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पुराना नियम · विलापगीत · अध्याय 4 / 5

विलापगीत 4

1सोना कितना खोटा हो गया, कुन्दन कैसा बदल गया है! पवित्रस्थान के पत्थर प्रत्येक गली के सिरे पर फेंक दिए गए है।

2सिय्योन के उत्तम पुत्र जो कुन्दन से तौले जाते थे वे अब कुम्हार के हाथों बनाए गए मिट्टी के पात्रों के समान कैसे तुच्छ समझे जाते हैं!

3गीदड़ भी अपने बच्चों को थन से लगाती, उनको दूध पिलाती है परन्तु मेरी प्रजा की पुत्री जंगल के शुतुर्मुर्ग के समान निर्दयी हो गई है।

4शिशु की जीभ प्यास के मारे तालू से चिपक गई है; बच्चे रोटी मांगते हैं, परन्तु कोई उनको खिलाता नही।

5जो स्वादिष्ट भोजन खाया करते थे वे गलियों में मारे-मारे फिरते हैं; जो बहुमूल्य वस्त्रों में पले थे वे घूरों पर पड़े है।

6क्योंकि मेरी प्रजा की पुत्री का अपराध सदोम के पाप से बड़ा है। सदोम तो मानो क्षणभर में उलट गया और किसी ने भी उसकी ओर सहायता का हाथ नहीं बढ़ाया।

7उसके शासक हिम से अधिक निर्मल और दूध से अधिक श्वेत थे; उनकी देह मूंगों से अधिक लाल तथा उनकी चमड़ी नीलमणि के समान थी।

8अब उनका रूप काजल से अधिक काला है, वे सड़कों पर पहचाने नहीं जाते, उनका चमड़ा हड्डियों पर चिपक गया, वह सूखकर लकड़ी के समान हो गया।

9जो तलवार से बेधे गए वे भूख से मरने वालों से बेहतर हैं; क्योंकि ये खेत की उपज के अभाव में भूख से घुल-घुलकर मरते है।

10दयालु स्त्रियों ने अपने हाथों से अपने ही बच्चों को पकाया। मेरी प्रजा की पुत्री के सर्वनाश के कारण वे ही उनका आहार हुए।

11यहोवा ने अपना पूरा रोष प्रकट किया, उसने अपने भयानक कोप का प्याला उंडेल दिया है; और सिय्योन में उसने ऐसी आग लगा दी है जिससे वह जड़ मूल तक भस्म हो गया है।

12न पृथ्वी का कोई राजा, न जगत का कोई वासी इस पर विश्वास कर सका, कि विरोधी और शत्रु यरूशलेम के फाटकों से प्रवेश कर सकेंगे।

13यह उसके नबियों के पापों और उसके याजकों के अधर्म के कारण हुआ है, क्योंकि वे उसके मध्य धर्मियों का लहू बहाते आए है।

14अब वे अन्धों के समान गलियों में भटकते फिरते हैं, वे लहू से इतने अशुद्ध हैं कि कोई भी उनके वस्त्र नहीं छूता।

15लोग पुकार-पुकारकर कहते हैं, “हटो! अशुद्ध! हटो! हटो! मत छूओ!” अतः वे भागते, और भटकते फिरते हैं, तब जाति-जाति के लोग कहते हैं, “वे हमारे बीच बसने न पाए।”

16यहोवा ने स्वयं उपस्थित होकर उसको तितर-बितर कर दिया; अब वह उन पर ध्यान नहीं देगा। न तो याजकों का सम्मान किया गया, और न प्राचीनों पर अनुग्रह हुआ।

17फिर भी सहायता की व्यर्थ प्रतीक्षा करते-करते हमारी आंखें धुंधली पड़ गईं; हम एक ऐसी जाति की प्रतीक्षा करते रह गए जो बचा नहीं सकती थी

18लोग हमारे पीछे ऐसे पड़ गए कि हम अपनी गलियों में भी नहीं निकल सके; हमारा अन्त निकट आ गया, हमारे दिन पूरे हो गए, क्योंकि हमारा अन्त आ ही गया था।

19हमारा पीछा करने वाले आकाश के उकाबों से भी तेज थे उन्होंने पहाड़ों पर भी हमारा पीछा किया और जंगल में हमारे लिए घात लगाई।

20यहोवा का अभिषिक्त जो हमारे नथनाें का श्वास था, जिसके विषय में हमने कहा था, “उसकी छाया में हम जातियों के मध्य निवास करेंगे,” वह उनके फंदों में पकड़ा गया।

21हे एदोम की पुत्री, तू जो ऊज देश में निवास करती है, हर्षित और आनन्दित रह, परन्तु यह प्याला तेरे पास भी पहुंचेगा, तू भी पीकर मतवाली हो जाएगी और निर्वस्त्र हो जाएगी।

22हे सिय्योन की पुत्री, तेरे पाप का दण्ड तो पूरा हो चुका है, वह तुझे फिर निर्वासित नहीं करेगा। पर हे एदोम की पुत्री, अब वह तेरे अधर्म का दण्ड देगा; वह तेरे पाप प्रकट करेगा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)