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पुराना नियम · गिनती · अध्याय 33 / 36

गिनती 33

1जब इस्राएल मूसा और हारून की अगुवाई में दल बांधकर मिस्र देश से निकल आए तब उन्होंने इन स्थानों पर पड़ाव डालेः

2और मूसा ने यहोवा की आज्ञा के अनुसार उन-उन स्थानों के नाम लिख लिए जहां-जहां से उनकी यात्राएं प्रारम्भ होती थी। इन स्थानों के अनुसार उनकी यात्राएं इस प्रकार हैं:

3पहले महीने के पन्द्रहवें दिन, अर्थात् फसह के दूसरे दिन, सब इस्राएलियों ने रामसेस से प्रस्थान किया। सब मिस्रियों के देखते-देखते वे निधड़क उस समय निकल गए

4जब मिस्री अपने पहलौठो को जिन्हें यहोवा ने मारा था, मिट्टी दे रहे थे। यहोवा ने उनके देवताओं को भी दण्ड दिया था।

5तब इस्राएलियों ने रामसेस से प्रस्थान कर सुक्कोत में डेरे डाले,

6और सुक्कोत से प्रस्थान कर एताम में जो जंगल के छोर पर है डेरे डाले।

7और एताम से प्रस्थान कर वे पी-हहीरोत को मुड़ गए जो बाल-सपोन के सामने है, और मिगदोल के सामने डेरे डाले।

8तब वे पी-हहीरोत के सामने से प्रस्थान कर समुद्र के बीच होकर जंगल में गए। फिर उन्होंने एताम के जंगल में तीन दिन की यात्रा करके मारा में डेरे डाले।

9और मारा से प्रस्थान कर एलीम में आए। एलीम में जल के बारह सोते और खजूर के सत्तर वृक्ष थे, और उन्होंने वहां डेरे डाले।

10और उन्होंने एलीम से प्रस्थान कर लाल समुद्र के किनारे डेरे डाले।

11फिर उन्होंने लाल समुद्र से प्रस्थान कर सीन के जंगल में डेरे डाले।

12सीन के जंगल से प्रस्थान कर उन्होंने दोपका में डेरे डाले।

13और दोपका से प्रस्थान कर आलूश में डेरे डाले।

14और उन्होंने आलूश से प्रस्थान कर रपीदीम में डेरे डाले, यह वही स्थान है जहां उन लोगों को पीने का पानी नहीं मिला था।

