Loading account

पुराना नियम · अय्यूब · अध्याय 2 / 42

अय्यूब 2

1फिर एक और दिन यहोवा परमेश्वर के पुत्र उसके सामने उपस्थित हुए, और शैतान भी उनके साथ यहोवा के सामने उपस्थित हुआ।

2तब यहोवा ने शैतान से पूछा, “तू कहां से आया है?” शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया,” “पृथ्वी पर इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हू।”

3यहोवा ने शैतान से पूछा, “क्या तूने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है? क्योंकि पृथ्वी पर उसके समान निर्दोष और खरा तथा परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने वाला अन्य कोई नही। यघपि तूने उसे अकारण नष्ट करने के लिए मुझे उसके विरुद्ध उभारा, फिर भी वह अब तक अपनी खराई में स्थिर है।”

4शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, “खाल के बदले खाल। वरन् प्राण के बदले मनुष्य अपना सब कुछ दे देता है।

5अब तू केवल अपना हाथ बढ़ाकर उसकी हडिóयों तथा उसके मांस को छू तब वह तेरे मुंह पर तेरी निन्दा करेगा।”

6अतः यहोवा ने शैतान से कहा, “सुन, वह तेरे हाथ में है, केवल उसका प्राण छोड़ देना।”

7तब यहोवा के सामने से शैतान चला गया। और उसने अय्यूब को उसके पांव के तलवे से लेकर सिर की चोटी तक भयंकर पफ़ोड़ों से पीड़ित किया।

8तब खुजलाने के लिए अय्यूब एक ठीकरा लेकर राख पर बैठ गया।

9तब उसकी पत्नी ने उससे कहा, “क्या तू अभी भी अपनी खराई पर स्थिर है? परमेश्वर की निन्दा कर और मर जा।”

10परन्तु उसने उससे कहा, “तू मूर्ख स्त्री के समान बातें करती है। क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दुख न लें?” इन सब बातों में अय्यूब ने अपने होठों से कोई पाप नहीं किया।

11जब तेमानी एलीपज, शूही बिलदद और नामाती सोपर नामक अय्यूब के तीन मित्रों ने उन सब विपत्तियों का समाचार सुना जो उस पर पड़ी थीं, तब वे अपने-अपने स्थान से चले। उन्होंने परस्पर निश्चय किया कि हम जाकर उसके साथ सहानुभूति दर्शाएं और उसको शान्ति दे।

12जब उन्होंने दूर ही से अपनी आंखें उठाकर देखा और उसे न पहचान सके, तब वे चिल्ला-चिल्ला कर रोने लगे। प्रत्येक ने अपने वस्त्र फाड़े, और आकाश की ओर धूल उड़ाकर अपने सिर पर डाली।

13तब वे सात दिन और सात रात उसके साथ भूमि पर बैठे रहे, परन्तु यह देखकर कि उसकी पीड़ा अत्यधिक है किसी ने उससे एक भी बात न कही।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)