भजन संहिता 19:14
मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान, तेरे सम्मुख ग्रहणयोग्य हों, हे यहोवा, मेरी चट्टान और मेरे उद्धारकर्ता।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: भजन संहिता 19
11इनके द्वारा तो तेरे दास को चेतावनी मिलती है; इनका पालन करने से बड़ा लाभ होता है।
12अपनी भूल-चूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों को क्षमा कर दे।
13अपने दास को ढिठाई के पापों से बचाए रख; वे मुझ पर प्रभुता करने न पाएं; तब मैं निर्दोष बना रहूंगा, और बड़े-बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।
14मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान, तेरे सम्मुख ग्रहणयोग्य हों, हे यहोवा, मेरी चट्टान और मेरे उद्धारकर्ता।
संबंधित पद
- 1 पतरस 2:5
तुम भी जीवित पत्थरों के समान एक आत्मिक भवन बनते जाते हो, जिस से पुरोहितों का एक पवित्र समाज बन कर ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्रहणयोग्य हो।
- नीतिवचन 15:8
दुष्ट के बलिदान से यहोवा घृणा करता है, परन्तु खरे लोगों की प्रार्थना से वह प्रसन्न होता है।
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