पुराना नियम · न्यायियों · अध्याय 20 / 21
न्यायियों 20
1तब दान से लेकर बर्शेबा तक के सब इस्राएल और गिलाद के लोग भी निकल आए, और लोगों की सभा एक मन होकर यहोवा के पास मिस्पा में इकट्ठी हुई।
2और लोगों के प्रधान यहां तक कि इस्राएल के सभी कुलों के लोग, जो तलवार चलाने वाले चार लाख पैदल सैनिक थे, यहोवा की प्रजा की सभा में उपस्थित हुए।
3( तब बिन्यामीनियों ने सुना कि इस्राएल इकट्ठे होकर मिस्पा को गए है।) और इस्राएलियों ने कहा, “हमें बता कि दुष्टता की यह घटना कैसे घटी?”
4अतः जिस स्त्री की हत्या की गई थी उसके लेवी पति ने उत्तर दिया, “मैं अपनी रखैल के साथ बिन्यामीन के गिबा में रात को टिकने के लिए गया था।
5परन्तु गिबा के लोगों ने मुझ पर आक्रमण करके उस घर को मेरे कारण घेर लिया। वे मुझे घात करना चाहते थे, इसके बदले में उन्होंने मेरी रखैल से इतना बलात्कार किया कि वह मर गई।
6तब मैंने अपनी रखैल के अंगों के टुकड़े काटकर इस्राएल के भाग के सम्पूर्ण देश में भेज दिए क्योंकि उन्होंने इस्राएल में कामुकता और मूढ़ता का काम किया है।
7हे सब इस्राएलियों, देखो, तुम अपनी सलाह और सम्मति यहीं दो।”
8तब सब लोग एक मन होकर खड़े हुए और कहने लगे, “हम में से कोई अपने डेरे को नहीं जाएगा और न ही हम में से कोई अपने घर को लौटेगा।
9परन्तु अब हम गिबा से यह करेंगे कि चिट्ठी डाल डालकर उस पर चढ़ाई करेंगे।
10और हम इस्राएल के कुल के सौ में दस और एक हज़ार में से एक सौ और दस हज़ार में से एक हज़ार को उस सेना के लिए भोजन-वस्तु पहुँचाने के लिए ठहराएं कि जो बिन्यामीन के गिबा में पहुँचकर उन्हें मूढ़ता के उस काम के लिए दण्ड दे जो उन्होंने इस्राएल में किया है।”
11इस प्रकार सब इस्राएल पुरुष एक मन होकर उस नगर के विरोध में इकट्ठे हुए।
12तब इस्राएल के कुलों ने बिन्यामीन के समस्त कुल में लोगों को यह पूछने भेजा, “यह कैसी दुष्टता है जो तुम लोगों के मध्य की गई है?
13अतः अब गिबा के उन आवारा लोगाें को हमें सौंप दो कि हम उन्हें जान से मारकर इस्राएल में से दुष्टता को मिटा दे।” परन्तु बिन्यामीनियों ने अपने इस्राएल भाइयों की बात न सुनी।
14और बिन्यामीनी अपने नगरों में से आकर गिबा में इकट्ठे हुए कि इस्राएलियों से युद्ध करने को निकले।
15और उसी दिन गिबावासी सात सौ चुने हुए लोगों के अतिरिक्त, अन्य नगरों में से तलवार चलानेवाले छब्बीस हज़ार बिन्यामीनी पुरुष गिने गए।
16इन चुने हुए सात सौ लोगों में बैंहत्थे पुरुष थे। इनमें से हर एक गोफन से निशाना लगाने में बाल-भर भी न चूकता था।
17और बिन्यामीनियों को छोड़कर चार लाख इस्राएल पुरुष थे जो तलवार चलाते थे। ये सब के सब योद्धा थे।
18तब इस्राएल उठकर बेत-ऐल को गए और उन्होंने परमेश्वर से पूछा, “बिन्यामीनियों से लड़ने के लिए हम में से पहले कौन जाए?” तब यहोवा ने कहा, “यहूदा पहले आक्रमण करे।”
19अतः इस्राएलियों ने सुबह उठकर गिबा के समाने डेरे डाले।
20और इस्राएल पुरुष बिन्यामीनियों से लड़ने के लिए गए और इस्राएल पुरुषों ने गिबा में उनसे लड़ने के लिए मोर्चा बांधा।
21तब बिन्यामीनी गिबा में से निकल आए और उसी दिन उन्होंने बाइस हज़ार इस्राएल पुरुषों को मारकर मिट्टी में मिला दिया।
22परन्तु इस्राएल पुरुषों ने साहस बांधकर फिर उसी स्थान पर मोर्चा बांधा जहाँ पहले दिन उन्होंने मोर्चा बांधा था।
23इस्राएल जाकर सन्ध्या तक यहोवा के सामने रोते रहे और उन्होंने यहोवा से पूछा, “क्या हम अपने भाई बिन्यामीनियों से लड़ने को फिर पास जाएं?” यहोवा ने कहा, “हां, उन पर आक्रमण करो।”
24तब दूसरे दिन इस्राएल, बिन्यामीनियों का सामना करने जा पहुंचे।
25तब बिन्यामीनियों ने दूसरे दिन गिबा से निकलकर उनका सामना किया और तलवार चलाने वाले अठारह हज़ार इस्राएलियों को फिर मारकर मिट्टी में मिला दिया।
