फिलिप्पियों 1:21
क्योंकि मेरे लिए जीवित रहना तो मसीह, और मरना लाभ है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: फिलिप्पियों 1
18तो क्या हुआ? केवल यह कि चाहे कपट से, चाहे सच्चाई से, मसीह का प्रचार सब प्रकार से होता है-इस कारण मैं आनन्दित हूं, और आनन्दित रहूंगा भी।
19क्योंकि मैं यह जानता हूं कि तुम्हारी प्रार्थनाओं और यीशु मसीह के आत्मा की सहायता से इस वै़फ़द का प्रतिफल मेरा छुटकारा होगा।
20मेरी हार्दिक आशा और अभिलाजा यह है कि मैं किसी बात में लज्जित न होऊं, परन्तु जैसे पूरे साहस से मसीह की महिमा मेरी देह से सदा होती रही है वैसे ही अब भी हो, चाहे मैं जीवित रहूं या मर जाऊ।
21क्योंकि मेरे लिए जीवित रहना तो मसीह, और मरना लाभ है।
22परन्तु यदि सदेह जीवित रहूं तो इसका अर्थ मेरे लिए फलदायी परिश्रम है; परन्तु मैं किस बात को चुनूं, यह नहीं जानता।
23मैं इन दोनों के बीच असमन्जस में पड़ा हू। मेरी लालसा तो यह है कि कूच करके मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह अति उत्तम है,
24परन्तु तुम्हारे कारण शरीर में जीवित रहना मेरे लिए अधिक आवश्यक है।
संबंधित पद
- गलातियों 2:20
मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हू। अब मैं जीवित नहीं रहा, परन्तु मसीह मुझ में जीवित है, और अब मैं जो शरीर में जीवित हूं, तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिसने मुझ से प्रेम किया और मेरे लिए अपने आप को दे दिया।
- 2 कुरिन्थियों 5:8
अतः हम पूर्णतः साहस रखते हैं तथा देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते है।
- 2 कुरिन्थियों 5:1
क्योंकि हम जानते हैं कि यदि हमारा पृथ्वी पर का तम्बू सदृश घर गिरा दिया जाए, तो परमेश्वर से हमें स्वर्ग में ऐसा भवन मिलेगा जो हाथों से बना हुआ नहीं, परन्तु चिरस्थायी है।
- फिलिप्पियों 1:23
मैं इन दोनों के बीच असमन्जस में पड़ा हू। मेरी लालसा तो यह है कि कूच करके मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह अति उत्तम है,
- 2 कुरिन्थियों 5:6
इसलिए हम सदा साहस रखते और यह जानते हैं कि जब तक हम देह रूपी घर में रहते हैं, प्रभु से दूर हैं-
- फिलिप्पियों 1:20
मेरी हार्दिक आशा और अभिलाजा यह है कि मैं किसी बात में लज्जित न होऊं, परन्तु जैसे पूरे साहस से मसीह की महिमा मेरी देह से सदा होती रही है वैसे ही अब भी हो, चाहे मैं जीवित रहूं या मर जाऊ।
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