15और उन्होंने रपीदीम से प्रस्थान कर सीनै के जंगल में डेरे डाले।

16फिर उन्होंने सीनै के जंगल से प्रस्थान करके किब्रोत-हत्तावा में डेरे डाले।

17फिर उन्होंने किब्रोत-हत्तावा से प्रस्थान कर हसेरोत में डेरे डाले।

18और हसेरोत से प्रस्थान कर रित्मा में डेरे डाले।

19फिर उन्होंने रित्मा से प्रस्थान कर रिम्मोन-पेरेस में डेरे डाले।

20फिर उन्होंने रिम्मोन-पेरेस से प्रस्थान कर लिब्ना में डेरे डाले।

21फिर उन्होंने लिब्ना से प्रस्थान कर रिस्सा में डेरे डाले।

22फिर उन्होंने रिस्सा से प्रस्थान कर कहेलाता में डेरे डाले।

23फिर उन्होंने कहेलाता से प्रस्थान कर शेपेर पर्वत के पास डेरे डाले।

24फिर उन्होंने शेपेर पर्वत से प्रस्थान कर हरादा में डेरे डाले।

25फिर उन्होंने हरादा से प्रस्थान कर मखेलोत में डेरे डाले।

26फिर उन्होंने मखेलोत से प्रस्थान कर तहत में डेरे डाले।

27फिर उन्होंने तहत से प्रस्थान कर तेरह में डेरे डाले।

28फिर उन्होंने तेरह से प्रस्थान कर मित्का में डेरे डाले।

29फिर उन्होंने मित्का से प्रस्थान कर हशमोना में डेरे डाले।

30फिर उन्होंने हशमोना से प्रस्थान कर मोसेरोत में डेरे डाले।

31फिर उन्होंने मोसेरोत से प्रस्थान कर बने-याकन में डेरे डाले।

32फिर उन्होंने बने-याकन से प्रस्थान कर होर-हग्गिदगाद में डेरे डाले।

33फिर उन्होंने होर-हग्गिदगाद से प्रस्थान कर योतबाता में डेरे डाले।

34फिर उन्होंने योतबाता से प्रस्थान कर अब्रोना में डेरे डाले।

35फिर उन्होंने अब्रोना से प्रस्थान कर एस्योन-गेबेर में डेरे डाले।

36फिर उन्होंने एस्योन-गेबेर से प्रस्थान कर त्सीन नामक जंगल अर्थात् कादेश में डेरे डाले।

37फिर उन्होंने कादेश से प्रस्थान कर होर पर्वत पर जो एदोम देश की सीमा पर है, डेरे डाले।

38वहां इस्राएलियों के मिस्र देश से निकलने के चालीसवें वर्ष के पांचवे महीने के पहले दिन, हारून याजक यहोवा की आज्ञा से होर पर्वत पर चढ़ा और वहां उसकी मृत्यु हाे गई।

39होर पर्वत पर जब हारून की मृत्यु हुई तो उसकी आयु एक सौ तेईस वर्ष की थी।

40तब कनान देश के नेगेव में रहने वाले अरात के कनानी राजा ने इस्राएलियों के आने का समाचार सुना।

41फिर उन्होंने होर पर्वत से प्रस्थान कर सलमोना में डेरे डाले।

42फिर उन्होंने सलमोना से प्रस्थान कर पूनोन में डेरे डाले।

43फिर उन्होंने पूनोन से प्रस्थान कर ओबोत में डेरे डाले।

44फिर उन्हाेंने ओबोत से प्रस्थान कर मोआब की सीमा पर अबारीम में डेरे डाले।

45फिर उन्होंने इयीम से प्रस्थान कर दीबोनगाद में डेरे डाले।

46फिर उन्होंने दीबोन-गाद से प्रस्थान कर अल्मोन- दिबलातैम में डेरे डाले।

47फिर उन्होंने अल्मोन-दिबलातैम से प्रस्थान कर नबो के सामने, अबारीम के पर्वतों पर डेरे डाले।

48फिर उन्होंने अबारीम से प्रस्थान कर मोआब के मैदानों में यरीहो के सामने यरदन नदी के तट पर डेरे डाले।

49फिर उन्होंने मोआब की तराई में बेत्य-शीमोत से लेकर अबेल-शित्तीम तक यरदन नदी के किनारे डेरे डाले।

50फिर यहोवा ने मोआब के मैदानों में यरीहों के सामने यरदन नदी के तट पर मूसा से कहा,

51“इस्राएलियों से कहः जब तुम यरदन नदी पार होकर कनान देश में पहुंचो,

52तब उस देश के निवासियों को अपने सामने से उस देश से निकाल देना और उनके गढ़े हुए पत्थरों और ढली हुई मूर्तियों को नष्ट कर देना और उनके ऊंचे स्थानों को ढा देना।

53और उस देश पर अधिकार करके उसमें निवास करना, क्योंकि मैंने वह देश तुमको इसलिए दिया है कि तुम उसके अधिकारी हो जाओ।

54और तुम उस देश को चिट्ठी डालकर अपने घरानों के अनुसार बांट लेना, बड़े घराने को अधिक और छोटे को थोड़ा भाग देना; जिसकी चिट्ठी जिस स्थान के लिए निकले वही उसका भाग ठहरे। तुम अपने पूर्वजों के गोत्रों के अनुसार अपना भाग लेना।

55परन्तु यदि तुम उस देश के निवासियों को अपने सामने से न निकालोगे, तब ऐसा होगा कि जिनको तुम उसमें रहने दोगे वे मानो तुम्हारी आंखों में कांटे और तुम्हारे पांजरों में कीलें बन जाएंगे, और जिस देश में तुम बसोगे वे तुम्हें संकट में डालेंगे।

56और ऐसा होगा कि जैसा बर्ताव मैं उनसे करना चाहता हूं वैसा तुमसे करूंगा।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)