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पुराना नियम · व्यवस्थाविवरण · अध्याय 2 / 34

व्यवस्थाविवरण 2

1“तब जैसे यहोवा ने मुझसे कहा था, हमने मुड़कर लाल समुद्र के मार्ग से जंगल की ओर जाने के लिए प्रस्थान किया, तथा हम बहुत दिनों तक सेईर पर्वत के किनारे-किनारे चलते रहे।

2और यहोवा ने मुझसे यह कहा कि

3तुम लोग काफी समय से इस पर्वत के किनारे-किनारे चलते रहे हो, अब उत्तर की ओर बढ़ो।

4तू लोगों को यह आज्ञा दे, कि अब तुम सेईर में रहने वाले अपने एसाव-वंशी भाइयों के क्षेत्र से होकर निकलोगे और वे तुमसे डरेंगे, अतः तुम बहुत सावधान रहना।

5उनसे छेड़-छाड़ मत करना, क्योंकि मैं उनके देश में तुम्हें पैर रखने तक की जगह न दूंगा। मैंने सेईर पर्वत एसाव को उत्तराधिकार में दे दिया है।

6तुम उनसे अपने खाने के लिए रफ़पये देकर भोजन मोल लेना तथा अपने पीने के लिए रफ़पये देकर पानी भी मोल लेना।

7क्योंकि तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हारे हाथ के सब कामों पर आशीष दी है। इस विशाल जंगल में तुम्हारी यात्रा उसके सामने प्रकट है। इन चालीस वर्षों में तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारे साथ रहा है, तथा तुम्हें किसी भी वस्तु की कमी नहीं हुई है।

8“अतः हम अपने भाइयों अर्थात् सेईर निवासी एसाव-वंशियों से आगे बढ़कर और एलत तथा एस्योन-गेबेर और अराबा के मार्ग से हटकर मुड़े और मोआब के जंगल से होकर निकले।

9तब यहोवा ने मुझसे कहा, ‘मोआबियों को मत सताना, न उनको युद्ध के लिए ललकारना क्योंकि मैं इनके देश का कोई भाग तुम्हारे अधिकार में नहीं होने दूंगा, क्योंकि आर को मैंने लूत-वंशियों के उत्तराधिकार में दे दिया है।

10पूर्वकाल में एमी लोग वहां के निवासी थे, तथा वे अनाकियों के समान बड़े, कद में ऊँचे, तथा असंख्य थे।

11अनाकियों के समान वे भी रपाई गिने जाते हैं, परन्तु मोआबी उनको एमी कहते है।

12पूर्वकाल में होरी लोग सेईर में निवास करते थे, परन्तु एसाव-वंशियों ने उनकी भूमि पर अधिकार करके उन्हें अपने सामने से मिटा दिया तथा उनके स्थान में स्वयं बस गए जैसा कि इस्राएल ने अपने उत्तराधिकार के उस देश में किया था जिसे यहोवा ने उन्हें दिया।

13अब तुम लोग उठकर जेरेद नाले को पार करो।’ अतः हमने जेरेद नाले को पार किया।

14कादेश-बर्ने से चलकर जेरेद नाले को पार करने तक की यात्रा करने में हमें कुल अड़तीस वर्ष लगे। इस बीच यहोवा की शपथ के अनुसार उस पीढ़ी के युद्ध करने वाले सब पुरफ़ष छावनी में से नष्ट हो गए,

15वरन् जब तक वे सबके सब नष्ट न हो गए तब तक यहोवा का हाथ उनके विरफ़द्ध उठा रहा कि छावनी में से उनको मिटा डाले।

16“अन्ततः जब प्रजा में से युद्ध करने वाले सब पुरफ़ष मर मिटे तब ऐसा हुआ कि

17यहोवा ने मुझसे यह कहा कि

18आज तू आर को अर्थात् मोआब की सीमा को पार कर।

19जब तुम अम्मोनियों के सामने पहुंचो तो न उनको सताना, न उनको छेड़ना क्योंकि मैं अम्मोनियों के देश में से कोई भी भाग तुम्हें उत्तराधिकार में नहीं दूंगा। मैंने तो उसे लूत के वंशजों को उत्तराधिकार में दे दिया है।

20वह देश रपाइयों का देश भी गिना जाता है क्योंकि रपाई लोग पूर्वकाल में वहां निवास करते थे, परन्तु अम्मोनी लोग उन्हें जमजुम्मी कहते थे।

