पुराना नियम · यहोशू · अध्याय 9 / 24
यहोशू 9
1जब यरदन के उस पार पहाड़ी देश तराई में और लेबनोन के सामने भूमध्य सागर के तट पर निवास करने वाले हित्ती, एमोरी, कनानी, परिज्जी, तथा हिव्वी और यबूसी राजाओं ने इसके विषय में सुना।
2तब वे एक मन होकर यहोशू और इस्राएल से युद्ध करने के लिए एकत्रित हुए।
3जब गिबोन के निवासियों ने सुना कि यहोशू ने यरीहो और ऐ के साथ क्या-क्या किया है,
4तब वे छल करके राजदूतों के रूप में निकल पड़े। उन्होनें अपने गदहों पर फटे-पुराने बोरे तथा मदिरा के फटे-पुराने और मरम्मत किए हुए कुप्पे लादे,
5अपने पांवों में पुराने पैबन्द लगे हुए जूते तथा तन पर पुराने वस्त्र पहने, और भोजन के लिए सूखी और फफूंदी लगी हुई रोटियां रख ली।
6तब उन्होंने गिलगाल की छावनी में यहोशू के पास जाकर उससे तथा इस्राएली पुरुषों से कहा, “हम दूर देश से आए हैं: हमारे साथ वाचा बांध लो।”
7तब इस्राएली पुरुषों ने उन हिव्वियों से कहा, “क्या जाने तुम हमारे ही देश की सीमा में रहते हो! तब हम तुम्हारे साथ कैसे वाचा बांधें?”
8परन्तु उन्होंने यहोशू से कहा, “हम तेरे दास है।” तब यहोशू ने उनसे कहा, “तुम कौन हो, और कहां से आए हो?”
9उन्होंने उससे कहा, “तेरे दास तो तेरे परमेश्वर यहोवा का नाम सुनकर बहुत दूर देश से आए हैं, क्योंकि हमने उसकी कीर्ति सुनी है कि उसने मिस्र में क्या-क्या किया,
10और यरदन के उस पार एमोरियों के दोनों राजाओं अर्थात् हेशबोन के राजा सीहोन तथा अश्तारोत में बाशान के राजा ओग के साथ उसने क्या-क्या किया है।
11इसलिए हमारे पूर्वजों तथा हमारे देश के निवासियों ने हमसे कहा, ‘अपनी यात्रा के लिए अपने साथ भोजन वस्तुएं लेकर जाओ और उनसे मिलकर कहो, “हम तुम्हारे दास हैं हमसे वाचा बांध लो”।’
12जिस दिन हम तुम्हारे पास आने के लिए अपने-अपने घर से निकले उस दिन अपने मार्ग के लिए जो यह रोटी ली थी वह एकदम गर्म थी, परन्तु देखो, आज यह सूख गई है, और इसमें फफूंदी लग गई है।
13और मदिरा के ये कुप्पे जब भरे गए तब नए थे। देखो, अब ये फट गए है। और हमारे ये कपड़े और जूते अत्यन्त लम्बी यात्रा के कारण पुराने हो गए है।”
14तब यहोवा की सलाह लिए बिना, इस्राएली पुरुषों ने उनकी भोजन-वस्तुओं में से कुछ ग्रहण किया।
15तब यहोशू ने उनसे मेल करके उन्हें जीवित छोड़ देने की वाचा बांधी और मंडली के अगुवों ने उनसे शपथ खाई।
16उनके साथ वाचा बांधने के तीन दिन बाद उन्होनें सुना कि वे तो हमारे पड़ोसी हैं और हमारे ही मध्य बसे है।
17तब इस्राएली चलकर तीसरे दिन उनके नगरों में पहुंचे। उनके नगरों के नाम ये हैं-गिबोन, कपीरा, बेरोत और किर्यत-यारीम।
18परन्तु इस्राएलियों ने उन पर हाथ नहीं उठाया, क्योंकि मंडली के अगुवों ने इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की शपथ खाई थी, और सारी मंडली अगुवों के विरुद्ध कुड़कुड़ाती रही।
19परन्तु अगुवों ने सम्पूर्ण मंडली से कहा, “हमने उनसे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की शपथ खाई है। इसलिए अब हम उन पर हाथ नहीं उठा सकते।
20हम उनके साथ यही करेंगे कि उन्हें जीवित छोड़ देंगे, कहीं ऐसा न हो कि उस खाई हुई शपथ के कारण हम पर कोप भड़क उठे।”
21अगुवो ने उनसे कहा, “उनको जीवित छोड़ दो”। अतः अगुवों के कहने के अनुसार वे सम्पूर्ण मंडली के लिए लकड़ी काटने और पानी भरने का काम करने लगे।
22फिर यहोशू ने उनको बुलवाकर उनसे कहा, “जबकि तुम हमारे ही देश में रहते हो तब तुमने हमसे यह कहकर क्यों छल किया कि हम बहुत दूर रहते हैं?
23इसलिए, अब तुम शापित हो और तुम में से ऐसा कोई न रहेगा जो दास अर्थात् मेरे परमेश्वर के भवन के लिए लकड़हारा और पनिहारा न हो।”
24तब उन्होंने यहोशू को उत्तर दिया, “तेरे दासों को निश्चय बताया गया था कि तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने अपने दास मूसा को आज्ञा दी थी कि सम्पूर्ण देश तुमको दे और उसके सारे निवासियों को तुम्हारे सामने से सर्वनाश कर दे। इसलिए तुम्हारे कारण हमें अपने प्राणों के लाले पड़ गए थे अतः हमने ऐसा किया।
25अब देख, हम तेरे हाथ में है। हमारे लिए वही कर जो तेरी दृष्टि में भला और उचित जान पड़े।”
26अतः उसने उनके साथ वैसा ही किया और उनको इस्राएलियों के हाथ से छुड़ाया और उन्हें घात नहीं किया।
27परन्तु यहोशू ने उनको उस दिन मंडली के लिए और यहोवा के चुने हुए स्थान के लिए उसमें और उसकी वेदी के लिए लकड़हारे और पनिहारे ठहराए। वे आज तक यही करते है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)