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पुराना नियम · 2 शमूएल · अध्याय 13 / 24

2 शमूएल 13

1फिर ऐसा हुआ कि दाऊद के पुत्र बशालोम की एक अति सुन्दर बहन थी। उसका नाम तामार था। दाऊद का पुत्र अम्नोन उस पर मोहित हुआ।

2और अम्नोन अपनी बहन तामार के कारण ऐसा व्याकुल हो गया कि बीमार पड़ गया। वह तो कुंवारी थी, और उसके साथ कुछ करना तो अम्नोन को कठिन जान पड़ा।

3पर अम्नोन का एक मित्र था जिसका नाम योनादाब था। वह दाऊद के भाई शिमा का पुत्र था। योनादाब बड़ा धूर्त था।

4उसने उससे कहा, “हे राजकुमार, तू दिन-प्रतिदिन क्यों दुबला होता जा रहा है? क्या मुझे नहीं बताएगा?” तब अम्नोन ने उससे कहा, “मैं अपने भाई अबशालेाम की बहन तामार से प्रेम करता हू।”

5तब योनादाब ने उससे कहा, “अपने पलंग पर लेट कर बीमार बन जा। जब तेरा पिता तुझे देखने आए तब तू कहना, ‘मेरी बहन तामार मुझे भोजन परोसे। वह मेरे सामने भोजन बनाए कि मैं उसके ही हाथ से भोजन खा सकू।”’

6अतः अम्मोन लेट कर बीमार बना। जब राजा उसे देखने आया तब अम्नोन ने उससे कहा, “कृपया मेरी बहन तामार को आने दे कि वह मेरे देखते दो पूड़ियां बनाए कि मैं उसके हाथ से खाऊ।”

7दाऊद ने घर में तामार के लिए यह कहला भेजा, “अपने भाई अम्नोन के घर जा और उसके लिए भोजन बना।”

8तब तामार अपने भाई अम्नोन के घर गई। वह लेटा हुआ था। तामार ने आटा लेकर गूंधा, उसके सामने पूड़ियां पकाईं।

9फिर वह थाल लेकर गई, और उसमें से उसके आगे परोस दिया, पर उसने खाने से इनकार किया। फिर अम्नोन ने कहा, सब मेरे पास से बाहर चले जाए।” इसलिये सब उसके पास से चले गये।

10तब अम्नोन ने तामार से कहा, “भोजन यहीं शयन-कक्ष में ले आ कि मैं तेरे हाथ से खा सकू।” अतः तामार अपनी बनाई हुई पूड़ियां लेकर अपने भाई अम्नोन के पास शयन-कक्ष में गई।

11जब वह उसे खिलाने के लिए आई तब उसने उसे पकड़ लिया और उससे कहा, “आ मेरी बहन, मेरे साथ सो।”

12पर उसने उसे उत्तर दिया, “नहीं, मेरे भाई, मुझे भ्रष्ट मत कर, क्योंकि इस्राएल में ऐसा काम नहीं किया जाता। ऐसा लज्जाजनक कार्य मत कर।

13मैं ऐसे कलंक से कैसे छुटकारा पाऊंगी? और तू तो सारे इस्राएल के मूर्खों में गिना जाएगा। इस कारण, तू कृपया राजा से बात कर, क्योंकि वह मुझे तेरे हाथ सौंपने से इनकार नहीं करेगा।”

14फिर भी उसने उसकी बातों को न सुना, और इसलिए कि वह उससे बलिष्ठ था उसने बलात्कार करके उसे भ्रष्ट कर दिया।

15फिर अम्नोन को उससे अत्यधिक घृणा हो गई, वरन् उसकी घृणा उसके प्रेम से बढ़कर थी। अतः उसने उससे कहा, “उठ, चली जा!”

16पर उसने उससे कहा, “नहीं, क्योंकि मुझे भगा देने का अत्याचार उससे बढ़कर होगा जो तूने मुझसे किया है।” फिर भी उसने उसकी नहीं सुनी।

17तब उसने अपने सेवक को बुलाकर आदेश दिया, “इस स्त्री को बाहर निकाल दे और दरवाज़ा बन्द कर दे।”

18अब तामार तो रंगबिरंगा कुर्ता पहने थी, क्योंकि अविवाहित राजकुमारियां ऐसी ही पोशाक पहना करती थी। अतः उसके सेवक ने उसे बाहर निकाल दिया, और दरवाज़े को भीतर से बन्द करके चिटकनी लगा दी।

19तब तामार ने अपने सिर पर राख डाली, और अपना रंग-बिरंगा कुरता जिसे वह पहने हुई थी फाड़ डाला। फिर वह अपने सिर पर हाथ रखे उच्च स्वर से रोती-कलपती चली गई।