21ये तो अनाक-वंशियों के समान बड़े, असंख्य और कद में ऊंचे थे, परन्तु यहोवा ने रपाइयों को उनके सामने नष्ट कर दिया, तथा वे उन्हें हटाकर उनके स्थान में बस गए, जैसे आज तक भी बसे हुए है।

22यहोवा ने उनके लिए ठीक वैसा ही किया जैसा उसने सेईर में निवास करने वाले एसाव-वंशियों के लिए किया था कि उसने उनके सामने से होरियों को नष्ट कर दिया था, जिससे वे उन्हें हटा कर उनके स्थान में बस गए जैसा आज तक भी बसे हुए है।

23वैसा ही अव्वी लोग गाजा तक गांवों में निवास करते थे। कप्तोर से आए हुए कप्तोरी उनको नष्ट करके स्वयं उनके स्थान में बस गए।

24उठो, प्रस्थान करो, तथा अर्नोन की घाटी को पार करो। देखो, हेशबोन के राजा, एमोरी सीहोन तथा उसके देश को मैंने तुम्हारे हाथ में कर दिया है; उसे अधिकार में लेना आरम्भ करो और उससे युद्ध छेड़ दो।

25आज ही से मैं तुम्हारा आतंक और भय आकाश के नीचे जाति-जाति के सब लोगों के मनों में डालने लगूंगा कि जब भी वे तुम्हारे विषय में सुनें तो तुम्हारे कारण थरथराएं और व्यथित हो उठे।

26“अतः मैंने कदेमोत के जंगल से हेशबोन के राजा सीहोन के पास मेल की ये बातें कहने के लिए दूत भेजे,

27‘मुझे अपने देश में से होकर पार जाने दे, मैं राजमार्ग पर ही चलूंगा, और न दाहिने मुड़ूंगा न बाए।

28तू रफ़पया लेकर मुझे भोजन-वस्तु बेचना कि मैं भोजन कर सकूं, तथा रफ़पया लेकर पानी देना कि मैं पी सकूं, केवल मुझे पैदल निकल जाने दे।

29जैसे सेईर-वासी एसाव-वंशियों ने तथा आर-वासी मोआबियों ने मेरे साथ किया था, वैसा ही तू भी कर जब तक यरदन पार कर मैं उस देश में न पहुँच जाऊं जो हमारा परमेश्वर यहोवा हमें दे रहा है।’

30परन्तु हेशबोन का राजा सीहोन इस बात के लिए सहमत नहीं हुआ कि हम उसके देश में से होकर जाएं, क्योंकि तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने उसके मन को कठोर तथा उसके हृदय को हठीला बना दिया था कि उसे तुम्हारे हाथ कर दे, जैसा कि आज है।

31फिर यहोवा ने मुझ से कहा, ‘देख, मैंने सीहोन तथा उसके देश को तेरे हाथ में देना आरम्भ कर दिया है। अब उसे अधिकार में लेना आरम्भ कर लो कि उसका देश तुम्हारा निज भाग हो जाए।’

32“तब सीहोन अपने सब लोगों के साथ हमसे युद्ध करने को यहस में निकल आया।

33और हमारे परमेश्वर यहोवा ने उसे हमारे हाथ में कर दिया, और हमने उसको उसके पुत्रों तथा सब लोगों सहित मार डाला।

34अतः हमने उस समय उसके सब नगरों को अधिकार में कर लिया तथा प्रत्येक नगर के पुरफ़षों, स्त्रियों और बच्चों को पूर्णतः नष्ट कर दिया। हमने एक को भी जीवित न छोड़ा।

35हमने केवल पशुओं को और उन नगरों की लूट को जिनको हमने अधिकार में कर लिया था, अपने लिए रख लिया।

36अरोएर से जो अर्नोन की घाटी में है, गिलाद तक, कोई ऐसा नगर नहीं था जो इतना ऊंचा हो कि हमारी पहुंच से बाहर हो। हमारे परमेश्वर यहोवा ने सबको हमारे हाथ में कर दिया।

37तुम केवल अम्मोनियों के देश के निकट, यब्बोक नदी के किनारे, पहाड़ी प्रदेशों के नगरों में, और जहां-जहां हमारे परमेश्वर यहोवा ने जाने को मना किया था वहां नहीं गए।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)