पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 36 / 52
यिर्मयाह 36
1फिर ऐसा हुआ कि योशिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के चौथे वर्ष में यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास यह वचन पहुंचा,
2एक पुस्तक लेकर उस पर उन सब वचनों को, अर्थात् जिन बातों को मैंने तुझसे इस्राएल, यहूदा और सब जातियों के सम्बन्ध में जिस दिन मैंने पहले-पहल तुझसे बातें कीं योशिय्याह के दिनों से लेकर वरन् आज के दिन तक कहीं, उन सब बातों को लिख ले,
3“कदाचित यहूदा का घराना उन सब विपत्तियों के विषय में सुनकर जो मैंने उन पर डालने का विचार किया है कि प्रत्येक मनुष्य अपनी बुरी चाल से फिरे और तब मैं उनके अधर्म और उनके पाप को क्षमा करूंगा।”
4तब यिर्मयाह ने नेरियाह के पुत्र बारूक को बुलाया, और बारूक ने यहोवा के उन सब वचनों को यिर्मयाह के मुख से सुनकर एक पुस्तक में लिख दिया।
5तब यिर्मयाह ने बारूक को आज्ञा दी और कहा, “मैं तो बन्दी हूं, मैं यहोवा के भवन में नहीं जा सकता।
6अतः तू उपवास के दिन यहोवा के भवन में जाकर यहोवा के जो वचन तूने मेरे मुंह से सुनकर लिखे हैं उन्हें उस पुस्तक में से पढ़कर सब लोगों को सुना दे और यहूदा के उन सब लोगों को भी जो अपने-अपने नगरों से आएंगे; पढ़कर सुना दे।
7कदाचित वे यहोवा से गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करें और अपनी बुरी चाल से फिरें क्योंकि जो क्रोध और जलजलाहट यहोवा ने अपनी इस प्रजा पर भड़काने को कहा है, वह भयंकर है।”
8और नेरियाह के पुत्र बारूक ने यिर्मयाह नबी की आज्ञा के अनुसार, यहोवा के भवन में जाकर उस पुस्तक में से यहोवा का वचन पढ़कर सुनाया।
9फिर ऐसा हुआ कि योशिय्याह के पुत्र, यहूदा के राजा, यहोयाकीम के राज्य के पांचवें वर्ष के नवें महीने में, यरूशलेम के सब लोगों ने और उन सब लोगों ने जो यहूदा के नगरों से यरूशलेम आए थे यहोवा के सम्मुख उपवास रखने का प्रचार किया।
10तब बारूक ने यहोवा के भवन में जाकर शापान शास्री के पुत्र गमर्याह के कक्ष में जो यहोवा के भवन के नए फाटक के समीप ऊपरी आंगन पर था, सब लोगों को यिर्मयाह के वचन उस पुस्तक में से पढ़कर सुनाए।
11जब शापान के पुत्र गमर्याह के पुत्र मीकायाह ने उस पुस्तक में से यहोवा के सब वचन सुने,
12तो वह राजभवन में प्रवेश करके शाÐी के कक्ष में चला गया। और देखो, सब अधिकारी वहीं बैठे हुए थे अर्थात् एलीशामा शाÐी, शमायाह का पुत्र दलायाह, अकबोर का पुत्र एलनातान, शापान का पुत्र गमर्याह और हनन्याह का पुत्र सिदकिय्याह आदि सब अधिकारी।
13तब मीकायाह ने उन सब वचनों को जो उसने लोगों के सम्मुख बारूक के द्वारा पढ़ी गई पुस्तक में से सुना था, उन सबका वर्णन किया।
14तब सब अधिकारियों ने यहूदी को, जो नतन्याह का पुत्र, शेलेम्याह का पोता और कूशी का परपोता था बारूक के पास, यह कहने को भेजा कि उस पुस्तक को जिसमें से तूने लोगों को पढ़कर सुनाया है अपने हाथ में लेता आ। अतः नेरिय्याह का पुत्र बारूक उस पुस्तक को हाथ में लेकर उनके पास पहुंचा।
15तब उन्होंने उससे कहा, “आ, बैठ जा और हमें इसे पढ़कर सुना।”े तब बारूक ने उन्हें पढ़कर सुना दिया।
16तब ऐसा हुआ कि जब उन्होंने वे सब वचन सुने तो वे भयभीत होकर एक-दूसरे को देखने लगे और उन्होंने बारूक से कहा, “हम निश्चय ही, राजा से इन सब बातों का वर्णन करेंगे।”
17तब उन्होंने बारूक से पूछा, “हमें बता दे कि तूने ये सब वचन कैसे लिखे? क्या तूने उसके मुख से सुनते हुए लिखा था?”
