पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 3 / 52
यिर्मयाह 3
1परमेश्वर कहता है, “यदि कोई पति अपनी पत्नी को त्याग दे और पत्नी उसे छोड़कर किसी और की हो जाए, तो क्या वह उसके पास फिर जाएगा? क्या वह देश पूर्णतः दूषित न हो जाएगा? परन्तु तू तो वेश्या है और तेरे बहुत-से प्रेमी हैं, फिर भी तू मेरे पास लौट आती है,” यहोवा की यही वाणी है।
2“अपनी आंखें उठा कर नंगे टीलों को देखः कौन-सा स्थान है जहां तेरे साथ कुकर्म न किया गया? मार्गों में तू अपने प्रेमियों के लिए ऐसे बैठी रही जैसे अरबी मरफ़स्थल में, और तूने अपने व्यभिचार और दुष्टता से एक देश को अशुद्ध कर दिया है।
3इसलिए वर्षा रोक दी गई है और बसन्त ट्टतु की बौछार नहीं होने पाई तेरा माथा तो वेश्या का है, क्योंकि तू लज्जित होना जानती ही नही।
4क्या तूने अभी-अभी यह कहकर मुझे नहीं पुकारा, ‘हे मेरे पिता, तू मेरी जवानी का मित्र है-
5क्या वह सर्वदा क्रोधित रहेगा, क्या वह अन्त तक रफ़ष्ट रहेगा?’ देख, तू ऐसी बातें तो कह चुकी, परन्तु जहां तक तुझसे बना, तूने बुरे काम किए।
6तब योशिय्याह राजा के दिनों में यहोवा ने मुझसे कहा, “क्या तूने देखा, विश्वासघातिनी इस्राएल ने क्या किया? उसने प्रत्येक ऊंचे टीले पर और प्रत्येक हरे पेड़ के नीचे जाकर व्यभिचार किया।
7मैंने तो सोचा, ‘इन सब कार्यों को करने के पश्चात् वह मेरे पास लौट आएगी,’ परन्तु वह न लौटी और उसकी धोखेबाज बहन यहूदा ने इसे देखा।
8और मैंने देखा कि विश्वासघातिनी इस्राएल के समस्त व्यभिचार के कारण मैंने त्यागपत्र देकर उसे छोड़ दिया, फिर भी उसकी धोखेबाज बहन यहूदा न डरी वरन् जाकर वह भी स्वयं व्यभिचारिणी बन गई।
9और ऐसा हुआ कि उसने अपनी वेश्यावृति को इतना हल्का जाना कि देश को अशुद्ध कर दिया और उसने काठ और पत्थरों के साथ भी व्यभिचार किया।
10इतना सब होने पर भी उसकी विश्वासघातिनी बहन यहूदा सम्पूर्ण मन से नहीं, परन्तु कपट से ही मेरी ओर फिरी,” यहोवा की यही वाणी है।
11और यहोवा ने मुझसे कहा, “विश्वासघातिनी इस्राएल ने अपने आपको धोखेबाज यहूदा से अधिक धर्मी प्रमाणित किया है।
12उत्तर दिशा की ओर जाकर इन शब्दों का प्रचार कर और कह, ‘हे विश्वासघातिनी इस्राएल, लौट आ।’ यहोवा की वाणी है, ‘मैं तुझ पर क्रोध की दृष्टि नहीं करूंगा, क्योंकि मैं अनुग्रहकारी हू। यहोवा की वाणी है, ‘मैं तुझ पर सदा सर्वदा क्रोधित नहीं रहूंगा।
13केवल अपने अधर्म को मान ले कि तूने अपने परमेश्वर यहोवा के विरफ़द्ध अपराध किया और प्रत्येक हरे पेड़ के तले तूने परायों से प्रेमाचार किया, परन्तु तूने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया,’ यहोवा की यही वाणी है।
14‘हे विश्वासहीन लड़को, लौट आओ,’ यहोवा की वाणी है, ‘क्योंकि मैं तुम्हारा स्वामी हूं, मैं तुम्हें नगर में से एक-एक और परिवार में से दो-दो को लेकर सिय्योन में पहुंचा दूंगा,
15तब मैं तुम्हें अपने मन के अनुकूल ऐसे चरवाहे दूंगा जो तुम्हें ज्ञान और समझ रूपी भोजन खिलाएंगे।’
16यहोवा की वाणी है, ‘उन दिनों जब तुम देश में फूलो-फलोगे और बढ़ जाओगे, तब लोग फिर न कहेंगे, “यहोवा की वाचा का सन्दूक” और वह मन में भी नहीं आएगा, न वे उसे स्मरण करेंगे; न उसका अभाव अनुभव करेंगे और न वह फिर से बनाया जाएगा।
17उस समय वे यरूशलेम को “यहोवा का सिंहासन” कहेंगे, और सब जातियां यहोवा के नाम में यरूशलेम में इकट्ठी की जाएंगी और वे फिर कभी अपने बुरे मन की ढिठाई के अनुसार नहीं चलेंगे।
18उन दिनों यहूदा का घराना इस्राएल के घराने के साथ चलेगा और वे दोनों मिल कर उत्तर के देश से इस देश में आएंगे जिसे मैंने तुम्हारे पूर्वजों को मीरास में दिया था।
19‘तब मैंने कहा, “मैं तुझे अपने लड़कों के मध्य ऐसे स्थिर करता और एक मनभावन देश देता जो सब जातियों में अत्यन्त ही सुन्दर मीरास है!” और मैंने सोचा कि तू मुझे, “मेरे पिता” कहेगी और मेरे पीछे चलने से न कतराएगी।
20निश्चय, जिस प्रकार एक स्री अपने प्रेमी को धोखा देकर चली जाती है उसी प्रकार, हे इस्राएल के घराने, तूने मेरे साथ धोखे का व्यवहार किया,’ यहोवा की यही वाणी है।
21नंगे टीलों से इस्राएल के पुत्रों के रोने और गिड़गिड़ाने की आवाज सुनाई देती है, क्योंकि वे पथ-भ्रष्ट हो गए हैं, उन्होंने अपने परमेश्वर यहोवा को भुला दिया है।
22“हे विश्वासहीन पुत्रे, लौट आओ, मैं तुम्हारी विश्वासहीनता को चंगा करूंगा।” “देख, हम तेरे पास आए हैं, क्योंकि तू हमारा परमेश्वर यहोवा है।
23निश्चय, पहाड़ियां छल हैं, पर्वतों पर का कोलाहल व्यर्थ है। निश्चय ही, इस्राएल का उद्धार हमारे परमेश्वर यहोवा में ही है।
24परन्तु हमारी जवानी के दिनों से ही उस लज्जाजनक वस्तु ने हमारे पूर्वजों की कमाई अर्थात् उनके भेड़-बकरियों, गाय-बैलों, और उनके बेटे और बेटियों को निगल डाला है।
25हम अपनी लज्जा में लेट जाएं, हमारा अपमान हमें ढांप ले, अपने परमेश्वर यहोवा के विरफ़द्ध हमने और हमारे पूर्वजों ने, अपनी जवानी से लेकर आज तक पाप किया है और हमने अपने यहोवा परमेश्वर की बात को नहीं माना है।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)