पुराना नियम · व्यवस्थाविवरण · अध्याय 5 / 34
व्यवस्थाविवरण 5
1फिर मूसा ने सारे इस्राएलियों को बुलवाकर उनसे कहा, “हे इस्राएलियों, जो विधियां तथा नियम आज मैं तुम्हें सुनाता हूं, उन्हें सुनो कि तुम उन्हें सीखो और सावधानी से उनका पालन करो।
2हमारे परमेश्वर यहोवा ने होरेब पर हमारे साथ वाचा बांधी।
3इस वाचा को यहोवा ने हमारे पूर्वजों के साथ नहीं, परन्तु हम ही से बांधी, अर्थात् हम सबसे जो आज यहां जीवित है।
4यहोवा ने उस पर्वत पर अग्नि के बीच में से तुम लोगों से आमने-सामने बातें कीं,
5और मैं उस समय यहोवा और तुम्हारे बीच खड़ा था कि यहोवा के वचन तुम पर प्रकट करूं, क्योंकि तुम अग्नि के कारण भयभीत थे और पर्वत के ऊपर नहीं गए थे। उसने कहाः
6‘मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तुझे मिस्र देश अर्थात् दासत्व के घर में से निकाल लाया।
7‘तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर करके न मानना।
8‘तू अपने लिए कोई मूर्ति गढ़कर न बनाना, न किसी की प्रतिमा बनाना जो ऊपर आकाश में, या नीचे धरती पर, या धरती के नीचे जल में है।
9न तो तू उनको दण्डवत् करना और न ही उनकी उपासना करना, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखने वाला परमेश्वर हूं, और जो मुझसे बैर रखते हैं उनकी सन्तान को तीसरी और चौथी पीढ़ी तक पूर्वजों के अधर्म का दण्ड देता हूं,
10परन्तु जो मुझसे प्रेम करते तथा मेरी आज्ञाओं को मानते हैं उन हजारों-हजार पर करफ़णा किया करता हू।
11‘तू अपने परमेश्वर यहोवा का नाम व्यर्थ न लेना, क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ लेता है उसको यहोवा दण्ड दिए बिना नहीं छोड़ेगा।
12‘तू अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार सब्त के दिन को पवित्र मानना।
13छः दिन तो तू परिश्रम करके अपने सारे कामकाज करना,
14परन्तु सातवां दिन तेरे परमेश्वर यहोवा का सब्त का दिन है। उस दिन तू कोई काम न करना-न तो तू, न तेरा पुत्र, न तेरी पुत्री, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरा बैल, न तेरा गदहा, न तेरे पशु, और न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर निवास करता हो, जिससे तू और तेरे दास तथा तेरी दासियां भी विश्राम कर सके।
15तू स्मरण रखना कि तू मिस्र देश में दास था और कि तेरा परमेश्वर यहोवा अपने सामर्थी हाथ तथा अपनी बढ़ाई हुई भुजा के द्वारा तुझे वहां से निकाल लाया। इसलिए तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझे सब्त के दिन को मानने की आज्ञा दी है।
16‘तू अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, जिससे कि तू दीर्घायु हो तथा जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे दे रहा है उसमें तेरा भला हो।
17‘तू हत्या न करना।
18‘तू व्यभिचार न करना।
19‘तू चोरी न करना।
20‘तू अपने पड़ोसी के विरफ़द्ध झूठी साक्षी न देना।
21‘तू अपने पड़ोसी की पत्नी का लालच न करना, न अपने पड़ोसी के घर, न उसके खेत, न उसके दास, न उसके बैल, या गदहे, और न अपने पड़ोसी की अन्य किसी वस्तु का लालच करना।’
22“ये वचन यहोवा ने उस पर्वत पर आग, बादल तथा गहन अन्धकार के बीच से बड़ी ऊंची आवाज में तुम्हारी सारी सभा से कहे। उसने इससे अधिक कुछ नहीं कहा। फिर उसने इन्हें पत्थर की दो पटियों पर लिख कर मुझे दे दिया।
23जब पर्वत आग से धधक रहा था और तुमने अन्धकार के बीच में से आता हुआ शब्द सुना तब ऐसा हुआ कि तुम, अर्थात् तुम्हारे कुलों के प्रधान तथा तुम्हारे प्राचीन मेरे पास आए।
24और तुमने कहा, ‘देख, हमारे परमेश्वर यहोवा ने अपना तेज और वैभव हम पर प्रकट किया है, और हमने उसका शब्द अग्नि के बीच में से आता हुआ सुना है। आज हमने देख लिया कि परमेश्वर मनुष्य के साथ बातें करता है और फिर भी मनुष्य जीवित रहता है।
25तो अब हम क्यों मरें? क्योंकि यह भयंकर अग्नि हमको भस्म कर डालेगी; और यदि हम अपने परमेश्वर यहोवा की वाणी पुनः सुनें तब तो हम मर ही जाएंगे।
26क्योंकि समस्त प्राणियों में से ऐसा कौन है जो जीवित परमेश्वर को अग्नि में से बोलते हुए हमारे समान सुनकर जीवित बचा हो?
27अतः तू ही समीप जाकर वह सब सुन जो हमारा परमेश्वर यहोवा कहता है, और तब हमको वह सब बता जो हमारा परमेश्वर यहोवा तुझसे कहेगा। तब हम उसे सुनेंगे तथा उसी के अनुसार करेंगे।’
28“जब तुमने मुझसे बातें कहीं तब यहोवा ने तुम्हारी कही हुई बातें सुनीं, और यहोवा ने मुझसे कहा, ‘इन लोगों ने जो कुछ तुझसे कहा है, उनकी कही हुई बातों को मैंने सुना है। जो कुछ उन्होंने कहा है ठीक ही कहा है।
29काश, उनमें ऐसा हृदय होता कि वे मेरा भय मानते तथा मेरी सब आज्ञाओं का सदा पालन करते जिससे उनका तथा उनके वंशजों का सदा भला होता!
30उनसे जाकर कह कि वे अपने तम्बुओं में लौट जाए।
31पर तू तो यहीं मेरे पास खड़ा रह कि मैं तुझे सब आज्ञाएं, विधियां तथा नियम बताऊं जिन्हें तू उनको सिखाएगा जिससे कि वे उस देश में जिसे अधिकार में करने के लिए मैं उन्हें दे रहा हूं, उनका पालन कर सके।’
32अतः तुम अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार करने की चौकसी करना । तुम न दाहिने मुड़ना, न बाए।
33जिस मार्ग पर चलने की आज्ञा तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हें दी है उस पर पूरी रीति से तुम चलना कि तुम जीवित रहो और तुम्हारा भला हो, तथा जिस देश को तुम अपने अधिकार में करने जा रहे हो, उसमें बहुत दिनों तक रह सको।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)