पुराना नियम · यहोशू · अध्याय 5 / 24
यहोशू 5
1जब एमोरियों के राजाओं ने जो यरदन के उस पार पश्चिम की ओर रहते थे और कनानियों के सब राजाओं ने जो समुद्र के पास रहते थे सुना कि यहोवा ने इस्राएलियों के सामने उनके पार होने तक यरदन के जल को कैसे सुखा दिया था, तब ऐसा हुआ कि उनका मन घबरा गया और इस्राएलियों के कारण उनके जी में जी न रहा।
2उस समय यहोवा ने यहोशू से कहा, “तू चकमक पत्थर के चाकू बना और इस्राएलियों का दूसरी बार ख़तना कर।”
3अतएव, यहोशू ने चकमक के चाकू बना लिए और गिवआत-हाअरालोत पर इस्राएलियों का ख़तना कराया।
4उसने उनका ख़तना इसलिए किया कि जितने इस्राएली पुरुष मिस्र से निकले थे उनमें से युद्ध करने वाले योद्धा मिस्र से निकलने के बाद जंगल के मार्ग में मर गए।
5क्योंकि जितने पुरुष मिस्र से निकले थे उनका तो ख़तना किया गया था, परन्तु मिस्र से निकलने के पश्चात् जंगल के मार्ग में जितने पुरुष उत्पन्न हुए उनका ख़तना नहीं किया गया था।
6क्योंकि इस्राएली चालीस वर्षों तक जंगल में उस समय तक चलते रहे जब तक सारी जाति, अर्थात् मिस्र से निकलकर आने वाले सारे योद्धा नष्ट न हो गए, क्योंकि उन्होंने यहोवा की वाणी अनसुनी कर दी थी और उनके लिए यहोवा ने शपथ खाई थी कि मैं तुमको वह देश नहीं देखने दूंगा जिसमें दूध और मधु की धाराएं बहती हैं तथा जिसे देने की प्रतिज्ञा मैंने तेरे पूर्वजों से की थी।
7यहोशू ने उनकी सन्तान का ख़तना किया जिनको यहोवा ने उनके स्थान में खड़ा किया था। उनका ख़तना किया गया क्योंकि उनके पूर्वजों ने मार्ग में उनका ख़तना नहीं किया था।
8जब सारी इस्राएली जाति में ख़तने का कार्य समाप्त हो चुका तब सब ख़तने वाले चंगे होने तक अपने-अपने शिविर में पड़े रहे।
9तब यहोवा ने यहोशू से कहा, “आज मैंने मिस्र में हुए तुम्हारे अपमान को दूर कर दिया है।” इसलिए उस स्थान का नाम आज तक गिलगाल पड़ा है।
10जिन दिनों इस्राएली गिलगाल में पड़ाव डाले पड़े थे, उन्होंने यरीहो के अराबा में चौदहवें दिन की संध्या को फसह का पर्व मनाया।
11फिर फसह के दूसरे दिन अर्थात् उसी दिन उन्होंने देश की उपज में से अख़मीरी रोटियां तथा भुना हुआ अनाज खाया।
12उस देश की उपज में से खाने के पश्चात् उसी दिन से मन्ना गिरना बन्द हो गया और इस्राएलियाें को उसके बाद मन्ना नहीं मिला, परन्तु उसके बदले उस वर्ष उन्होंने कनान देश की उपज में से खाया।
13अब ऐसा हुआ कि जब यहोशू यरीहो के समीप था, तो उसने आंखें उठाकर देखा, और देखो, एक पुरुष अपने हाथ में नंगी तलवार लिए उसके सामने खड़ा था, और यहोशू ने उसके पास जाकर पूछा, “क्या तू हमारी ओर है या हमारे विरोधियाें की ओर?”
14उसने कहा, “नहीं, वरन् मैं तो यहोवा की सेना के सेनाध्यक्ष के रूप में आता हू।” जब यहोशू ने मुंह के बल भूमि पर गिरकर दण्डवत् किया और उससे कहा, “अपने दास के लिए मेरे प्रभु की क्या आज्ञा है?”
15तब यहोवा की सेना के सेनाध्यक्ष ने यहोशू से कहा, “अपने पैरों से जूतियां उतार ले क्योंकि जिस स्थान पर तू खड़ा है वह पवित्र है।” तब यहोशू ने ऐसा ही किया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)