20तब उसके भाई अबशालोेम ने उससे कहा, “क्या तेरा भाई अम्नोन तेरे साथ रहा है? पर अब चुप रह, मेरी बहन, वह तो तेरा भाई है। इस बात से बहुत दुखी मत हो।” तामार चुप रही, और अपने भाई अबशालोम के घर मन मारे पड़ी रही।

21दाऊद राजा इन सब बातों को सुन कर अत्यधिक क्रोधित हुआ।

22पर अबशालोम ने अम्नोन से भला-बुरा कुछ नहीं कहा। अबशालोम तो अम्नोन से घृणा करता था, क्योंकि उसने उसकी बहन तामार को भ्रष्ट कर दिया था।

23दो वर्ष के बाद ऐसा हुआ कि अबशालोम ने एप्रैम के आसपास बाल-हासोर में भेड़ों का ऊन कतरवाया। अब अबशालोम ने सब राजकुमारों को आमन्त्रित किया।

24उसने राजा के पास जाकर कहा, “देख पिता, मुझ तेरे दास के ऊन कतरने वाले काम में लगे है। कृपा करकेे राजा अपने सेवकों सहित अपने इस दास के साथ चले।”

25राजा ने अबशालोम से कहा, “नहीं, मेरे पुत्र, हम सब के सब न जाएं, कहीं ऐसा न हो कि हम तेरे लिए भार बन जाएं। इस पर अबशालेाम बहुत गिड़गिड़ाया। फिर भी राजा ने जाने से इनकार किया, पर उसे आशीर्वाद दिया।

26तब अबशालोम ने कहा, “यदि नहीं, तो कृपया मेरे भाई अम्नोन ही को हमारे साथ जाने दे।” राजा ने उससे कहा, वह तेरे साथ क्यों जाए?”

27पर जब अबशालोम ने बहुत आग्रह किया, तब राजा ने अम्नोन और अन्य सब राजकुमारों को उसके साथ जाने की अनुमति दे दी।

28अबशालोम ने अपने सेवकों को आज्ञा दी, “अब सुनो, जब अम्नोन शराब के नशे में चूर हो जाए, और जब मैं तुमसे कहूं, ‘अम्नोन को मारो’, तब तुम उसे मार डालना। डरना मत। क्या मैंने ही तुम्हें यह आज्ञा नहीं दी है? हियाव बांधो, पुरुषार्थ करो।”

29अतः अबशालोम के सेवकों ने अम्नोन के साथ ठीक वैसा ही किया जैसा अबशालोम ने आज्ञा दी थी। तब सब राजकुमार उठे और अपने-अपने खच्चर पर सवार हो कर भाग निकले।

30वे मार्ग ही में थे कि दाऊद को सन्देश मिला, “अबशालोम ने सब राजकुमारों को मार डाला है, उनमें से कोई जीवित नहीं बचा।”

31तब राजा उठा और अपने कपड़े फाड़कर भूमि पर पड़ गया। उसके सब सेवक भी अपने-अपने कपड़े फाड़कर उसके पास खड़े रहे।

32तब दाऊद के भाई शिमा के पुत्र योनादाब ने कहा, “मेरा स्वामी ऐसा न समझे कि उन्होंने सभी जवानों अर्थात् राजकुमारों को मार डाला है, क्योंकि अम्नोन ही मरा है। अबशालोम की बातों के अनुसार जिस दिन अम्नोन ने उसकी बहन तामार को भ्रष्ट किया था उसी दिन यह बात निश्चित हो गई थी।

33अतः मेरा स्वामी राजा इस समाचार से व्याकुल न हो कि राजा के सब पुत्र मर गए, क्योंकि केवल अम्नोन ही मरा है।”

34अबशालोम तो भाग चुका था। अब उस जवान ने जो पहरेदार था अपनी आंखें उठाकर टकटकी लगाई, और देखो, पीछे की ओर से बहुत-से लोग पर्वत के किनारे के मार्ग से चले आ रहे थे।

35और योनादाब ने राजा से कहा, “देख, राजकुमार आ गए है। जैसा तेरे दास ने कहा था वैसा ही हुआ है।”

36और ऐसा हुआ कि उसका बोलना समाप्त हुआ ही था कि राजकुमारों ने प्रवेश किया, और वे ज़ोर-ज़ोर से रोने लगे। तब राजा और उसके सेवक भी फूट-फूट कर रोने लगे।

37अबशालेाम तो भाग कर गेशूर के राजा, अम्मीहूद के पुत्र तल्मै के पास जा पहुंचा। और दाऊद अपने पुत्र के लिए प्रतिदिन शोक मनाता रहा।

38अबशालेाम भागकर गेशूर चला गया और वहां तीन वर्ष रहा।

39दाऊद राजा के हृदय में अबशालोम के पास जाने की बड़ी लालसा हुई, क्योंकि अम्नोन की मृत्यु के सम्बन्ध में उसका मन शान्त हो चुका था।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)