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नया नियम · प्रेरितों के काम · अध्याय 13 / 28

प्रेरितों के काम 13

1अन्ताकिया की कलीसिया में कुछ नबी तथा शिक्षक थे, जैसेः बरनाबास और शमौन जो काला कहलाता था, लूकियुस कुरेनी, मनाहेम जिसका पालन-पोषण चौथाई देश के राजा हेरोदेस के साथ हुआ था, और -शाऊल।

2जब वे उपवास तथा प्रभु की उपासना कर रहे थे तो पवित्र आत्मा ने कहा, ‘‘मेरे लिए बरनाबास तथा -शाऊल को उस कार्य के लिए अलग करो जिसके लिए मैंने उन्हे बुलाया है।”

3जब वे उपवास तथा प्रार्थना कर चुके तो उन पर हाथ रख कर उन्हें भेज दिया।

4अतः पवित्र आत्मा द्वारा भेजे जाकर वे सिलूकिया गए और वहां से जहाज़ द्वारा साइप्रस गए।

5सलमीस पहुँच कर उन्होंने यहूदियों के आराधनालयों में परमेश्वर के वचन का प्रचार करना आरम्भ किया। यूहन्ना उनका सेवक था।

6जब वे उस सारे द्वीप में से होते हुए पाफुस पहुँचे तो उन्हें बार-यीशु नामक एक जादूगर मिला जो यहूदी और झूठा नबी था।

7वह राज्यपाल सिरगियुस पौलुस के साथ था जो बुद्धिमान पुरफ़ज था। इस व्यक्ति ने बरनाबास तथा -शाऊल को बुलवाकर परमेश्वर का वचन सुनना चाहा।

8परन्तु इलीमास जादूगर ने-उसके नाम का यही अर्थ है- उनका विरोध कर के राज्यपाल को विश्वास करने से बहकाने का यत्न किया।

9परन्तु -शाऊल ने जो पौलुस भी कहलाता था, पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो उसकी ओर घ्यान से देख कर कहा,

10‘‘सब छल और धूर्तता से भरे हे -शैतान की सन्तान, तू जो समस्त धार्मिकता का -शत्रु है, क्या तू प्रभु के सीधे मार्गो को टेढ़ा करना न छोड़ेगा?

11अब देख, प्रभु का हाथ तुझ पर पड़ा है और तू अन्धा हो जाएगा तथा कुछ समय तक सूर्य को न देख सकेगा।” तब तुरन्त ही उस पर धुंधलापन और अंधकार छा गया, और वह इधर-उधर टटोलने लगा कि कोई उसका हाथ पकड़कर उसे मार्ग दिखाए।

12तब राज्यपाल ने इस घटना को देख कर और प्रभु के उपदेश से आशचर्यचकित होकर विश्वास किया।

13पौलुस और उसके साथी जल-मार्ग से होकर पाफुस से पंफूलिया के पिरगा में आए, और यूहन्ना उन्हें छोड़ कर यरूशलेम लौट गया।

14वे पिरगा से चलकर पिसिदिया के अंताकिया में पहुंचे और सब्त के दिन आराधनालय में जाकर बैठ गए।

15व्यवस्था और नबियों की पुस्तकों में से वचन पढ़ने के पश्चात् आराधनालय के अधिकारियों ने उनके पास कहला भेजा, ‘‘भाइयों, यदि तुम्हारे पास लोगों के लिए प्रोत्साहन का कोई वचन है तो सुनाओ।”

16तब पौलुस उठ खड़ा हुआ और हाथ से संकेत करके कहने लगा। ‘‘हे इस्राएलियो, और परमेश्वर का भय मानने वालो, सुनोः

17इस प्रजा इस्राएल के परमेश्वर ने हमारे पूर्वजों को चुन लिया। उसने मिस्र देश में प्रवास के समय उन्हें महान् किया, और अपनी शक्तिशाली भुजा बढ़ाकर उनको वहां से निकाल लाया।

18और लगभग चालीस वर्ष तक जंगल में उनकी सहता रहा।

19उसे कनान देश की सात जातियों का नाश करने और उनकी भूमि को उत्तराधिकार स्वरूप बांटने में लगभग साढ़े चार सौ वर्ष लगे।

20इन बातों के पश्चात् उसने उन्हें शमूएल नबी के समय तक न्यायी दिए।

21तब उन्होंने राजा की मांग की और परमेश्वर ने बिन्यामीन के गोत्र में से एक मनुष्य, अर्थात् कीश के पुत्र शाऊल को, चालीस वर्ष के लिए उन्हें दे दिया।

22फिर उसे हटाने के पश्चात् उसने दाऊद को उनका राजा बनाया, जिसके विषय में उसने साक्षी दी और कहा, ‘मुझे एक मनुष्य यिशै का पुत्र दाऊद मिला है जो मेरे मन के अनुसार है, और जो मेरी सारी इच्छाएं पूरी करेगा।’

23इसी मनुष्य के वंश से परमेश्वर ने प्रतिज्ञानुसार इस्रएल के पास एक उद्धारकर्ता अर्थात यीशु को भेजा,

24जिसके आने से पहिले यूहन्ना ने समस्त इस्राएलियों के सब लोगों में मनफिराव के बपतिस्मा का प्रचार किया था।

25जब यूहन्ना अपनी अवधि पूरी करने पर था तो वह कहा करता था, ‘तुम मुझे क्या समझते हो? मैं वह नहीं हूँ, परन्तु देखो, मेरे बाद एक आने वाला है जिसके पांव की जूतियों के बन्ध भी मैं खोलने के योग्य नहीं हूँ।

