पुराना नियम · अय्यूब · अध्याय 12 / 42
अय्यूब 12
1तब अय्यूब ने उत्तर दिया,
2“निःसन्देह तुम ही ऐसे लोग हो, जिनके मरने पर बुद्धि भी जाती रहेगी
3परन्तु मुझमें वैसी ही समझ है जैसी तुममें, मैं तुमसे कम नहीं, कौन है जो ऐसी बातें नही जानता?
4“मैं अपने मित्रों के लिए उपहास का पात्र बन गया हूं, हां, मैं जो परमेश्वर को पुकार कर उत्तर पाता था, हां, धर्मी तथा निर्दोष जन, हंसी का पात्र बन गया है,
5सुखी मनुष्य दुखी को तुच्छ जानता है, मानो विपत्ति उनके लिए तैयार की गई हो जिनके पांव फिसलते है।
6डाकुओं के डेरे फूलते-फलते है। जो परमेश्वर को क्रोध दिलाते हैं अर्थात् उसे अपनी मुट्ठी में रखना चाहते हैं वे सुख से रहते है।
7“परन्तु अब पशुओं से पूछ, वे तुझे सिखाएं; आकाश के पक्षियों से, वे तुझे बताएं;
8पृथ्वी से बात कर, वह तुझे शिक्षा दे; समुद्र की मछलियां तुझे समझाए।
9इन सभों में से कौन नहीं जानता कि यह सब यहोवा ही के हाथ से हुआ है?
10उसके हाथ में प्रत्येक जीवधारी का प्राण, और समस्त मानव-जाति का श्वास है।
11क्या कान शब्दों को नहीं परखता, जैसे जीभ से भोजन चखा जाता है?
12क्या वैसे ही कान से वचन नहीं परखे जाते? बुद्धि तो वृद्धों में और समझ लम्बी आयु वालों में पाई जाती है।
13“परमेश्वर में बुद्धि और बल है, सम्मति और समझ उसी में है।
14जिसे वह ढा दे उसे पुनः बनाया नहीं जा सकता; जिसे वह बन्दी बना ले, उसके लिए कोई छुटकारा नही।
15देखो, वह वर्षा को रोक देता है, तो जल सूख जाता है; जब वह उसे भेज देता है तो पृथ्वी जलमग्न हो जाती है।
16उसमें सामर्थ्य और खरी बुद्धि है, धोखा खाने वाला और धोखा देने वाला दोनों उसी के है।
17वह मंत्रियों को लज्जित करता है और न्यायियों को मूर्ख बनाता है।
18वह राजाओं के अधिकार तोड़ डालता, और उनकी कमर को बन्धन से जकड़ता है।
19वह याजकों को लज्जित करता, और सुखी लोगों का पतन करता है।
20“वह सलाहकारों की सलाह तथा प्राचीनों की समझ छीन लेता है।
21वह अधिकारियों पर अपमान लादता, तथा शक्तिशाली को निरस्त्र कर देता है,
22वह अन्धकार के भेदों को प्रकट कर देता है और गहन अन्धकार को प्रकाश में लाता है।
23वह जातियों को महान् करता, फिर उनको नष्ट कर देता है; वह जातियों का विस्तार करता, फिर उनको बन्धुवाई में ले जाता है।
24वह पृथ्वी के प्रधानों की बुद्धि छीन लेता, और उन्हें ऐसे निर्जन स्थानों में भटका देता है जहां रास्ता नहीं मिलता।
25वे प्रकाश के बिना अन्धकार में टटोलते फिरते हैं वह उन्हें ऐसा बना देता है कि वे मतवाले के समान डगमगाते चलते है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)