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पुराना नियम · यहोशू · अध्याय 14 / 24

यहोशू 14

1कनान देश में इस्राएलियों की मीरास के भाग ये है। उनकी मीरास का बँटवारा एलीआजार याजक, नून के पुत्र यहोशू तथा इस्राएलियों के गोत्रों के कुलों के मुखियों ने किया।

2जो आज्ञा परमेश्वर ने मूसा को दी थी उसी के अनुसार यह बँटवारा साढ़े नौ गोत्रों में चिट्ठी डाल कर किया गया।

3मूसा ने तो यरदन के उस पार ढाई गोत्रों को मीरास दी थी। परन्तु उसने उनके बीच लेवियों को कोई भाग नहीं दिया था।

4यूसुफ के वंश के दो गोत्र हो गए थे, अर्थात् मनश्शे और एप्रैम। उन्होंने लेवियों को उस देश में भाग तो नहीं दिया, परन्तु रहने के लिए नगर तथा उनके पशु-धन के लिए चरागाह दिए।

5इस प्रकार इस्राएलियों ने ठीक वैसा ही किया जैसा यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थीः उन्होंने देश को बाँट लिया।

6तब यहूदा-वंशी गिलगाल में यहोशू के पास आए। और कनजी यपुन्ने के पुत्र कालेब ने उससे कहा, “तू तो उस वचन को जानता है जो यहोवा ने परमेश्वर के जन मूसा से कादेश-बर्ने में मेरे और तेरे सम्बन्ध में कहा था।

7जब यहोवा के दास मूसा ने मुझे कादेश-बर्ने से इस देश का भेद लेने के लिए भेजा था तब मैं चालीस वर्ष का था, और मैं सच्चे मन से उसके पास सन्देश लाया था।

8जो भाई मेरे संग गए थे उन्होंने तो प्रजा के लोगों के मन में भय समा दिया था, परन्तु मैंने पूरी रीति से अपने परमेश्वर यहोवा की बात मानी।

9अतः मूसा ने उस दिन शपथ खाकर कहा था, इसलिए कि तूने पूरी रीति से मेरे परमेश्वर यहोवा की बात मानी, जिस भूमि पर तू अपने पैर धर चुका है वह निश्चय ही सदा के लिए तेरी और तरेे वंश की निज भूमि हो जाएगी।’

10और अब देख, यह बात यहोवा ने मूसा से उस समय कही थी जब इस्राएली जंगल में मारे-मारे घूम रहे थे। उस समय से लेकर इन पैंतालीस वर्षों तक उसने अपने वचन के अनुसार मुझे जीवित रखा है, और देख, आज मैं पचासी वर्ष का हो गया हू।

11मुझमें आज भी उतना ही बल है जितना उस दिन था जब मूसा ने मुझे भेजा था। युद्ध करने तथा भीतर-बाहर आने-जाने के लिए जितना सामर्थ्य उस समय मुझमें था उतना आज भी है।

12इसलिए अब वह पहाड़ी क्षेत्र मुझे दे जिसके विषय में यहोवा ने उस दिन कहा था। तूने तो उस दिन सुना था कि अनाक-वंशी वहां बड़े-बड़े गढ़वाले नगरों में रहते है। सम्भव है कि यहोवा मेरे साथ रहे और यहोवा के वचन के अनुसार मैं उनको निकाल भगाऊ।”

13तब यहोशू ने यपुन्ने के पुत्र कालेब को आशीष दी और हेब्रोन को उसका निज भाग ठहरा दिया।

14इसलिए हेब्रोन आज तक कनजी यपुन्ने के पुत्र कालेब का भाग बना हुआ है क्योंकि वह पूरी रीति से इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की बात माना करता था।

15हेब्रोन का नाम पहले किय्रत-अर्बा था; क्योंकि अर्बा अनाकियों में सबसे बड़ा पुरुष था। इसके बाद देश को शान्ति मिली।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)