नया नियम · लूका · अध्याय 3 / 24
लूका 3
1तिबिरियुस कैसर के शासनकाल के पन्द्रहवें वर्ष में जब पुन्तियुस पिलातुस यहूदिया का राज्यपाल था और चौथाई के राजाओं में से हेरोदेस गलील का और उसका भाई फिलिप्पुस इतूरैया और त्रखोनीतिस का और लिसानियास अबिलेने का शाासक था,
2और जब हन्ना और काइफा महायाजक के पद पर थे तो परमेश्वर का वचन जंगल में जकरयाह के पुत्र यूहन्ना के पास पहुंचा।
3वह यरदन के आस-पास के सारे प्रदेशों में जाकर पापों की क्षमा के लिए मनफिराव के बपतिस्मा का प्रचार करने लगा।
4जैसा कि यशायाह नबी के वचनों की पुस्तक में लिखा हैः ‘जंगल में किसी पुकारने वाले की वाणी कि, ‘प्रभु का मार्ग तैयार करो, और उसकी सड़कें सीधी करो।
5हर एक घाटी भर दी जाएगी, और प्रत्येक पहाड़ और पहाड़ी समतल कर दी जाएगी, और टेढ़े मार्ग सीधे व ऊबड़-खाबड़ समतल कर दिए जाएंगे।
6तब सब प्राणी परमेश्वर के उद्धार को देखेेंगे’।”
7इसलिए वह उस जनसमूह से जो उसके पास बपतिस्मा लेने को चला आता था, कहने लगा, “हे सांप के बच्चो, आने वाले प्रकोप से भागने के लिए किसने तुम्हें चेतावनी दी है?
8अतः मनफिराव के योग्य फल लाओ और अपने मन में यह न कहो, ‘इब्राहीम हमारा पिता है।’ मैं तुमसे कहता हूँ कि परमेश्वर इन पत्थरों से इब्राहीम के लिए सन्तान उत्पन्न कर सकता है।
9और पेड़ों की जड़ पर कुल्हाड़ा रखा हुआ है, इसलिए प्रत्येक पेड़ जो अच्छा फल नहीं लाता, काटा और आग में झोंका जाता है।”
10तब भीड़ ने उससे पूछा, “तो हम क्या करें?”
11उसने उन्हें उत्तर दिया, “जिसके पास दो कुरते हों वह उन्हें उसके साथ जिसके पास कुछ भी न हो बांट ले, और जिसके पास भोजन हो वह भी ऐसा ही करे।”
12कुछ चुंगी लेने वाले भी बपतिस्मा लेने आए और उन्होंने उससे पूछा “हे गुरु, हम क्या करें?”
13और उसने उनसे कहा, “जितना लेने की तुम्हें आज्ञा दी गई है उससे अधिक वसूल न करो।”
14और कुछ सैनिक उससे यह कहकर प्रशन करने लगे, “और हमारा क्या, हम क्या करें? उसने उनसे कहा, “किसी पर दबाव डालकर उससे पैसा न लो और न ही किसी पर झूठा दोष लगाओ, परन्तु अपने वेतन से ही सन्तुष्ट रहो।”
15जबकि लोग आशा लगाए हुए थे और वे यूहन्ना के सम्बन्ध में अपने-अपने मन में तर्क-वितर्क कर रहे थे कि कहीं यही तो मसीह नहीं है,
16तो यूहन्ना ने उन सबसे कहा, “मैं तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा देता हूँ, परन्तु वह जो मुझसे अधिक शक्तिमान है आ रहा है, और मैं तो इस योग्य भी नहीं कि उसके जूते के बन्धन खोलू। वही तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा।
17उसका सूप उसके हाथ में है कि वह अपने खलिहान को साफ करे और गेहूँ को अपने भण्डार में एकत्रित करे, परन्तु वह भूसी को न बुझने वाली आग में जलाएगा।”
18अतः बहुत-सी अन्य बातों को समझाने के द्वारा वह उनको सुसमाचार सुनाता रहा।
19परन्तु जब उसने चौथाई देश के राजा हेरोदेस को उसके भाई फिलिप्पुस की पत्नी हेरोदियास और उन सब कुकर्मों के सम्बन्ध में जो उसने किए थे फटकारा,
20तो उसने उन सबके साथ यह भी किया कि यूहन्ना को बन्दीगृह में डाल दिया।
21ऐसा हुआ कि जब सब लोगों ने बपतिस्मा लिया तो यीशु ने भी बपतिस्मा लिया, और जब कि वह प्रार्थना कर ही रहा था तो आकाश खुल गया,
22और पवित्र आत्मा कबूतर के रूप में सदेह उस पर उतरा और यह आकाशवाणी हुई, “तू मेरा प्रिय पुत्र है, मैं तुझसे अत्यन्त प्रसन्न हूँ।”
23जब यीशु ने अपनी सेवा आरम्भ की तो वह लगभग तीस वर्ष का था। जैसा कि समझा जाता था वह यूसुफ का पुत्र था, जो एली का,
24जो मत्तात का, जो लेवी का, जो मलकी का, जो यन्ना का, जो यूसुफ का,
25जो मत्तित्याह का, जो आमोस का, जो नहूम का, जो असल्याह का, जो नोगह का,
26जो मात का, जो मत्तित्याह का, जो शिमी का, जो योसेख का, जो योदाह का,
27जो यूहन्ना का, जो रेसा का, जो जरुब्बाबिल का, जो शालतियेल का, जो नेरी का,
28जो मलकी का, जो अद्दी का, जो कोसाम का, जो इलमोदाद का, जो एर का,
29जो येशु का, जो एलीएजेर का, जो योरीम का, जो मत्तात का, जो लेवी का,
30जो शमौन का, जो यहूदाह का, जो यूसुफ का, जो योनान का, जो एलियाकीम का,
31जो मलेआह का, जो मिन्नाह का, जो मत्तता का, जो नातान का, जो दाऊद का,
32जो यिशै का, जो ओबेद का, जो बोअज़ का, जो सलमोन का, जो नहशोन का,
33जो अम्मीनादाब का, जो अरनी का, जो हिस्रोन का, जो फिरिस का, जो यहूदाह का,
34जो याकूब का, जो इसहाक का, जो इब्राहीम का, जो तिरह का, जो नाहोर का,
35जो सरूग का, जो रऊ का, जो फिलिग का, जो एबिर का, जो शेलाह का,
36जो केनान का, जो अरफक्षद का, जो शेम का, जो नूह का, जो लिमिक का,
37जो मथूशिलह का, जो हनोक का, जो यिरिद का, जो महललेल का, जो केनान का,
38जो एनोश का, जो शेत का, जो आदम का और जो परमेश्वर का पुत्र था।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)