पुराना नियम · 2 राजा · अध्याय 1 / 25
2 राजा 1
1अहाब की मृत्यु के पश्चात् मोआब ने इस्राएल से विद्रोह किया।
2सामरिया में अहज्याह अपनी अटारी की झरोखेदार खिड़की से गिर पड़ा और बीमार हो गया। अतः उसने दूतों को भेजा और उनसे कहा, “जाओ, एक्रोन के देवता बालजबूब से पूछो कि मैं इस रोग से स्वस्थ होऊंगा या नही।”
3परन्तु यहोवा के दूत ने तिशबी एलिय्याह से कहा, “उठ, सामरिया के राजा के दूतों से भेंट करने जा और उनसे कह कि क्या इस्राएल में कोई परमेश्वर नहीं कि तुम एक्रोन के देवता बालजबूब से पूछने जा रहे हो?
4इसलिए अब यहोवा यों कहता हैः जिस पलंग पर तू चढ़ा हुआ है उस पर से अब न उतरेगा, परन्तु निश्चय मर जाएगा। तब एलिय्याह चला गया।”
5जब दूत अहज्याह के पास लौट आए, उसने उनसे कहा, “तुम क्यों लौट आए?”
6उन्होंने उससे कहा, “एक मनुष्य हमसे मिलने आया और उसने कहा, “जिस राजा ने तुम्हें भेजा है उसके पास लौट जाओ और उससे कहो कि यहोवा यों कहता हैः क्या इस्राएल में कोई परमेश्वर नहीं, कि तू एक्रोन के देवता बालजबूब से पूछने भेज रहा है? अतः जिस पलंग पर तू चढ़ा हुआ है उस पर से अब न उतरेगा, परन्तु निश्चय मर जाएगा’।”
7उसने उनसे कहा, “वह कैसा मनुष्य था जो तुमसे मिलने आया और जिसने तुमसे ये वचन कहे?”
8उन्होंने उसे उत्तर दिया, उसकी देह पर बहुत बाल थे और वह चमड़े का कमरबन्द बांधे हुए था।” तब उसने कहा, “वह तिशबी एलिय्याह है।”
9तब राजा ने पचास सैनिकों के प्रधान को उसके पचासों सैनिकों के साथ उसके पास भेजा। वह एलिय्याह के पास गया और देखो, वह तो पहाड़ी की चोटी पर बैठा था। और उसने उससे कहा, “हे परमेश्वर के जन, राजा कहता है; नीचे उतर आ।”
10और एलिय्याह ने पचास सैनिकों के प्रधान को उत्तर दिया, “यदि मैं परमेश्वर का जन हूं तो आकाश से आग उतरे और तुझे और तेरे पचासों को भस्म कर दे।” तब आकाश से आग ने उतर कर उसे और उसके पचासों को भस्म कर दिया।
11इस पर उसने पचास के दूसरे प्रधान को उसके पास पचासों सहित फिर भेजा। उसने उससे कहा, “हे परमेश्वर के जन, राजा ऐसा कहता है; शीघ्र्र नीचे उतर आ।”
12एलिय्याह ने उन्हें उत्तर दिया, “यदि मैं परमेश्वर का जन हूं तो आकाश से आग उतरे और तुझे और तेरे पचासों को भस्म कर दे।” तब परमेश्वर की आग ने आकाश से उतरकर उसे और उसके पचासों को भस्म कर दिया।
13इसलिए उसने पचास के तीसरे प्रधान को उसके पचासों सहित फिर भेजा। जब पचास का तीसरा प्रधान ऊपर चढ़ा तो उसने एलिय्याह के सामने आकर घुटने टेके और उससे गिड़गिड़ाकर निवेदन किया, “हे परमेश्वर के जन, मेरा और मेरे इन पचास सेवकों का प्राण तेरी दृष्टि में अमूल्य ठहरे।
14देख, आकाश से आग उतरी और उसने पचास-पचास के पहले दो प्रधानों को उनके पचासों सहित भस्म कर दिया, पर अब मेरा प्राण तेरी दृष्टि में अमूल्य ठहरे।”
15और यहोवा के दूत ने एलिय्याह से कहा, “उसके साथ नीचे जा, उससे भयभीत न हो।” अतः वह उठा और उसके साथ राजा के पास नीचे गया।
16तब उसने उससे कहा, “यहोवा यों कहता हैः तूने तो एक्रोन के देवता बालजबूब से पूछने को दूत भेजे। क्या इस्राएल में परमेश्वर नहीं कि तू उसका वचन पूछता? इसलिए जिस पलंग पर तू चढ़ा हुआ है उससे नीचे न उतरेगा, परन्तु निश्चय मर जाएगा।”
17अतः यहोवा के वचन के अनुसार, जैसा एलिय्याह ने कहा था, वह मर गया। और इसलिए कि उसका कोई पुत्र न था, यहोराम उसके स्थान में यहूदा के राजा यहोशापात के पुत्र यहोराम के दूसरे वर्ष में राज्य करने लगा।
18अहज्याह के शेष कार्य जो उसने किए क्या वे इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)