18तब बारूक ने उनसे कहा, “वह ये सब वचन अपने मुंह से मुझे सुनाता गया और मैं इन्हें इस पुस्तक में स्याही से लिखता गया।”
19तब उन अधिकारियों ने बारूक से कहा, तुम और यिर्मयाह जाकर कहीं छिप जाओं, कि किसी को यह पता न चले कि तुम कहां हो।”
20अतः वे आंगन में राजा के पास गए परन्तु उन्होंने पुस्तक को एलीशामा शास्त्री के कक्ष में ही छोड़ दिया था और उन्होंने राजा को वे सब वचन कह सुनाए।
21तब राजा ने पुस्तक को लाने के लिए यहूदी को भेजा और वह उसे एलीशामा शाÐी के कक्ष में से ले आया। तब यहूदी ने उसे राजा को तथा उन सब अधिकारियों को जो राजा के आसपास खड़े थे पढ़कर सुनाया।
22यह नौवां महीना था और राजा शीतकाल के भवन में बैठा हुआ था और उसके सामने अंगीठी जल रही थी।
23और ऐसा हुआ कि जब यहूदी तीन-चार पृष्ठ पढ़ चुका तो राजा उसे शाÐी के चाकू से काटकर अंगीठी की आग में तब तक झोंकता रहा जब तक समस्त पुस्तक अंगीठी की आग में जलकर भस्म न हो गई।
24फिर भी राजा और उसके सब कर्मचारी जिन्होंने ये सब वचन सुने थे न तो भयभीत हुए और न उन्होंने अपने कपड़े फाड़े।
25यघपि एलनातान, दलायाह और गमर्याह ने राजा से अनुनय-विनय की कि उस पुस्तक को न जलाए पर उसने उनकी एक न सुनी।
26तब राजा ने राजपुत्र यरहमेल, अज्रीएल के पुत्र सरायाह, और अब्देल के पुत्र शेलेम्याह को आज्ञा दी कि बारूक शाÐी और यिर्मयाह नबी को पकड़ लाएं, परन्तु यहोवा ने उन्हें छिपाए रखा।
27उस पुस्तक और उन वचनों को जिन्हें बारूक ने यिर्मयाह के मुंह से सुनकर लिखा था राजा द्वारा जला दिए जाने के पश्चात् यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा,
28“फिर से एक और पुस्तक लेकर उसमें उन सब वचनों को लिख ले जो उस पहली पुस्तक में लिखे हुए थे जिसे यहूदा के राजा यहोयाकीम ने जला दिया।
29और यहूदा के राजा यहोयाकीम के विषय में तू यह कह कि यहोवा यों कहता हैः “तूने यह कहकर उस पुस्तक को जला दिया कि तूने इस में यह क्यों लिखा कि बेबीलोन का राजा निश्चय आकर इस देश को नष्ट कर देगा और मनुष्य तथा पशुओं को इसमें से मिटा डालेगा?”
30इसलिए यहोवा यहूदा के राजा यहोयाकीम के विषय में यों कहता है, “दाऊद के सिंहासन पर विराजमान होने के लिए उसका कोई भी न रह जाएगा और उसका शव फेंक दिया जाएगा कि दिन को तो तपन में और रात को पाले में पड़ा रहे।
31मैं उसको, उसके वंशजों और उसके कर्मचारियों को उनके अधर्म का दण्ड भी दूंगा और मैं उन पर साथ ही यरूशलेम के निवासियों पर और यहूदा के लोगों पर उन सब विपत्तियों को डालूंगा जिनकी चर्चा मैं कर चुका हूं-परन्तु उन्होंने एक न सुनी”।’”
32तब यिर्मयाह ने दूसरी पुस्तक लेकर नेरिय्याह के पुत्र बारूक शाÐी को दिया और उसने उस पर उस पुस्तक के उन सब वचनों को यिर्मयाह के मुंह से सुन-सुनकर लिख डाला, जिसे यहूदा के राजा यहोयाकीम ने फाड़कर आग में जला डाला था। उन वचनों में उनके ही समान और भी वचन जोड़ दिए गए थे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)