पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 28 / 66
यशायाह 28
1एप्रैम के शराबियों के घमंड के मुकुट पर हाय, और उसकी महिमामय सुन्दरता के मुर्झा जाने वाले फूल पर भी जो दाखमधु के मतवालों की अति उपजाऊ घाटी के ऊपरी भाग पर स्थित है।
2देखो, प्रभु का एक शक्तिशाली और सामर्थी दूत है, जो ओला-वृष्टि, विनाशकारी तूफान और भयंकर बाढ़ वाली आंधी के सदृश है। वह उसे अपने हाथ से भूमि पर पटक देगा।
3एप्रैम के शराबियों के घमंड का मुकुट पैरों तले रौंदा जाएगा।
4उसकी महिमामय सुन्दरता का मुर्झाने वाला वह फूल जो अति उपजाऊ घाटी के ऊपरी भाग पर स्थित है, उस पहले पकने वाले अंजीर के समान होगा जो ग्रीष्मकाल से पूर्व ही पक जाता हो और जिसे देखने वाला तुरन्त तोड़कर निगल जाए।
5उस दिन सेनाओं का यहोवा अपनी प्रजा के शेष लोगों के लिए सुन्दर ताज और महिमामय मुकुट ठहरेगा।
6उसके लिए जो न्याय करने बैठता है वह न्याय की आत्मा और उनके लिए जो आक्रमणकारियों को फाटक से खदेड़ देते हैं, बल ठहरेगा।
7कुछ और भी हैं जो मदिरा पीकर डगमगाते तथा तेज मदिरा से लड़खड़ाते हैं: वे याजक और नबी ही हैं जो तेज मदिरा से डगमगाते है। मदिरापान से उनकी मति भ्रष्ट हो गई है तथा वे तेज मदिरा के कारण लड़खड़ाते और दर्शन पाने पर भी डगमगाते तथा न्याय चुकाने में डावांडोल होते है।
8क्योंकि भोजन की सब मेजें वमन की गन्दगी से भरी पड़ी हैं कोई भी स्वच्छ स्थान नहीं बचा।
9“वह किसको ज्ञान सिखाएगा? और किसको अपने समाचार का अर्थ समझाएगा? क्या उनको जिनका दूध पीना अभी-अभी छूटा है? या जो स्तन से अभी-अभी अलग किए गए हैं?
10क्योंकि उनको, ‘आज्ञा पर आज्ञा; आज्ञा पर आज्ञा, नियम पर नियम, नियम पर नियम, थोड़ा यहां, थोड़ा वहां ही मिलेगा।’
11निश्चय ही वह इन लोगों से पराए होंठों से, हां, विदेशी भाषा में बोलेगा,
12जिसने उनसे यह कहा, “यहां विश्राम है, थके हुओं को विश्राम मिले,” और, “विश्राम-स्थल यहीं है,” परन्तु उन्होंने सुनना न चाहा।
13अतः उनके लिए यहोवा का वचन यह होगाः “आज्ञा पर आज्ञा, आज्ञा पर आज्ञा, नियम पर नियम, नियम पर नियम, थोड़ा यहां, थोड़ा वहां,” जिससे वे चलते समय ठोकर खाएं, घायल हो जाएं, और फन्दे में फंसकर बन्दी बनाए जाए।
14अतः हे निन्दको, जो यरूशलेम में रहने वाली इस प्रजा पर शासन करते हो, यहोवा का वचन सुनो।
15तुमने तो कहा, “हमने मृत्यु से वाचा बांधी है, तथा अधोलोक से समझौता किया है। जब महाविपत्ति बाढ़ के समान बढ़ आए तो वह हम तक न पहुंचेगी, क्योंकि हमने झूठ की शरण ली है और हम मिथ्या की आड़ में छिपे है।”
16इसलिए प्रभु यहोवा यों कहता है, “देखो, मैं सिय्योन में एक पत्थर, एक परखा हुआ पत्थर, हां, नींव के लिए एक बहुमूल्य कोने का पत्थर, दृढ़ता से रखने वाला हूं; जो कोई उस पर विश्वास करेगा वह न डगमगाएगा।
17मैं न्याय को नाप की डोरी और धार्मिकता को साहुल ठहराऊंगा; तब तुम्हारा झूठ का शरणस्थान ओलों से ढह जाएगा तथा तुम्हारा छिपने का स्थान जल में डूब जाएगा।
18तब जो वाचा तुमने मृत्यु के साथ बांधी है वह टूट जाएगी और अधोलोक से किया गया समझौता बना न रहेगा। जब महाविपत्ति बाढ़ के समान आ पड़ेगी तब तुम उसमें रौंदे जाओगे।
19जब-जब वह आ पड़े, वह तुम्हें घेर लेगी, क्योंकि वह प्रति भोर को, दिन या रात कभी भी आ पड़ेगी और इसकी चर्चा से ही तुम आतंकित हो जाओगे।”
20बिछौना तो पैर फैलाने के लिए छोटा और चादर ओढ़ने के लिए सकरी है।
21क्योंकि यहोवा ऐसे उठ खड़ा होगा जैसे कि पराजीम पर्वत पर खड़ा हुआ था, और जैसे उसने गिबोन की घाटी में अपना क्रोध दिखाया था वैसे ही अब वह फिर दिखाएगा, जिससे कि वह अपना काम, अपना अनोखा काम, और अपना कार्य, हां, अद्भुत कार्य करे।
22निन्दकों के समान कार्य न करो, नहीं तो तुम्हारे बन्धन और अधिक कसे जाएंगे, क्योंकि मैंने सेनाओं के प्रभु यहोवा से यह सुना है, कि समस्त पृथ्वी का सर्वनाश ठाना गया है।
23कान लगाकर मेरी वाणी सुनो, ध्यान देकर मेरे वचन सुनो।
24क्या किसान लगातार हल जोतता ही रहेगा कि बीज बोए? क्या वह निरन्तर भूमि को पलटता और उस पर पटरा चलाता रहता है?
25क्या वह उसकी सतह को चौरस बनाकर उसमें सोआ नहीं बोता और उस पर जीरा नहीं छितराता तथा रेघारियों में गेहूं और जौ को उनके स्थान में, और बाजरे को उसके स्थान में नहीं बोता?
26उसका परमेश्वर तो उसे ठीक-ठीक निर्देश देता और सिखाता है।
27सोआ की दांवनी पटरे से नहीं होती, न ही गाड़ी का पहिया जीरे पर चलाया जाता है, परन्तु सोआ छड़ी से तथा जीरा सोंटे से झाड़ा जाता है।
28रोटी के लिए अनाज की दांवनी की तो जाती है, परन्तु उसकी दांवनी निरन्तर नहीं की जाती, क्योंकि गाड़ी के पहिए और घोड़े उसे चूर-चूर करके नष्ट कर डालेंगे। अधिक समय तक उसकी दांवनी नहीं की जाती।
29यह भी सेनाओं के यहोवा की ओर से ठहराया गया है जो अद्भुत युक्ति करने वाला और अत्यन्त बुद्धिमान है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)