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पुराना नियम · व्यवस्थाविवरण · अध्याय 15 / 34

व्यवस्थाविवरण 15

1“प्रत्येक सात वर्ष के अन्त में तुम ट्टण से मुक्त करना।

2ट्टण से मुक्त करने की यह विधि हैः प्रत्येक ट्टण को जो उसने अपने पड़ोसी को दिया है, छोड़ दे; वह इसे अपने पड़ोसी या अपने भाई से बलपूर्वक वसूल न करे। क्योंकि यहोवा के नाम से ट्टण-मुक्ति का प्रचार हो चुका है।

3परदेशी से तो तू बलपूर्वक वसूल कर सकता है; परन्तु तेरे भाई के पास तेरा जो कुछ हो उसे तू छोड़ देना।

4तो भी तुम्हारे मध्य कोई दरिद्र नहीं रहेगा क्योंकि तेरा परमेश्वर जिस देश को तुझे उत्तराधिकार के रूप में अधिकार करने के लिए दे रहा है, वहां यहोवा तुझे निश्चय आशीष देगा।

5यदि तू केवल अपने परमेश्वर यहोवा की वाणी को ध्यान-पूर्वक सुने और इन सब आज्ञाओं का जिन्हें मैं आज तुझे सुनाता हूं सावधानी से पालन करे,

6तो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार आशीष देगा, और तू बहुत-सी जातियों को ट्टण देगा; परन्तु तू आप ट्टण नहीं लेगा। तू बहुत-सी जातियों पर प्रभुता करेगा, परन्तु वे तुझ पर प्रभुता नहीं करेंगी।

7“उस देश में जो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे दे रहा है तेरे मध्य तेरे फाटकों के भीतर यदि तेरे भाइयों में से कोई दरिद्र व्यक्ति हो तो अपने दरिद्र भाई के लिए अपना हृदय कठोर मत करना, और न उसके लिए अपनी मुट्ठी बन्द करना;

8परन्तु उसके लिए अपनी मुट्ठी उदारता से खोलना, और उसे जिस किसी वस्तु का अभाव हो उसकी आवश्यकता-पूर्ति के लिए उसे पर्याप्त ट्टण उदारतापूर्वक देना।

9सचेत रह कि तेरे मन में ऐसा कुविचार उत्पन्न न हो कि सातवां वर्ष जो ट्टण-मुक्ति का वर्ष है वह निकट है, इस कारण तेरी दृष्टि अपने दरिद्र भाई की ओर टेढ़ी हो जाए और तू उसे कुछ भी न दे। तब वह तेरे विरफ़द्ध यहोवा को पुकारेगा और यह तेरे लिए पाप ठहरेगा।

10तू उसे उदारतापूर्वक देना, और जब तू उसे दे तो तेरे मन में कुढ़न न हो क्योंकि इसी बात के कारण तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे सब कामों तथा उन सब बातों में जिसमें तू हाथ लगाएगा, तुझे आशीष देगा।

11देश में दरिद्रों का कभी अन्त नहीं होगा इसलिए मैं तुझे आज्ञा देता हूं, कि तू अपने भाई के लिए तथा अपने देश के दीन और दरिद्रों के लिए अपनी मुट्ठी उदारतापूर्वक खोलना।

12“यदि तेरा कोई भाई-बन्धु, अर्थात् कोई इब्री पुरफ़ष या स्री तेरे हाथ बेचा जाए तो वह छः वर्ष तक तेरी सेवा करे; परन्तु सातवें वर्ष तू उसे स्वतंत्र कर देना।

13जब तू उसे स्वतंत्र करे तो उसे खाली हाथ जाने न देना।

14तू अपनी भेड़-बकरियों, अपने खलिहान तथा अपने दाखमधु के कुंड में से उदार हृदय से उसे देना। तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझे जैसी आशीष दी है उसी के अनुसार उसे देना।

15यह स्मरण रखना कि तू भी मिस्र देश में दास था, और तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझे छुड़ाया। इसीलिए मैं तुझे आज इस बात की आज्ञा देता हू।

16यदि वह तुझसे तथा तेरे घर-बार से प्रेम करता और तेरे साथ सुख-शान्ति से रहता है, और इस कारण वह तुझसे कहे, कि मैं तेरे पास से नहीं जाऊंगा,

17तब तू सुतारी लेना, और उसका कान दरवाजे पर टिका कर छेद देना, और वह सर्वदा तेरा दास बना रहेगा। ऐसा ही तू अपनी दासी से भी करना।

18जब तू उसे अपने पास से जाने दे तब यह तुझे कठिन न जान पड़े। क्योंकि उसने छः वर्ष तक मजदूरी पर लगाए गए एक मजदूर की सेवा से दुगुनी सेवा की है। अतः तेरा परमेश्वर यहोवा जो कुछ तू करेगा उसमें तुझे आशीष देगा।

19“तू अपने परमेश्वर यहोवा के लिए अपने गाय-बैलों तथा भेड़-बकरियों से उत्पन्न सब पहलौठे नरों को अर्पण करना। अपनी गायों के पहलौठे से कोई काम न लेना, और न अपनी भेड़-बकरियों के पहलौठे का ऊन कतरना।

20तू और तेरा घराना उसके मांस को प्रतिवर्ष अपने परमेश्वर यहोवा के सामने उस स्थान में खाएं, जिसे यहोवा चुन लेगा।

21परन्तु यदि उसमें किसी प्रकार का दोष हो, जैसे लंगड़ापन, या अन्धापन या अन्य कोढ़ विशेष दोष हो तो उसे अपने परमेश्वर यहोवा के लिए बलिदान मत करना।

22तू उसे अपने फाटकों के भीतर खाना। उसे शुद्ध और अशुद्ध दोनों प्रकार के मनुष्य जैसे चिकारे या हरिण के मांस को खाते हैं वैसे ही उसे भी खाए।

23तू केवल उसका लहू मत खाना। तू उसे भूमि पर जल के समान उंडेल देना।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)