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पुराना नियम · 2 राजा · अध्याय 16 / 25

2 राजा 16

1रमल्याह के पुत्र पेकह के राज्य के सत्रहवें वर्ष में यहूदा के राजा योताम का पुत्र आहाज राजा हुआ।

2जब आहाज राजा बना, वह बीस वर्ष का था तथा यरूशलेम में सोलह वर्ष तक राज्य करता रहा। यघपि उसके पूर्वज दाऊद ने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक था, फिर भी उसने वैसा नहीं किया।

3वह इस्राएल के राजाओं के मार्ग पर चला और जिन जातियों को यहोवा ने इस्राएलियों के सामने से निकाल दिया था, उनकी घृणित प्रथा के अनुसार उसने अपने ही पुत्र को आग में होम किया।

4उसने ऊंचे स्थानों और पहाड़ियों पर तथा प्रत्येक हरे-भरे वृक्ष के नीचे बलि चढ़ाई तथा धूप जलाई।

5तब सीरिया के राजा रसीन और इस्राएल के राजा रमल्याह के पुत्र पेकह ने युद्ध करने के लिए यरूशलेम पर चढ़ाई की। उन्होंने आहाज को घेर तो लिया, परन्तु उस पर प्रबल न हो सके।

6तब सीरिया के राजा रसीन ने एलत को पुनः सीरिया के अधीन कर लिया और यहूदियों को एलत से पूर्णतः निकाल दिया। तब सीरियाई एलत में जा बसे और आज भी वहीं रहते है।

7आहाज ने अश्शूर के राजा तिग्लत-पिलेसेर को सन्देशवाहक भेजकर यह संदेश दिया, “मैं तेरा दास और तेरा पुत्र हू। आकर मुझे सीरिया और इस्राएल के राजाओं के हाथ से मुक्त कर जो मुझ पर चढ़ आए है।”

8तब यहोवा के भवन और राजभवन के कोषागारों में जितना भी सोना-चांदी मिला, आहाज ने वह सब अश्शूर के राजा को भेंट-स्वरूप भेज दिया।

9अश्शूर के राजा ने उसकी बात मान ली; उसने आक्रमण करके दमिश्क पर अधिकार कर लिया और प्रजा को बन्दी बनाकर कीर को ले गया तथा रसीन को मौत के घाट उतार दिया।

10तब राजा आहाज अश्शूर के राजा तिग्लत-पिलेसेर से भेंट करने दमिश्क पहुंचा। वहां उसने दमिश्क की वेदी देखी और उसकी बनावट का नमूना और सारी शिल्पकारी का विवरण ऊरिय्याह याजक के पास भेज दिया।

11अतः ऊरिय्याह याजक ने वेदी बनाई। उसने इसे ठीक उसी नमूने पर जो आहाज राजा के दमिश्क से भेजा था आहाज राजा से दमिश्क से लौटने के पहले बना लिया।

12राजा ने दमिश्क से लौटकर वेदी को देखा और वह उसके समीप जाकर उस पर चढ़ा।

13उसने उस पर होमबलि तथा अन्नबलि चढ़ाया, अर्घ उंडेला और वेदी पर मेलबलियों का रक्त छिड़क दिया।

14और उसने कांस्य-वेदी जो यहोवा के सामने रहती थी उसे भवन के सामने से अर्थात् नई वेदी और यहोवा के भवन के मध्य से हटाकर अपनी वेदी के उत्तर की ओर स्थापित कर दिया।

15तब राजा आहाज ने ऊरिय्याह याजक को आदेश दिया, “प्रातःकालीन होमबलि तथा सांयकालीन अन्नबलि तथा राजा का होमबलि और अन्नबलि तथा समस्त प्रजा के होमबलि, अन्नबलि तथा उनके अर्घ इस बड़ी वेदी पर चढ़ाना तथा होमबलि और बलि का रक्त इस वेदी पर छिड़कना, परन्तु कांस्य-वेदी का उपयोग मैं परमेश्वर की इच्छा जानने के लिए करूंगा।”

16अतः राजा आहाज ने जो कुछ कहा था, ऊरिय्याह याजक ने वह सब किया।

17तब राजा आहाज ने कुर्सियों के किनारे काटकर हौदियों को उन पर से उतार दिया। उसने कांसे के बैलों की पीठ पर से विशाल हौज को उतार कर पत्थर के फ़र्श पर रख दिया।

18और उसने उस रास्ते को जिस पर छत थी और जिसे उन्होंने विश्राम के दिन के लिए भवन के भीतर बनाया था और राजा के बाहरी प्रवेश-द्वार को अश्शूर के राजा के कारण हटा दिया।

19राजा अहाज के शेष कार्य जो उसने किए क्या वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?

20अतः आहाज अपने पूर्वजों के साथ सो गया तथा उसे उसके पूर्वजों के मध्य दाऊदनगर में मिट्टी दी गई और उसका पुत्र हिजकिय्याह उसके स्थान पर राजा बना।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)