26तब सब इस्राएल और सब लोग बेत-एल को गए और रोए और उस दिन यहोवा के सामने रहकर उन्होंने सन्ध्या तक उपवास किया। फिर उन्होंने यहोवा के लिए होमबलि और मेलबलि चढ़ाए।
27और इस्राएलियों ने यहोवा से पूछा, (क्योंकि उन दिनों परमेश्वर की वाचा का सन्दूक वहीं था।
28और पीनहास जो हारून का पोता और एलीआज़ार का पुत्र था वह उन दिनों में सेवा के लिए उसके सामने उपस्थित रहता था।) “क्या मैं अपने भाई बिन्यामीनियों से लड़ने को फिर जाऊं या युद्ध बन्द कर दूं?” यहोवा ने कहा, “चढ़ाई कर क्योंकि कल मैं उन्हें तेरे हाथ में कर दूंगा।”
29अतः इस्राएल ने गिबा के चारों ओर लोगों को घात में बैठाया।
30तीसरे दिन इस्राएलियों ने बिन्यामीनियों पर फिर आक्रमण किया और पहले के सामन गिबा के विरुद्ध मोर्चा बांधा।
31तब बिन्यामीनी उन लोगों का सामना करने के लिए निकले और नगर से दूर खींचे गए; परन्तु वे उन दो सड़कों पर जिनमें से एक बेत-एल और दूसरी गिबा को जाती है, उस पर पहले की तरह लोगों को मारने लगे। उन्होंने मैदान में इस्राएल के लगभग तीस पुरुष मार डाले।
32और बिन्यामीनियों ने कहा, “वे पहले के समान हम से मारे जा रहे है।” परन्तु इस्राएलियों ने कहा, “हम भागें जिससे कि हम उन्हें नगर से दूर भगा कर सड़कों पर खींच लाए।”
33तब इस्राएल के सब लोगों ने अपने स्थान से उठकर बालतामार में मोर्चा सम्भाला और जो इस्राएल घात लगाए बैठे थे वे अपने स्थान से अर्थात् मारे-गेवा से अचानक निकल पड़े।
34जब सब इस्राएल के छांटे हुए दस हज़ार पुरुष गिबा के विरुद्ध आए तो घोर युद्ध हुआ। परन्तु बिन्यामीनी नहीं जानते थे कि विनाश उनके समीप आ गया है।
35तब यहोवा ने बिन्यामीन को इस्राएल से हरवा दिया। अतः इस्राएलियों ने उस दिन तलवार चलानेवाले पच्चीस हज़ार एक सौ बिन्यामीनियों को नाश किया।
36बिन्यामीनियों ने देखा कि वे हार गए हैं तब इस्राएल पुरुष उन लोगों पर भरोसा करके जिन्हें उन्होंने घात में बैठाया था बिन्यामीनियों के सामने से हट गए।
37तब घात में बैठे लोग फुर्ती से निकलकर गिबा की ओर झपटे। और घात में बैठे लोगों ने भी आगे बढ़कर सारे नगर को तलवार से मारा।
38इस्राएल पुरुषों और घात में बैठे हुए पुरुषों के बीच यह चिह्न ठहराया गया था कि वे नगर में से धुएं का बड़ा बादल उठाए।
39तब इस्राएल पुरुष युद्ध से हटने लगे और बिन्यामीनियों ने आक्रमण करके इस्राएलियो के लगभग तीस पुरुषों को मार डाला क्योंकि उन्होंने कहा, “वे पहली लड़ाई के समान हम से हार रहे है।”
40परन्तु जब नगर से धुएं का बादल उठने लगा तो बिन्यामीनियों ने पीछे मुड़कर देखा कि पूरा नगर धुआं बनकर आकाश की ओर उठ रहा है।
41तब इस्राएल पुरुष मुड़े और बिन्यामीनी घबरा गए क्योंकि उन्होंने देखा कि हमारा विनाश निकट है।
42अतः वे इस्राएल पुरुषों को पीठ दिखाकर जंगल की ओर भागे, परन्तु वे लड़ाई से न बच सके। जो नगरों से निकलकर आते थे उनको उन्होंने बीच ही में नाश कर दिया।
43उन्होंने बिन्यामीनियों को घेर लिया और बिना दम लिए उन्हें गिबा के सामने तक खदेड़ खदेड़ कर कुचल डाला।
44इस प्रकार अठारह हज़ार बिन्यामीनी पुरुष मारे गए। ये सब शूरवीर थे।
45फिर बाकी बचे हुए लोग जंगल में रिम्मोन की चट्टान की ओर भागे परन्तु उन्होंने उनमें से पांच हज़ार को सड़कों पर ही पकड़ लिया और गिदोम तक उनका पीछा करके उनमें से दो हज़ार को मार डाला।
46अतः उस दिन पच्चीस हज़ार बिन्यामीनी पुरुष जो तलवार चलाने वाले थे, मार डाले गए। ये सब शूरवीर थे।
47परन्तु छः सौ व्यक्ति मुड़कर जंगल की ओर भागे और रिम्मोन की चट्टान में पहुंच गए। चार महीनों तक वे वहीं रहे।
48तब इस्राएल पुरुषों ने पीछे मुड़कर बिन्यामीनियों को, सम्पूर्ण नगर के पशुओं और जो भी उन्हें मिला सब को तलवार के घाट उतार दिया इसके साथ ही जितने नगर उन्हें मिले उनमें भी उन्होंने आग लगा दी।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)