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पुराना नियम · एज्रा · अध्याय 9 / 10

एज्रा 9

1जब ये सब कार्य पूरे हो चुके, तब प्रधान मेरे पास आकर यह कहने लगे, “इस्राएलियों, याजकों और लेवियों ने इन देशों की जातियों अर्थात् कनानियों, हित्तियों, परिज्जियों, यबूसियों, अम्मोनियों, मोआबियों, मिस्रियों और एमोरियों से तथा उनके घृणित कार्यों से अपने आपको अलग नहीं किया है।

2क्योंकि उन्होंने उनकी पुत्रियों में से कुछ को अपने तथा अपने पुत्रों के लिए ब्याह लिया है। जिससे पवित्र वंश देश-देश की जातियों में मिल गया है, वास्तव में, इस विश्वासघात में शासकों और अधिकारियों का हाथ सबसे आगे रहा है।”

3जब मैंने यह बात सुनी, तो मैंने अपने वस्त्र और अपने बागे को फाड़ा, और अपने सिर और दाढ़ी के बाल नोचे, तथा विस्मित होकर बैठ गया।

4तब प्रत्येक जन जो बन्धुवाई से लौटे हुओं के विश्वासघात के कारण इस्राएल के परमेश्वर के वचन से थरथराता था, मेरे पास एकत्र हुआ, और मैं संध्या के चढ़ावे के समय तक विस्मित बैठा रहा।

5परन्तु संध्या के चढ़ावे के समय मैं अपने फटे वस्त्र और बागे को पहने हुए अपनी दीन-हीन दशा से उठा, और घुटनों के बल गिरकर मैंने अपने परमेश्वर यहोवा की ओर हाथ फैलाए

6और कहा, “हे मेरे परमेश्वर, मुझे तेरी ओर अपना मुख उठाते लज्जा आती है, और हे मेरे परमेश्वर, मेरा मुंह काला है क्योंकि हमारे अधर्म बढ़कर हमारे सिर से ऊंचे हो गए हैं और हमारा दोष बढ़कर आकाश तक पहुंच गया है।

7अपने पूर्वजों के दिनों से आज तक हम बड़े ही दोषी रहे हैं; और अपने अधर्म के कारण हम, अपने राजाओं तथा याजकों सहित, अन्य देशों के राजाओं, तलवार, बन्धुवाई, लूट और लज्जा के शिकार हुए हैं, जैसा कि आज भी है।

8परन्तु अब थोड़े समय से हमारे परमेश्वर यहोवा ने हममें से कुछ को निकाल ले आकर और अपने पवित्रस्थान में टिकने का स्थान देकर हम पर अनुग्रह किया है। हमारे परमेश्वर ने हमारी आंखों को ज्योतिर्मय करके हमारे दासत्व में थोड़ी विश्रान्ति प्रदान की है।

9क्योंकि हम दास तो हैं, परन्तु हमारे दासत्व में भी हमारे परमेश्वर ने हमको नहीं छोड़ा है, वरन हमको फ़ारस के राजाओं का कृपा-पात्र बनाया। उसने हममें नवजीवन का संचार किया कि हम अपने परमेश्वर के भवन को बनाने और उसके खंडहरों का जीर्णोद्धार करने पाएं जिससे कि यहूदा और यरूशलेम में हमें आश्रय मिले।

10और अब, हे हमारे परमेश्वर, इसके बाद हम क्या कहें? क्योंकि हमने तेरी उन आज्ञाओं को त्याग दिया है,

11जो तूने अपने दासों अर्थात् नबियों के द्वारा दी। तूने कहा था, ‘जिस देश को तुम उत्तराधिकार में लेने के लिए जा रहे हो, वह देश, देश के लोगों की अशुद्धता के कारण तथा उनके घृणित कार्यों के कारण अशुद्ध देश है। उन्होंने उसे एक छोर से दूसरे छोर तक अपनी अशुद्धता से भर दिया है।

12अतः अब तुम न तो अपनी कन्याएं उनके पुत्रों को देना, और न उनकी कन्याएं अपने पुत्रों के लिए ले आना; और न तो कभी उनकी शान्ति एवं सम्पन्नता की खोज करना, जिससे कि तुम शक्तिशाली बनो और इस देश के उत्तम-उत्तम पदार्थ खाओ और इसे सदा के लिए अपने वंश के उत्तराधिकार के रूप में छोड़ जाओ।’

13अर्थात् फिर हमारे बुरे कार्यों तथा बड़े दोष के कारण हम पर यह सब बीता। इसके बाद हे हमारे परमेश्वर, जब कि तूने हमारे अधर्मों के बराबर हमें दण्ड नहीं दिया, और हममें से बहुतों को बचा रखा है,

14तो क्या हम तेरी आज्ञाओं का पुनः उल्लंघन करके इन घृणित कार्य करने वालों के संग विवाह सम्बन्ध स्थापित करें? क्या तू हम पर इतना क्रोधित न होगा कि हमें मिटा डाले और हममें से न तो कोई शेष रह जाए और न बच पाए?

15हे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा, तू धर्मी है, क्योंकि हम बचे हुए लोग ही रह गए हैं जैसा कि आज है। देख, हम तो दोषी होते हुए भी तेरे सम्मुख उपस्थित हैं, यघपि इस कारण कोई भी जन तेरे सम्मुख खड़ा नहीं रह सकता।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)