नया नियम · मत्ती · अध्याय 2 / 28
मत्ती 2
1राजा हेरोदेस के दिनों में जब यहूदिया के बैतलहम में यीशु का जन्म हुआ, तो देखो, पूर्व दिशा से ज्योतिषी यरूशलेम में पहुंचकर पूछने लगे,
2“यहूदियों का राजा जिसका जन्म हुआ कहां है? क्योंकि हमने पूर्व में उसका तारा देखा है, और उसको दण्डवत् करने आए है।”
3जब राजा हेरोदेस ने यह सुना तो वह और उसके साथ सारा यरूशलेम घबरा गया।
4तब उसने लोगों के सब मुख्य याजकों और शास्त्रियों को एकत्रित करके उनसे पूछा कि मसीह का जन्म कहां होना चाहिए।
5उन्होनें उससे कहा, “यहूदिया के बैतलहम में, क्योंकि नबी के द्वारा ऐसा लिखा गया हैः
6‘हे बैतलहम, तू जो यहूदा के प्रदेश में है, तू यहूदा के अधिकारियों में किसी से भी छोटा नहीं, क्योंकि तुझ में से एक शासक निकलेगा जो मेरी प्रजा इस्राएल का रखवाला होगा’।”
7तब हेरोदेस ने ज्योतिजियों को चुपचाप बुलाकर उनसे इस बात का निश्चय किया कि तारा ठीक किस समय दिखाई दिया था
8और यह कहकर उन्हें बैतलहम भेजा, “जाओ, उस बालक का सावधानी से पता लगाओ, और जब वह तुम्हें मिल जाए तो मुझे समाचार दो कि मैं भी जाकर उसे दण्डवत करू।”
9राजा की बात सुनकर वे चल पड़े, और देखो, जिस तारे को उन्होंने पूर्व में देखा था वह उनके आगे आगे तब तक चलता रहा जब तक कि वहां पहुंचकर उस स्थान के ऊपर ठहर न गया जहां बालक था।
10वे उस तारे को देखकर अति आनन्दित हुए।
11उन्होंने घर में पहुंचकर उस बालक को उसकी माता मरियम के साथ देखा, और भूमि पर गिरकर उसको दण्डवत् किया और अपना अपना संदूक खोलकर उसे सोना, लोबान और गन्धरस की भेंट चढ़ाई।
12तब स्वप्न में परमेश्वर से यह चेतावनी पाकर कि हेरोदेस के पास न लौटना, वे दूसरे मार्ग से अपने देश को चले गए।
13जब वे चले गये तो देखो, प्रभु के दूत ने स्वप्न में यूसुफ को दिखाई देकर कहा, “उठ और बालक तथा उसकी माता को लेकर मिस्र को भाग जा, और जब तक मैं न कहूँ वहीं रहना; क्योंकि हेरोदेस इस बालक को खोजने पर है कि उसे मरवा डाले।”
14वह रात ही को उठकर बालक और उसकी माता को लेकर मिस्र को चला गया
15और हेरोदेस की मृत्यु तक वहीं रहा, कि जो वचन प्रभु ने नबी के द्वारा कहा था पूरा होः “मैंने अपने पुत्र को मिस्र से बुलाया।”
16जब हेरोदेस ने देखा कि ज्योतिजियों ने मेरे साथ चाल चली है तो वह आग-बबूला हो गया। उसने आज्ञा देकर ज्योतिजियों से निशिचत किए हुए समय के अनुसार बैतलहम तथा उसके आस-पास के स्थानों के सब लड़कों को जो दो वर्ष या इससे कम के थे मरवा डाला।
17तब जो वचन यिर्मयाह नबी के द्वारा कहा गया था पूरा हुआः
18“रामाह में एक चीत्कार, रोना और बड़ा विलाप, राहेल अपने बालकों के लिए रोते-रोते सांत्वना नहीं चाहती, क्योंकि अब वे न रहे।”
19जब हेरोदेस की मृत्यु हो गई, तो देखो, मिस्र में प्रभु के दूत ने युसुफ को स्वप्न में दिखाई देकर कहा,
20“उठ और बालक तथा उसकी माता को लेकर इस्राएल के देश में चला जा, क्योंकि वे जो उसका प्राण लेना चाहते थे, मर चुके है।”
21“वह उठा और बालक तथा उसकी माता को साथ लेकर इस्राएल के देश में आया,
22परन्तु यह सुनकर कि अरखिलाउस अपने पिता हेरोदेस के स्थान पर यहूदिया में राज्य कर रहा है, वहां जाने से डरा। फिर स्वप्न में परमेश्वर से चेतावनी पाकर वह गलील के प्रदेश में चला गया
23और नासरत नामक एक नगर में जाकर रहने लगा जिससे कि नबियों के द्वारा कहा गया वचन पूरा हो, “वह नासरी कहलाएगा।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)