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पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 74 / 150

भजन संहिता 74

1आसाफ का मश्कील। हे परमेश्वर, तूने हमें सदा के लिए क्यों त्याग दिया है? तेरे चराई की भेड़ों के विरुद्ध तेरी क्रोधाग्नि का धुआं क्यों उठ रहा है?

2अपनी मंडली को जिसे तूने प्राचीनकाल में मोल लिया, जिसे तूने अपनी मीरास का गोत्र बनने के लिए छुड़ा लिया, और सिय्योन पर्वत को भी जिस पर तूने वास किया, स्मरण कर।

3अपने कदम अनन्त खंडहरों की ओर बढ़ा, अर्थात् उस सारे विनाश की ओर जो शत्रु ने पवित्रस्थान में किया है।

4तेरे बैरी तेरे सभा-स्थल के मध्य गरज उठे हैं, उन्होंने चिह्न-स्वरूप अपनी ध्वजाओं को गाड़ दिया है।

5ऐसा लगता है कि मानो किसी ने घने वन के वृक्षों पर कुल्हाड़ा चलाया हो,

6और अब वे उसकी सब नक्काशी को कुल्हाड़ी और हथौड़ों से तहस-नहस करते है।

7उन्होंने तेरे पवित्रस्थान को जलाकर भस्म कर डाला है, और तेरे नाम के निवासस्थान को अशुद्ध कर दिया है।

8उन्होंने मन में कहा, “हम उनका पूरा-पूरा दमन करे।” उन्होंने देश में परमेश्वर के सब सभा-स्थलों को फूंक डाला है।

9हमको हमारे चिह्न नहीं दिखाई पड़ते; अब कोई नबी न रहा, न हमारे मध्य कोई जानता है कि कब तक ऐसा रहेगा।

10हे परमेश्वर, द्रोही कब तक उपहास करता रहेगा? क्या शत्रु तेरे नाम की निन्दा सदा करता रहेगा?

11तूने अपना हाथ, हां, अपना दाहिना हाथ क्याें रोक रखा है? उसे अपने सीने से हटाकर उनका सर्वनाश कर दे।

12फिर भी परमेश्वर प्राचीनकाल से मेरा राजा है, जो पृथ्वी पर छुटकारे का कार्य करता आया है।

13तूने अपने सामर्थ्य से समुद्र को दो भाग कर दिया; तूने समुद्र के विशाल जन्तुओं के सिर फोड़ डाले।

14तूने लिव्यातान के सिर कुचले, और उसे वन-पशुओं का आहार बनने के लिए दे दिया।

15तूने तो सोते और जलधाराओं को फोड़ बहाया, तूने सदा बहने वाली नदियों को सुखा दिया।

16दिन तेरा है, रात भी तेरी है; तूने ही सूर्य और चन्द्रमा को बनाया।

17तूने पृथ्वी की सारी सीमाओं को ठहराया। ग्रीष्मकाल और शीतकाल दोनों तूने ठहराए है।

18हे यहोवा, स्मरण कर कि शत्रु ने उपहास किया है, और मूर्ख जाति ने तेरे नाम की निन्दा की है।

19अपनी पंडुकी का प्राण वन-पशु के हवाले न कर, अपने पीड़ितों के जीवन को सदा-सर्वदा न भूल।

20अपनी वाचा पर ध्यान दे, क्योंकि देश के अन्धेरे स्थान अत्याचार के अड्डों से भर गए है।

21सताए हुए को अपमानित होकर लौटना न पड़े; पीड़ित और दरिद्र तेरे नाम की स्तुति करे।

22हे परमेश्वर, उठ, अपने पक्ष की पैरवी करः स्मरण कर कि मूढ़ जन किस प्रकार दिन-भर तेरी निन्दा करता है।

23अपने विरोधियों की आवाज को, और जो तेरे विरुद्ध उठ खड़े हुए हैं उनके लगातार बढ़ते हुए हुल्लड़ को भूल न जा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)