नया नियम · 2 यूहन्ना · अध्याय 1 / 1
2 यूहन्ना 1
1मुझ प्राचीन की ओर से, उस चुनी हुई महिला तथ उसके बच्चों के नाम जिनसे मैं सत्य में प्रेम रखता हूं; और न केवल मैं, वरन् वे सब भी जो सत्य को जानते हैं,
2अर्थात् उस सत्य के कारण जो हम में बना रहता है, और सर्वदा हमारे साथ रहेगाः
3अनुग्रह, दया और शान्ति, परमेश्वर पिता और पिता के पुत्र यीशु मसीह की ओर से हमारे साथ सत्य और प्रेम में बने रहेंगे।
4मुझे तेरे कुछ बालकों को देखकर बड़ा आनन्द हुआ है कि वे उस आज्ञा के अनुसार जो पिता से हमें प्राप्त हुई है, सत्य पर चलते है।
5अब हे महिला, मैं तुझ से निवेदन करते हुए कोई नई आज्ञा के रूप में नहीं लिखता, परन्तु वही जो आरम्भ से हमें मिली है, कि हम परस्पर प्रेम करे।
6प्रेम यह है कि हम उसकी आज्ञाओं के अनुसार चलें। यह वही आज्ञा है जिसे तुमने आरम्भ से सुना हैं, जिस पर तुम्हें चलना चाहिए।
7क्योंकि संसार में बहुत से भरमाने वाले निकल पड़े हैं जो यह नहीं मानते कि यीशु मसीह देह-धारण करके आया है। यही तो भरमाने वाला और मसीह-विरोधी है।
8अपने प्रति सावधान रहो, ऐसा न हो कि जो कुछ हमने कमाया उसे गंवा दो वरन् यह कि तुम पूरा प्रतिफल प्राप्त करो।
9जो कोई बहुत दूर भटक जाता है और मसीह की शिक्षा में बना नहीं रहता, उसके पास परमेश्वर नहीं; जो उसकी शिक्षा में स्थिर रहता है, उसके पास पिता और पुत्र दोनों ही है।
10यदि कोई तुम्हारे पास आए और यही शिक्षा न दे, तो न उसे अपने घर में आने दो और न नमस्कार करो;
11क्योंकि जो ऐसे मनुष्य को नमस्कार करता है, वह उसके कुकर्मो में सहभागी होता है।
12मुझे बहुत सी बातें तुम्हें लिखनी हैं, पर कागज़ और स्याही से लिखना नहीं चाहता; परन्तु मुझे आशा है कि मैं तुम्हारे पास आकर आमने-सामने बातें करूंगा, जिससे कि तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।
13तेरी चुनी हुई बहिन के बच्चे तुझे नमस्कार कहते हैं।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)