पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 22 / 150
भजन संहिता 22
1हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्याें छोड़ दिया है? तू मेरी सहायता करने से, मेरे कराहने के शब्दों से इतना दूर क्यों है?
2हे मेरे परमेश्वर, मैं दिन को पुकारता हूं, पर तू उत्तर नहीं देता, रात को पुकारता हूं, परन्तु चैन नहीं पाता।
3पर तू तो पवित्र है, तू जो इस्राएल की स्तुति में विराजमान है।
4तुझ ही पर हमारे पूर्वजों ने भरोसा रखा; उन्होंने भरोसा रखा और तूने उन्हें छुड़ाया।
5उन्होंने तेरी दुहाई दी, और वे छुड़ा लिए गए; तुझ पर उन्हाेंने भरोसा किया; और वे लज्जित न हुए।
6परन्तु मैं तो कीड़ा हूं, मनुष्य नहीं, मनुष्यों द्वारा निन्दित और लोगों द्वारा तिरस्कृत।
7वे सब जो मुझे देखते हैं मेरा ठट्ठा करते हैं; वे होंठ बिचकाते और सिर हिलाते हुए कहते हैं:
8“अपने को यहोवा के अधीन कर दे। वही इसे छुड़ाए; जबकि वह इससे प्रसन्न है तो वही इसको बचाए।”
9तूने ही मुझे गर्भ से निकाला; जब मैं दूध-पीता बच्चा ही था, तूने मुझे भरोसा रखना सिखाया।
10जन्म से ही मैं तुझ पर छोड़ दिया गया था; मेरी माता के गर्भ से ही तू मेरा परमेश्वर है।
11मुझसे दूर न रह, क्योंकि संकट निकट है और कोई सहायक नही।
12बहुत से सांडों ने मुझे घेर लिया है; बाशान के शक्तिशाली सांड़ों ने मुझे घेर रखा है।
13वे मुझ पर अपने मुंह ऐसे फाड़े हुए हैं जैसे गरजने वाले और फाड़ खाने वाले सिंह हो।
14मैं जल की भांति उंडेल दिया गया हूं, और मेरी सब हड्डियां जोड़ से उखड़ गई हैं; मेरा हृदय मोम सा बन गया है, वह मेरे भीतर ही भीतर पिघल गया है।
15मेरा बल ठीकरे के समान सूख गया है, और मेरी जीभ तालू से चिपक गई है; तू मुझे मार कर मिट्टी में मिला देता है।
16क्योंकि कुत्तों ने मुझे घेर लिया है; दुष्टों के एक झुंड ने मुझे चारों ओर से घेर लिया है, उन्होंने मेरे हाथों और मेरे पैरों को छेदा है।
17मैं अपनी सब हड्डियां गिन सकता हू। लोग मुझे देख कर घूरते है।
18वे आपस में मेरे वस्त्रों को बांटते हैं और मेरे कपड़ों के लिए चिट्ठी डालते है।
19अब, हे यहोवा, तू दूर न रह, हे मेरे सहायक, मेरी सहायता के लिए फुर्ती कर।
20मेरे प्राण को तलवार से बचा; मेरे एकमात्र जीवन को कुत्ते के पंजे से बचा ले।
21सिंह के मुंह में से मुझे बचा ले, और जंगली सांड़ों के सींगों में से तू तो मुझे बचा लेता है।
22मैं अपने भाइयों में तेरे नाम का प्रचार करूंगा; और सभा के बीच में तेरी स्तुति करूंगा।
23तुम जो यहोवा का भय मानते हो, उसकी स्तुति करो। हे याकूब के सब वंशजों, उसकी महिमा करो! और हे इस्राएल की समस्त सन्तान, उसका भय मान!
24क्योंकि उसने दुखी के दुख को न तो तुच्छ जाना और न उससे घृणा की, न ही उसने उससे अपना मुंह छिपाया, परन्तु जब उसने सहायता के लिए उसे पुकारा तो उसकी सुन ली।
25महासभा में मेरा स्तुति करना तेरे ही कारण होता है; मैं अपनी मन्नतों को उनके सम्मुख पूरा करूँगा जो उसका भय मानते है।
26दीन लोग भोजन करके तृप्त होंगे; जो यहोवा के खोजी हैं वे उसकी स्तुति करेंगे- तुम्हारे प्राण सर्वदा जीवित रहें!
27पृथ्वी के छोर-छोर से लोग यहोवा का स्मरण करेंगे और उसकी ओर फिरेंगे; और जाति-जाति के सारे घराने तेरे सम्मुख दण्डवत् करेंगे।
28क्योंकि राज्य यहोवा ही का है, और वही देश-देश पर शासन करता है।
29पृथ्वी के सब हृष्ट-पुष्ट लोग खाएंगे और आराधना करेंगे; वे सब जो मिट्टी में मिल जाते हैं, हां, वे जो अपना प्राण बचा नहीं सकते, उसके सम्मुख घुटने टेकेंगे।
30एक वंश उसकी सेवा करेगा, और भावी पीढ़ी से प्रभु का वर्णन किया जाएगा।
31वे आकर उसकी धार्मिकता को उस पीढ़ी पर प्रकट करेंगे जो अब तक जन्मी ही नहीं, कि उसने यह सब किया है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)