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पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 46 / 48

यहेजकेल 46

1“प्रभु यहोवा यों कहता हैः भीतरी आंगन का पूर्वी फाटक सप्ताह के काम-काज के छः दिन बन्द रहे, परन्तु सब्त और नए चांद के दिन खुला रहे।

2और प्रधान बाहर से फाटक के ओसारे के मार्ग से प्रवेश करके फाटक के खम्भे के पास खड़ा हो जाए, तब याजक उसकी होमबलि और मेलबलि तैयार करे और वह फाटक की देहली पर दण्डवत् करके बाहर चला जाए, परन्तु फाटक संध्या तक बन्द न किया जाए।

3देश के लोग भी सब्त और नए चांद के दिनों में फाटक की ड्योढ़ी पर यहोवा के सामने दण्डवत् करे।

4और सब्त के दिन प्रधान के लिए यहोवा के छः दोष-रहित मेमनों और एक दोष-रहित मेढ़े का होमबलि चढ़ाए,

5तथा मेढ़े के साथ एक एपा अन्नबलि और मेमनों के साथ अपनी योग्यता के अनुसार अन्नबलि तथा एपा पीछे हीन भर तेल चढ़ाए।

6और नए चांद के दिन वह एक दोष-रहित बछड़ा और छः मेमने तथा एक मेढ़ा भी चढ़ाए, ये सब दोष-रहित हो।

7और वह बछड़े के साथ एक एपा और मेढ़े के साथ एक एपा तथा मेमनों के साथ अपनी योग्यता के अनुसार अन्नबलि तथा एपा पीछे हीन भर तेल भी तैयार करे।

8जब प्रधान प्रवेश करे तो फाटक के ओसारे से होकर प्रवेश करे और उसी मार्ग से निकल जाए।

9परन्तु जब देश के लोग नियत पर्वों के समय यहोवा के सम्मुख आएं तो जो उत्तरी फाटक से उपासना करने के लिए प्रवेश करे वह दक्षिणी फाटक के मार्ग से बाहर निकले। कोई भी उस फाटक से जिससे उसने प्रवेश किया हो न लौटे; परन्तु सीधा बाहर निकल जाए।

10परन्तु जब वे भीतर जाएं तो प्रधान भी उनके साथ प्रवेश करे, और जब वे निकलें तो वह भी बाहर निकले।

11उत्सवों और नियत पर्वों पर अन्नबलि में प्रति बछड़ा एक एपा, प्रति मेढ़ा एक एपा, और मेमनों के साथ अपनी योग्यतानुसार एपा पीछे हीन भर तेल चढ़ाया जाए।

12प्रधान जब यहोवा के लिए स्वेच्छाबलि तैयार करे, चाहे होमबलि हो अथवा मेलबलि, तो उसके लिए पूर्व का फाटक खोल दिया जाए और वह होमबलि अथवा मेलबलि को वैसे ही तैयार करे जैसे सब्त के दिनों में करता है। तब वह बाहर निकले और उसके निकलने के पश्चात् फाटक बन्द कर दिया जाए।

13“और तू प्रतिदिन एक वर्ष का दोष-रहित एक मेमना यहोवा के लिए होमबलि के लिए तैयार करना। तू यह प्रति भोर को करना।

14और प्रति भोर को तू उसके साथ अन्नबलि भी तैयार करना अर्थात् एपा का छटवां भाग मैदा और उसके गूंधने के लिए हीन भर तेल का तीसरा भाग, यहोवा के लिए अन्नबलि के रूप में नित्य-विधि के अनुसार निरन्तर तैयार करना।

15इस प्रकार प्रति भोर को मेमना, अन्नबलि और तेल निरन्तर चढ़ाए जाने वाले होमबलि के लिए तैयार करे।

16“प्रभु यहोवा यों कहता हैः यदि प्रधान अपने भाग में से अपने किसी पुत्र को दान दे तो वह उसके पुत्रों का भाग होगा। यह उत्तराधिकार के द्वारा उनका निज भाग है।

17परन्तु यह वह अपने भाग में से अपनी किसी सेवक को दान दे तो वह स्वतंत्र होने के वर्ष तक ही उसका रहे। इसके पश्चात् वह फिर प्रधान का हो जाएगा। उसका निज भाग उसके पुत्रों का ही होगा।

18प्रधान लोगों की मीरास में से अन्धेर करके प्रजा के भाग में से कुछ न ले। वह अपने पुत्रों को अपनी निज भूमि में से भाग दे जिससे मेरी प्रजा में से कोई अपने निज भाग से वंचित न हो।”

19तब वह मुझे फाटक के बाजू के द्वार से याजकों की पवित्र कोठरियों में जो उत्तर की ओर थीं ले आया। वहां पश्चिम के बिल्कुल पीछे की ओर एक स्थान था।

20और उसने मुझसे कहा, “यही वह स्थान है जहां याजक दोषबलि, पापबलि और अन्नबलि को पकाएंगे जिससे वे उन्हें बाहरी आंगन में ले जाकर लोगों में पवित्रता न फैला दे।”

21तब उसने मुझे बाहरी आंगन में ले जाकर आंगन के चारों कोनों में घुमाया और देखो, आंगन के प्रत्येक कोने में एक-एक चौक बना था।

22आंगन के चारों कोनों में घिरे हुए चौक थे जो चालीस-चालीस हाथ लम्बे और तीस-तीस चौड़े थे। कोनों के ये चारों चौक एक ही नाप के थे।

23चारों चौक दीवार से घिरे थे और इन घेरने वाली दीवारों के नीचे चूल्हे बने थे।

24तब उसने मुझसे कहा, “ये वे चूल्हे हैं जहां भवन के सेवक, लोगों द्वारा चढ़ाए गए बलिदानों को उबालकर पकाएंगे।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)