला और निर्बलों को गदहों पर चढ़ाकर यरीहो अर्थात् खजूर के नगर को उनके भाइयों के पास ले गए। तब वे सामरिया को लौट गए।

16उस समय राजा आहाज ने दूत भेज कर अश्शूर के राजाओं से सहायता मांगी।

17क्योंकि एदोमियों ने फिर आकर यहूदा पर आक्रमण किया था और वे बन्दियों को ले गए थे।

18और पलिश्तियों ने भी तराई के नगरों और यहूदा के दक्षिण क्षेत्र के नगरों पर चढ़ाई की थी और बेतशेमेश, अय्यालोन और गदेरोत को और उनके गांवों सहित सोको, तिम्ना और गिमजो को ले लिया था और वहां बस गए थे।

19यहोवा ने इस्राएल के राजा आहाज के कारण यहूदा को दबा दिया, क्योंकि उसने यहूदा में निरंकुशता फैलाई थी और यहोवा से बड़ा विश्वासघात किया था।

20अतः अश्शूर के राजा तिलगत-पिलनेसेर ने उस पर चढ़ाई करके उसे दृढ़ करने के बदले कष्ट दिया।

21आहाज ने यहोवा के भवन और राजभवन और उच्चाधिकारियों के धन में से लेकर अश्शूर के राजा को दिया, परन्तु इससे उसे कोई लाभ न हुआ।

22अपनी विपत्ति के समय इसी आहाज राजा ने यहोवा के प्रति और भी अधिक विश्वासघात किया।

23उसने दमिश्क के देवताओं के लिए जिन्होंने उसे परास्त किया था यह कहकर बलिदान चढ़ाए, “इसलिए कि इन देवताओं ने सीरिया के राजाओं की सहायता की थी, मैं भी उनके लिए बलिदान चढ़ाऊंगा कि वे मेरी भी सहायता करे।” परन्तु वे उसके और सम्पूर्ण इस्राएल के पतन का कारण हुए।

24इसके अतिरिक्त जब राजा आहाज ने परमेश्वर के भवन के पात्रों को एकत्र कर लिया तो उसने परमेश्वर के भवन के पात्रों को टुकड़े-टुकड़े कर डाला। उसने यहोवा के भवन के द्वारों को बन्द कर दिया और यरूशलेम के कोने-कोने में अपने लिए वेदियां बनवाईं।

25उसने यहूदा के प्रत्येक नगर में पराए देवताओं के लिए धूप जलाने के लिए ऊंचे स्थान बनवाकर अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा का कोप भड़काया।

26और देखो, उसके शेष कार्यों और आदि से अन्त तक उसके सम्पूर्ण चाल-चलन का वर्णन यहूदा और इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में लिखा है।

27अन्त में, आहाज अपने पूर्वजों के साथ सो गया और उसको यरूशलेम नगर में मिट्टी दी गई क्योंकि उसे इस्राएल के राजाओं के कब्रिस्तान में न ले जाया गया। तब उसका पुत्र हिजकिय्याह उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)