पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 12 / 48
यहेजकेल 12
1तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा;।
2“हे मनुष्य की सन्तान, तू विद्रोही घराने के मध्य रहता है, जो आंखें रहते हुए भी नहीं देखते और, कान रहते हुए भी नहीं सुनते, क्योंकि वे विद्रोही घराने के है।
3इसलिए हे मनुष्य की सन्तान, निर्वासन के लिए अपना सामान तैयार कर और उनके देखते हुए, दिन ही में निर्वासन के लिए निकल जा, हां, निर्वासन में चला जा। यघपि वे विद्रोही घराने के हैं फिर भी सम्भव है कि वे ध्यान दे।
4“उनके देखते हुए दिन के समय अपनी यात्रा के थैले को निर्वासन के सामान की भांति बाहर निकालना। तब उनके देखते हुए सांझ के समय उनके समान प्रस्थान करना जो निर्वासित किए जाते है।
5उनके देखते दीवार में एक छेद बनाना और उसमें से होकर बाहर निकल जाना।
6उनके देखते कांधे पर सामान लादना और लेकर अन्धेरे में चले जाना। अपने चेहरे को ढांप लेना कि तू भूमि को न देख सके, क्योंकि मैंने तुझे इस्राएल के घराने के लिए चिह्न ठहराया है।”
7तब मैंने वैसा ही किया जैसी मुझे आज्ञा दी गई थी। दिन के समय मैंने अपनी यात्रा का सामान ऐसे बाहर निकाला मानो निर्वासन का सामान हो। तब मैंने संध्या को दीवार को अपने हाथों से फोड़ डाला, फिर अन्धेरे में चल दिया और सामान को उनके देखते अपने कांधे पर उठाकर ले गया।
8प्रातःकाल यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचाः
9“हे मनुष्य की सन्तान, क्या इस्राएल के घराने ने, हां, विद्रोही घराने ने तुझसे यह नहीं पूछा, ‘तू क्या कर रहा है?’
10उनसे कह, ‘प्रभु यहोवा यों कहता हैः यह वाणी, यरूशलेम के शासक और इस्राएल के घराने के लोगों से जो उसमें रहते हैं, सम्बन्धित है।
11उनसे कह, ‘मैं तुम्हारे लिए एक चिह्न हू। जैसा मैंने किया है वैसा ही उनके साथ किया जाएगा; तुम निर्वासन अर्थात् बन्धुवाई में जाओगे।’
12उनका शासक जो उनके मध्य है अन्धेरे में अपना सामान कांधे पर उठाएगा और बाहर चला जाएगा। उसे बाहर ले जाने के लिए वे दीवार खोदकर रास्ता बनाएंगे। वह अपना चेहरा ढांपे रहेगा कि अपनी आंखों से भूमि को न देख सके।
13मैं भी अपना जाल उस पर फैलाऊंगा और वह मेरे फंदे में फंसेगा। और मैं उसे कसदियों के देश के बेबीलोन में पहुंचा दूंगा; यघपि वह वहां मर जाएगा फिर भी उसे देखने न पाएगा।
14मैं उसके सहायकों और उसकी सब सेना अर्थात् जितने उसके आस-पास होंगे उन सब को चारों ओर तितर-बितर कर दूंगा और तलवार खींचकर उनका पीछा करूंगा।
15जब मैं उन्हें जाति जाति में तितर-बितर कर दूंगा और देश देश में फैला दूंगा तब वे जान लेंगे कि मैं ही यहोवा हू।
16परन्तु मैं उनमें से कुछ को तलवार, अकाल और महामारी से बचा रखूंगा, कि जिन जातियों में वे पहुंचें, अपने घृणित कार्यों का वर्णन करें और जान लें कि मैं ही यहोवा हू।”
17यहोवा का यह वचन भी मेरे पास पहुंचाः
18“हे मनुष्य की सन्तान, कांपते हुए अपनी रोटी खाना और थरथराते तथा चिन्ता करते हुए अपना पानी पीना।
19तब इस देश के लोगों से कह, इस्राएल देश के यरूशलेम निवासियों के विषय में प्रभु यहोवा यों कहता हैः वे चिन्तित होकर अपनी रोटी खाएंगे और भयभीत होकर अपना पानी पीएंगे। क्योंकि उसमें के सब रहने वालों की हिंसा के कारण उनका देश भरपूरी से रहित हो जाएगा।
20और बसे हुए नगर वीरान हो जाएंगे तथा देश उजाड़ हो जाएगा। तब तुम जानोगे कि मैं ही यहोवा हू।”
21तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचाः
22“हे मनुष्य की सन्तान, इस कहावत का क्या अर्थ है जो तुम इस्राएल देश के विषय में कहते हो, ‘दिन तो बीतते जाते हैं और एक भी दर्शन पूरा नहीं होता।’
23इसलिए उनसे कह, प्रभु यहोवा यों कहता हैः मैं इस कहावत को बन्द कर दूंगा जिससे इस्राएल में यह कहावत फिर कभी कही न जाए। परन्तु उनसे कह, ‘दिन और दर्शन का पूरा होना निकट है।
24क्याेंकि इस्राएल के घराने में झूठे दर्शन या चापलूसी के साथ शकुन विचारने की बात फिर कभी न होगी।
25क्याेंकि मैं यहोवा बोलूंगा और जो वचन मैं बोलूंगा उसे पूरा भी करूंगा। उसमें विलम्ब न होगा, क्योंकि हे विद्रोही घराने, तुम्हारे दिनों में जो वचन मैं कहूंगा उसे पूरा भी करूंगा। प्रभु यहोवा की यही वाणी है’।”
26फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचाः
27“हे मनुष्य की सन्तान, देख इस्राएल का घराना कहता है, ‘यह दर्शन जो वह देखता है बहुत दिनों के बाद पूरा होगा, वह आने वाले युगों केे लिए नबूवत करता है।’
28इसलिए उनसे कह, ‘प्रभु यहोवा यों कहता हैः अब से मेरे किसी भी वचन को पूरा होने में विलम्ब न होगा। जो भी वचन मैं कहूं, वह पूरा हो जाएगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है’।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)