पुराना नियम · गिनती · अध्याय 9 / 36
गिनती 9
1इस्राएलियों के मिस्र से निकलने के दूसरे वर्ष के पहले माह में यहोवा ने सीनै के जंगल में मूसा से कहा,
2“इस्राएल नियत समय पर फसह पर्व मनाया करे।
3इसी माह के चौदहवें दिन गोधूलि-वेला में नियत समय पर सब विधियों और नियमों के अनुसार इसे मनाना।”
4अतः मूसा ने इस्राएलियों को फसह मनाने के लिए कहा।
5और उन्होंने पहले माह के चौदहवें दिन गोधूलि के समय सीनै के जंगल में फसह मनाया। जो-जो आज्ञाएं यहोवा ने मूसा को दी थीं उन्हीं के अनुसार इस्राएलियों ने किया।
6कुछ लोग किसी शव के कारण अशुद्ध हो गए थे जिससे वे उस दिन फसह नहीं मना सके। अतः वे उस दिन मूसा और हारून के पास आए।
7उन्होंने मूसा से कहा, “हम शव के कारण अशुद्ध तो हैं, परन्तु अन्य इस्राएलियों के साथ नियत समय पर, यहोवा के लिए भेंट चढ़ाने से हमें क्यों रोका जा रहा है?”
8अतः मूसा ने उनसे कहा, “ठहरो। मैं सुन लूं कि यहोवा तुम्हारे विषय में क्या आज्ञा देता है।”
9तब यहोवा ने मूसा से कहा,
10“इस्राएलियों से यह कह, ‘यदि तुममें से कोई, अथवा तुम्हारे वंशजों में से कोई, किसी शव के कारण अशुद्ध हो जाए या कहीं दूर यात्रा पर हो, फिर भी वह यहोवा के लिए फसह मना सकता है।
11वे दूसरे माह के चौदहवें दिन गोधूलि-वेला में इसे मनाए। वे मेमने का मांस अख़मीरी रोटी तथा कड़वे सागपात के साथ खाए।
12वे इसमें से भोर तक कुछ न छोड़ें, न इसकी कोई हड्डी तोड़े। वे फसह को उसकी सम्पूर्ण विधियों के अनुसार मनाए।
13परन्तु जो व्यक्ति शुद्ध हो और यात्रा पर न हो, फिर भी फसह न मनाए, वह अपने लोगों में से नष्ट किया जाए क्योंकि उसने यहोवा की भेंट नियत समय पर नहीं चढ़ाई। उस व्यक्ति को अपने पाप का बोझ स्वयं उठाना पड़ेगा।
14यदि कोई परदेशी तुम्हारे साथ रहकर यहोवा का फसह मनाना चाहे तो वह फसह की विधि और उसके नियमों के अनुसार मनाए। देशी-परदेशी, दोनाें के लिए तुम्हारी एक ही विधि हो’।”
15जिस दिन निवासस्थान, अर्थात् साक्षी का तम्बू खड़ा किया गया उस दिन बादल उस पर छा गया, और संध्या समय तम्बू पर आग-सा दिखाई दिया और भोर तक वैसा ही रहा।
16नित्य ऐसा ही होता था। दिन को बादल, और रात को अग्नि का सा रूप उस पर छाया रहता था।
17जब-जब बादल निवासस्थान पर से उठ जाता तब-तब इस्राएल प्रस्थान करते, और जिस स्थान पर बादल ठहर जाता वहीं इस्राएल डेरे डालते थे।
18यहोवा की आज्ञा से इस्राएली प्रस्थान करते, तथा यहोवा ही की आज्ञा से डेरे डालते थे। जब तक बादल निवासस्थान पर ठहरा रहता तब तक वे डेरे डाले रहते थे।
19जब बादल निवासस्थान पर बहुत दिनों तक ठहरा रहता इस्राएल फिर भी यहोवा की आज्ञा मानते और प्रस्थान नहीं करते थे।
20कभी-कभी बादल कुछ ही दिन निवासस्थान पर रहता-तब भी वे यहोवा की आज्ञा के अनुसार डेरे डाले रहते थे। फिर यहोवा ही की आज्ञा से प्रस्थान करते थे।
21कभी-कभी बादल केवल संध्या से भोर तक रहता और जब भोर को उठ जाता तब ही वे प्रस्थान करते थे। यदि बादल दिन-रात बना रहता तो वह जब भी उठ जाता तब ही वे प्रस्थान करते थे।
22चाहे बादल दो दिन, या एक माह, या वर्ष-भर निवासस्थान पर छाया रहता फिर भी इस्राएल डेरा डाले रहते, और प्रस्थान नहीं करते थे। परन्तु वह जब भी उठ जाता, वे अवश्य प्रस्थान करते थे।
23यहोवा की आज्ञा से वे अपने डेरे डालते और यहोवा ही की आज्ञा से प्रस्थान करते थे। मूसा को जो आज्ञा यहोवा देता था उसी आज्ञा का वे पालन करते थे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)