पुराना नियम · 2 इतिहास · अध्याय 9 / 36
2 इतिहास 9
1जब शीबा की रानी ने सुलैमान की ख्याति सुनी, तब वह कठिन-कठिन प्रश्नों से सुलैमान की परीक्षा करने यरूशलेम आई। उसके साथ मसाले, बहुत से सोने और बहुमूल्य रत्नों से लदे ऊंट तथा नौकर-चाकरों का एक बहुत बड़ा दल था; और जब वह सुलैमान के पास आई तो उसने अपने मन के सभी विषयों पर उससे बातें की।
2और सुलैमान ने उसके सभी प्रश्नों के उत्तर दिए; ऐसी कोई बात सुलैमान की बुद्धि से परे न रही जिसे वह उसे बता न सका हो।
3जब शीबा की रानी ने सुलैमान की बुद्धिमानी, उसके द्वारा निर्मित भवन,
4उसकी मेज पर के भोजन, उसके अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था, उसके सेवकों की सेवा विधि व उनकी वेश-भूषा, उसके पिलाने वालों को तथा उनकी वेश-भूषा को और उस सीढ़ी को जिससे वह यहोवा के भवन को जाया करता था, देखा तो दंग रह गई।
5तब उसने राजा से कहा, “जो समाचार मैंने तेरी बातों और तेरी बुद्धि के विषय अपने देश में सुना था वह सत्य ही था।
6फिर भी जब तक कि मेरी आंखों ने आकर देख नहीं लिया, मैंने उनके समाचार पर विश्वास नहीं किया। और देख, तेरी बुद्धि कितनी महान् है मुझे तो इसका आधा भी नहीं बताया गया था। तू तो उस कीर्ति से बढ़कर है जो मैंने सुनी थी।
7धन्य हैं तेरे लोग और धन्य हैं तेरे ये सेवक जो निरन्तर तेरे सम्मुख खड़े रहकर तेरी बुद्धि की बातें सुनते है।
8तेरा परमेश्वर यहोवा धन्य हो, जो तुझको अपने सिंहासन पर बैठाने से प्रसन्न हुआ कि तू अपने परमेश्वर यहोवा की ओर से राजा हो। तेरे परमेश्वर ने इस्त्रएल से प्रेम किया और उन्हें सदा के लिए स्थिर किया इसलिए तुझे उनका राजा बनाया कि तू उनके साथ न्याय और धार्मिकता से कार्य करे।”
9तब उसने राजा को एक सौ बीस किक्कार सोना, बड़ी मात्र में सुगन्धित द्रव्य और बहुमूल्य रत्न दिए। जो सुगन्धित द्रव्य शीबा की रानी ने राजा सुलैमान को दिए, वैसे कभी देखने में नहीं आए।
10और हूराम तथा सुलैमान के कर्मचारी जो ओपीर से सोेना लाते थे वे चन्दन की लकड़ी और बहुमूल्य रत्न भी लाते थे।
11और राजा ने चन्दन की लकड़ी से यहोवा के भवन के लिए तथा अपने राजमहल के लिए आसन तथा गवैयों के लिए वीणांए और सारंगियां बनवाईं, इससे पहले यहूदा देश में ऐसी वस्तुएं देखने में नहीं आई थी।
12और शीबा की रानी ने जो कुछ चाहा और उससे मांगा राजा सुलैमान ने उसकी इच्छा के अनुसार उसे दिया। उसने उसको उससे अधिक दिया जो वह राजा के लिए लाई थी। तब वह अपने सेवकों के साथ अपने देश को लौट गई।
13सुलैमान के पास प्रतिवर्ष जितना सोना आता था, उसका तौल छः सौ छियासठ किक्कार था,
14यह उसके अतिरिक्त था जो व्यापारी और सौदागर लाते थे; और अरब के सब राजा तथा देश के अधिकारी भी सुलैमान के पास सोना-चांदी लाते थे।
15फिर राजा सुलैमान ने पीटे हुए सोने की दो सौ बड़ी बड़ी ढालें बनवाईं, जिसमें कि प्रत्येक बड़ी ढाल में छः-छः सौ शेकेल पीटा हुआ सोना लगा।
16फिर उसने पीटे हुए सोने की तीन सौ ढालें और बनवाईं। प्रत्येक ढाल में तीन-तीन सौ शेकेल सोना लगा, और राजा ने उनको लेबनोन-वन नामक भवन में रखा।
17इसके अतिरिक्त राजा ने हाथीदांत का एक विशाल सिंहासन बनवाया और उसे चोखे सोने से मढ़वाया।
18उस सिंहासन तक जाने के लिए छः सीढ़ियां थीं और उससे जुड़ा हुआ सोने का एक पांवदान था। और बैठने के स्थान के दोनों ओर एक-एक टेक थी, और उन टेकों के बगल में खड़े हुए सिंह बने हुए थे।
19और सभी छः सीढ़ियों के दोनों ओर एक-एक सिंह अर्थात् कुल खड़े हुए बारह सिंह बने थे; किसी दूसरे राज्य में ऐसा कभी नहीं बना।
20और राजा सुलैमान के पीने के सब पात्र सोने के थे, तथा लेबनोन-वन के भवन में सब पात्र चोखे सोने के थे; सुलैमान के दिनों में चांदी का कोई मूल्य नही था।
21क्योंकि राजा के पास जहाज थे जो हूराम के कर्मचारियों के साथ तर्शीश को जाया करते थे। तर्शीश के ये जहाज हर तीसरे वर्ष में सोना, चांदी, हाथीदांत, बन्दर और मोर लेकर आते थे।
22अतः राजा सुलैमान धन-दौलत और बुद्धि में पृथ्वी पर के सब राजाओं से महान् हो गया।
23पृथ्वी के सब राजा सुलैमान के दर्शन के अभिलाषी थे कि वे बुद्धि की बातों को जो परमेश्वर ने उसके हृदय में डाली थीं सुने।
24और वे प्रतिवर्ष अपनी-अपनी भेंट में चांदी और सोने के पात्र, वस्र, अस्र-शस्र, सुगन्धित द्रव्य, घोड़े और खच्चर बहुतायत से लाते थे।
25सुलैमान के पास घोड़ों और रथों के लिए चार हजार घुड़साल और बारह हजार घुड़सवार थे, और उनको उसने रथ वाले नगरों में तथा यरूशलेम में राजा के पास रखा।
26और वह फ़रात नदी से लेकर पलिश्तियों के देश वरन् मिस्र की सीमा तक के समस्त राजाओं पर शासक था।
27राजा ने बहुतायत के कारण यरूशलेम में चांदी को पत्थरों के समान, और देवदार को तराई के गूलर के समान कर दिया।
28और वे सुलैमान के लिए मिस्र तथा सब देशों से घोड़े लाया करते थे।
29क्या सुलैमान के शेष कार्य आरम्भ से अन्त तक, नातान नबी की पुस्तक और शीलोवासी अहिय्याह की भविष्यद्वाणी की पुस्तक, और नबात के पुत्र यारोबाम के विषय इद्दो दर्शी के दर्शन की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?
30और सुलैमान ने यरूशलेम में समस्त इस्राएल पर चालीस वर्ष तक राज्य किया।
31फिर सुलैमान अपने पूर्वजों के साथ सो गया, और उसे उसके पिता दाऊद के नगर में मिट्टी दी गई। और उसके स्थान पर उसका पुत्र रहूबियाम राजा हुआ।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)