नया नियम · 2 पतरस · अध्याय 2 / 3
2 पतरस 2
1परन्तु उन लोगों के मध्य झूठे नबी भी उठ खड़े हुए जैसा कि तुम्हारे मध्य भी झूठे उपदेशक होंगे जो गुप्त रूप से घातक और विधर्मी शिक्षा का प्रचार करेंगे, यहां तक कि उस स्वामी को भी अस्वीकार करेंगे जिसने उन्हें मोल लिया है, और इस प्रकार वे शीघ्र ही अपने ऊपर विनाश ले आएंगे।
2बहुत से लोग तो उनकी विजय-वासना का अनुसरण करेंगे तथा उनके कारण सत्य के मार्ग की निन्दा होगी।
3वे लोभ में आकर झूठी बातें बनाएंगे और तुमसे अनुचित लाभ उठाएंगे। दण्ड की आज्ञा तो उन पर पहिले से ही हो चुकी है, और उनका विनाश सोया हुआ नही।
4जबकि परमेश्वर ने उन स्वर्गदूतों को जिन्होंने पाप किया, न छोड़ा, पर उन्हें नरक में डाल दिया और न्याय के दिन के लिए अंधेरे कुण्डों में बन्दी बना रखा है,
5तथा उस प्राचीन जगत को भी न छोड़ा, परन्तु भक्तिहीनों के संसार पर जल-प्रलय भेजा, फिर भी धार्मिकता के प्रचारक नूह को अन्य सात व्यक्तियों सहित बचा लिया,
6और जबकि उसने सदोम और अमोरा के नगरों को विनाशकारी दण्ड देकर भस्म कर दिया कि वे आने वाले भक्तिहीनों के लिए एक उदाहरण ठहरें,
7जबकि उसने धर्मी लूत को भी छुड़ा लिया जो चरित्रहीन लोगों के वासनायुक्त आचरण से दुखी था-
8क्योंकि वह धर्मी पुरष उनके मध्य रहते हुए जो कुछ देखता और सुनता था, उनके कुकर्मोर्ं के कारण अपनी सच्ची आत्मा में दिन प्रतिदिन व्यथित होता था-
9तो भक्तों को प्रभु परीक्षा में से निकालना और अधर्मियों को न्याय के दिन तक दण्ड के लिए रखना जानता है,
10विशेषकर उनको जो अपनी देह को भ्रष्ट अभिलाषाओं में लिप्त रखते और प्रभुता को तुच्छ जानते है। ये उद्दण्ड स्वेच्छाचारी लोग महिमामय प्राणियों का भी अपमान करने से नहीं डरते,
11जबकि स्वर्गदूत, शक्ति व सामर्थ्य में श्रेष्ठ होते हुए भी, प्रभु के सम्मुख उन पर भला-बुरा कहकर दोष नहीं लगाते।
12ये लोग मूढ़ पशुओं और विवेकहीन प्राणियों के सदृश हैं जो पकड़े और मार डाले जाने के लिए उत्पन्न हुए है। ये जिन बातों को जानते भी नहीं, उनकी निन्दा करते है। इनका विनाश भी पशुओं की भांति होगा।
13इन्हें बुराई का बदला बुरा ही मिलेगा। दिन के समय आमोद-प्रमोद करना इन्हें अच्छा लगता है। ये दाग और धब्बे हैं, तथा जब ये तुम्हारे साथ भोज में शामिल होते हैं तो छल करके रंगरलियां मनाते है।
14इनकी आंखें व्यभिचार से भरी हैं, और ये पाप करने से नहीं रुकती। ये चंचल मन वालों को फुसला लेते हैं, इनके मन लालच करने के अभ्यस्त हैं, ये शापित सन्तान है।
15ये सीधे मार्ग को छोड़कर भटक गए हैं: इन्होंने बओर के पुत्र बिलाम के मार्ग का अनुसरण किया है, जिसने अधर्म की मज़दूरी को प्रिय जाना था।
16परन्तु उसे अपने अधर्म के काम के लिए ताड़ना मिली। एक अबोल गदही ने भविष्यद्वाणी की बोली बोलकर उस नबी के पागलपन को रोका।
17ये सूखे जल-स्रोत है। ये आंधी से उड़ाए जाने वाले निर्जल बादल हैं, जिनके लिए गहन अंधकार ठहराया गया है।
18ये अहंकार की व्यर्थ बातें कर के शारीरिक लालसाओं व लुचपन द्वारा उन लोगों को फँसा लेते हैं जो अभी-अभी भटके हुओं में से निकले है।
19ये उन्हें स्वतंत्र करने का वचन देते हैं जबकि स्वयं भ्रष्टता के दास हैं, क्योंकि भविष्यद्वाणी जिस से हार जाता है, उसी का दास बन जाता है।
20यदि ये हमारे उद्धारकर्त्ता प्रभु यीशु मसीह की पहिचान द्वारा संसार की अशुद्धताओं से बच निकलने के बाद फिर उनमें फंस कर हार गए, तो उनके लिए पिछली दशा पहिले से भी बुरी हो गई है।
21उनके लिए उस पवित्र आज्ञा को जानकर जो उन्हें दी गई थी, फिर जाने की अपेक्षा भला होता कि वे धार्मिकता के मार्ग को न जानते।
22उन पर यह कहावत ठीक बैठती है, “कुत्ता अपने वमन के पास लौटता है,” और, “नहलाई हुई सुअरनी कीचड़ में लोटने के लिए लौट जाती है।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)