26‘‘हे आदरणीय भाइयो, इब्राहीम की सन्तानो और तुम में से जो परमेश्वर का भय मानते हो, हमारे लिए ही यह उद्धार का वचन भेजा गया है।

27इसी व्यक्ति को और नबियों की बातों को जिन्हें हर सब्त के दिन पढ़ा जाता है न समझते हुए, यरूशलेम के रहने वालों और उनके अधिकारियों ने उसे दोषी ठहरा कर इन्हीं बातों को पूरा किया।

28यघपि उनके पास उसे मार डालने के लिए कोई आधार नहीं था, फिर भी उन्होंने पिलातुस से मांग की कि वह मार डाला जाए।

29जब उन्होंने उसके विषय में लिखी हुई सब बातें पूरी कर लीं, तब उसे क्रूस पर से उतार कर क़ब्र में रख दिया।

30परन्तु परमेश्वर ने उसे मृतकों में से जिला उठाया।

31और जो उसके साथ गलील से यरूशलेम आए थे, उन पर वह कई दिनों तक प्रकट होता रहा। ये वे ही हैं जो अब लोगों के सामने उसके गवाह है।

32हम तुम्हें उस प्रतिज्ञा के विषय में जो पूर्वजों से की गई थी यह सुसमाचार सुनातेे हैं,

33कि परमेश्वर ने यीशु को जिलाकर वही प्रतिज्ञा हमारी सन्तान के लिए पूर्ण की जैसा कि दूसरे भजन में भी लिखा है, ‘तू मेरा पुत्र है, आज ही मैंने तुझे जन्म दिया है।’

34उसने उसे मृतकों में से जिला उठाया कि वह कभी न सड़े। उसने इस प्रकार कहा, ‘मैं दाऊद की पवित्र और अटल आशिज तुझे दूँगा।’

35इसलिए वह एक और भजन में भी कहता है, ‘तू अपने पवित्र जन को सड़ने न देगा।’

36क्योंकि दाऊद परमेश्वर के उद्देशय के अनुसार अपने युग के लोगों की सेवा पूर्ण करके सो गया, और अपने पितरों के बीच दफनाया गया, और सड़ गया।

37पर जिसे परमेश्वर ने जीवित किया वह सड़ने न पाया।

38इसलिए हे भाइयों, तुम यह जान लो कि इसी के द्वारा पापों की क्षमा का समाचार तुम्हें सुनाया जाता है,

39और उसी के द्वारा प्रत्येक विश्वास करने वाला उन सब बातों से छुटकारा पाता है जिन से तुम मूसा की व्यवस्था के द्वारा छुटकारा नहीं पा सकते थे।

40इसलिए सावधान रहो कि कहीं नबियों का कथन तुम पर घटित न हो जाएः

41‘हे निन्दा करने वालो, देखो और चकित होओ, और मिट जाओ, क्योंकि मैं तुम्हारे दिनों में एक कार्य कर रहा हूँ, ऐसा कार्य जिसकी यदि कोई तुमसे चर्चा भी करे तो तुम कदापि उसकी प्रतीति न करेागे’।”

42जब पौलुस तथा बरनाबास बाहर जाने लगे तो लोगों ने उनसे अनुरोध किया कि आने वाले सब्त के दिन ये बातें उन्हें फिर से सुनाई जाए।

43जब आराधना समाप्त हो गई तो बहुत-से यहूदी तथा यहूदी मत में आए हुए भक्तों में से बहुत लोग पौलुस तथा बरनाबास के पीछे चल पड़े। उन्होंने वार्तालाप करते हुए उनसे आग्रह किया कि परमेश्वर के अनुग्रह में बने रहे।

44अगले सब्त को प्रायः सारा नगर परमेश्वर का वचन सुनने के लिए उमड़ पड़ा।

45परन्तु जब यहूदियों ने भीड़ को देखा तो वे ईर्ष्या से भर गए और निन्दा करते हुए पौलुस की कही हुई बातों का ख्ण्डन करने लगे।

46तब पौलुस तथा बरनाबास ने दृढ़तापूर्वक कहा, ‘‘यह अवश्य था कि परमेश्वर का वचन पहिले तुम्हें सुनाया जाता, परन्तु इसलिए कि तुम उसकी अवहेलना करते हो तथा अपने आप को अनन्त जीवन के अयोग्य ठहराते हो तो देखो, हम ग़ैरयहूदियों की ओर फिरते है।

47क्योंकि प्रभु ने हमें यह आज्ञा दी है, ‘मैंने तुझे ग़ैरयहूदियों के लिए ज्योति ठहराया है कि तू पृथ्वी की छोर तक उद्धार का कारण हो’।”

48जब ग़ैरयहूदियों ने यह सुना तो वे आनन्दित होने तथा प्रभु के वचन की प्रशंसा करने लगे, और जितने अनन्त जीवन के लिए ठहराए गए थे, उन्होंने विश्वास किया।

49अैार प्रभु का वचन पूरे क्षेत्र में फैलता चला गया।

50परन्तु यहूदियों ने भक्त एवं कुलीन स्त्रियों तथा -शहर के प्रमुख व्यक्तियों को भड़काया और पौलुस तथा बरनाबास के विरफ़द्ध उपद्रव करवा कर उन्हें अपनी सीमा के बाहर निकाल दिया।

51तब वे उनके विरोध में अपने पैरों की धूल झाड़कर इकुनियुम को चले गए।

52और चेले आनन्द तथा पवित्र आत्मा से निरन्तर परिपूर्ण होते गए।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)