पुराना नियम · यहोशू · अध्याय 18 / 24
यहोशू 18
1इसके बाद इस्राएलियों की सम्पूर्ण मंडली शीलो में एकत्रित हुई और वहां मिलापवाला तम्बू खड़ा किया। और देश पर उनका अधिकार हो चुका था।
2इस्राएलियों में से सात गोत्र शेष रह गये थे। जिन्होंने अपना भाग नहीं बांटा था।
3इसलिए यहोशू ने इस्राएलियों से कहा, “तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने जो देश तुम्हें दे दिया है उसमें प्रवेश करके उस पर अधिकार करने में कब तक विलम्ब करते रहोगे?
4प्रत्येक गोत्र में से तीन व्यक्ति चुनो जिनको मैं भेजूं कि वे देश के हर भाग में जा-जा कर देखें और अपने भाग के अनुसार वर्णन लिखें तब मेरे पास लौट आए।
5वे उसको सात भागों में बाँटे। यहूदा के लोग दक्षिण की ओर अपने भाग में रहें और यूसुफ के घराने के लोग उत्तर की ओर अपने भाग में रहे।
6देश का विवरण तुम सात भागों में लिख कर मेरे पास लाओ तब मैं यहां तुम्हारे लिए यहोवा के सामने जो हमारा परमेश्वर है, चिट्ठियां डालूंगा।
7लेवियों का तुम्हारे बीच कोई भाग न होगा, क्योंकि यहोवा के लिए उनकी याजकीय सेवा ही उनका भाग है। गाद, रूबेन और मनश्शे के आधे गोत्र ने भी यरदन के पूर्व की ओर अपना-अपना भाग प्राप्त किया जिसे यहोवा के दास मूसा ने उन्हें दिया था।”
8तब वे पुरुष उठकर चल दिए और वे जो देश का विवरण लिखने जा रहे थे यहोशू ने उन्हें आज्ञा दी, देश के एक छोर से दूसरे छोर तक जा-जाकर उसका विवरण लिखो; फिर मेरे पास लौट आओ। तब मैं यहां शीलो में यहोवा के सामने तुम्हारे लिए चिट्ठियां डालूंगा।”
9तब उन पुरुषों ने देश के एक छोर से दूसरे छोर तक चल कर और उसके सात भाग मान कर नगरों के अनुसार उसका विवरण एक पुस्तक में लिखा। फिर वे शीलो की छावनी में यहोशू के पास आए।
10तब यहोशू ने शीलो में यहोवा के सामने उनके लिए चिट्ठियां डालीं, और यहोशू ने वहां इस्राएलियों को उनके भागों के अनुसार देश बाँट दिया।
11बिन्यामीनियों के गोत्र की चिट्ठी उनके कुलों के अनुसार निकली, और चिट्ठी के अनुसार उनका भाग यहूदा-वंशियों तथा यूसुफ-वंशियों के भागों के बीच पड़ा।
12उनकी सीमा उत्तर दिशा में यरदन से आरम्भ हुई। फिर वह यरीहो के उत्तर की ओर चढ़ती हुई पश्चिम की ओर पहाड़ी प्रदेश से होकर बेत-आवेन के जंगल तक गई।
13वहां से सीमा लूज की दक्षिणी ओर अर्थात् बेत-एल पहुंची, फिर उस पहाड़ी के पास अत्रेत-अद्दार पर उतरी जो निचले बेत-होरोन के दक्षिण में है।
14सीमा वहां से आगे बढ़कर पश्चिम की ओर से उस पहाड़ी की दक्षिणी ओर मुड़ी जो बेत-होरोन के सामने दक्षिण में है। फिर वह किर्यत-बाल, अर्थात् किर्यत-यारीम नामक यहूदा-वंशियों के नगर में समाप्त हो गई। पश्चिमी सीमा यही थी।
15दक्षिणी सीमा किर्यत-यारीम के पश्चिमी किनारे से आरम्भ हुई। वह पूर्व की ओर आगे बढ़कर नेप्तोह के सोते तक पहुंची।
16फिर वह उतरकर उस पहाड़ी के किनारे तक पहुंची जो बेन-हिन्नोम की तराई में है जो रपाईम की घाटी के उत्तर की ओर है। वहां से वह हिन्नोम की तराई में उतरकर यबूसियों के नगर के दक्षिणी उतार से होकर एन-रोगेल सोते तक उतर गई।
17फिर वह उत्तर की ओर बढ़कर एन-शेमेश और गलीलोत पहुंची जो अदुम्मीन की चढ़ाई के सामने है। फिर वह रूबेन-वंशी बोहन के पत्थर तक पहुंंची।
18वहां से वह अराबा के सामने के पहाड़ों के उत्तर की ओर से होकर आगे बढ़ी, फिर अराबा तक उतरी।
19फिर सीमा बेत-होग्ला के उत्तरी ढलान से होकर आगे बढ़ी और लवण सागर के उत्तरी खाड़ी पर अर्थात् यरदन के दक्षिणी सिरे पर समाप्त हो गई। दक्षिणी सीमा यही थी।
20पूर्व की ओर यरदन नदी उसकी सीमा थी। बिन्यामीन के कुलों के अनुसार तथा चारों ओर उसकी सीमा के अनुसार उनका भाग यही था।
21बिन्यामीन गोत्र के नगर उनके कुलों के अनुसार ये थेः यरीहो, बेत-होग्ला और एमेक-कसीस,
22बेत-अराबा, समारैम, बेत-एल,
23अव्वीम, पारा, ओप्रा,
24कपर-अम्मोनी, ओप्नी, गेवा; कुल बारह नगर और उनके सब गांव।
25गिबोन, रामा, बेरोत,
26मिस्पे, कपीरा, मोसा,
27रेकेम, यिर्पेल, तरला,
28सेला, एलेप, यबूस अर्थात् यरूशलेम, गिबत और किर्यत; चौदह नगर और उनके सब गांव। बिन्यामीन का भाग उनके कुलों के अनुसार यही था।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)