नया नियम · प्रकाशितवाक्य · अध्याय 2 / 22
प्रकाशितवाक्य 2
1“इफिसुस की कलीसिया के दूत को यह लिख: वह जो अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए है और वह जो सात स्वर्ण दीपदानों के मध्य चलता-फिरता है, यह कहता हैः
2‘मैं तेरे कार्यों, परिश्रम और धैर्य को जानता हूं, और यह भी कि तू दुष्ट लोगों की सहन नहीं कर सकता और जो अपने आप को प्रोरित कहते हैं पर हैं नहीं, तू ने उन्हें परखा और झूठा पाया है।
3तुझ में धैर्य है और तू मेरे नाम के कारण दुख उठाते-उठाते थका नही।
4पर मुझे तेरे विरफ़द्ध यह कहना है कि तू ने अपना पहला-सा प्रेम छोड़ दिया है।
5इसलिए स्मरण कर कि तू कहां से गिरा है और मन फिरा और पहिले के समान कार्य कर-अन्यथा मैं तेरे पास आता हूं और यदि तू मन न फिराए तो तेरे दीपदान को उसके स्थान से हटा दूंगा।
6पर इतना अवश्य है कि तू नीकुलइयों के कार्यो से घृणा करता है जिनसे मैं भी घृणा करता हू।
7जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। जो जय पाए उसे मैं जीवन के वृक्ष में से जो परमेश्वर के स्वर्ग में है खाने को दूंगा।’
8स्मुरना की कलीसिया के दूत को लिखः जो प्रथम तथा अन्तिम है, जो मर गया था, और अब जी उठा है, यह कहता हैः
9मैं तेरे क्लेश और दरिद्रता को जानता हूं-पर तू धनवान है-तथा उनकी ईश-निन्दा को भी जानता हूं जो अपने को यहूदी कहते हैं पर हैं नहीं, वरन् शैतान के सभागृह है।
10जो क्लेश तू सहने पर है उनसे न डर। देखो, -शैतान तुम में से कितनों को बन्दीगृह में डालने पर है कि तुम परखे जाओ, और तुम्हें दस दिन तक क्लेश उठाना पड़ेगा। प्राण देने तक विश्वासी रह-तब मैं तुझे जीवन का मुकुट प्रदान करूंगा।
11जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। जो जय पाए, उसे दूसरी मृत्यु से कोई हानि न होगी।’
12“पिरगमुन की कलीसिया के दूत को लिखः जिसके पास तेज दोधारी तलवार है वह यह कहता हैः
13‘मैं यह जानता हूं कि तू वहां रहता है जहां शैतान का सिंहासन है। तू मेरे नाम पर स्थिर रहता है, और तू ने मुझ पर विश्वास करने से उन दिनों में भी इनकार नहीं किया जब अन्तिपास, मेरा विश्वस्त साक्षी, तुम्हारे मध्य वहां मारा गया जहां शैतान का निवास है।
14परन्तु मुझे तेरे विरफ़द्ध कुछ कहना है, क्योंकि तेरे यहां कुछ ऐसे व्यक्ति हैं, जो बिलाम की शिक्षा को मानते हैं, जो बालाक को सिखाता रहा कि इस्राएलियों को ठोकर खिलाए कि वे मूर्तियों पर चढ़ाई हुई वस्तुएं खाएं और व्यभिचार करे।
15इसी प्रकार तेरे यहां भी कुछ ऐसे लोग हैं जो नीकुलइयों की शिक्षा को मानते है।
16अतः पश्चात्ताप कर, अन्यथा मैं शीघ्र तेरे पास आ रहा हूं और अपने मुख की तलवार से उनसे युद्ध करूंगा।
17जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। जो जय पाए उसे मैं गुप्त मन्ना में से दूंगा और उसे एक -श्वेत पत्थर भी दूंगा जिस पर एक नया नाम लिखा हुआ होगा, जिसे प्राप्त करने वाले के अतिरिक्त अन्य कोई नहीं जानेगा।’
18“थूआतीरा की कलीसिया के दूत को लिखः परमेश्वर का पुत्र, जिसकी आंखें अग्नि-ज्वाला, और जिसके पैर चमकते पीतल के सदृश हैं, यह कहता हैः
19‘मैं तेरे कार्य, प्रेम, विश्वास, सेवा और धैर्य को जानता हूँ, और यह भी कि तेरे वर्तमान कार्य विगत कार्यों से बढ़कर है।
20किन्तु तेरे विरोध में मुझे यह कहना है कि तू उस स्त्री इज़ेबेल को अपने मध्य रहने देता है, जो अपने आप को नबिया कहती है और मेरे दासों को व्यभिचार करने तथा मूर्तियों के आगे चढ़ाई हुई वस्तुएं खाने के लिए सिखाती और भटकाती है।
21मैंने उसे अवसर दिया कि पश्चात्ताप करे, पर वह अपने व्यभिचार से पश्चात्ताप करना नहीं चाहती।
22देख, मैं उसे रोग--शैय्या पर डालूंगा, और जो उसके साथ व्यभिचार करते हैं यदि वे उसके समान कार्यों से पश्चात्ताप न करें तो उन्हें भारी क्लेश में डालूंगा।
23मैं उसके बालकों को महामारी से मारूंगा, और सारी कलीसियाओं को ज्ञात हो जाएगा कि मनों और हृदयों को जांचने वाला मैं ही हूं और मैं तुम में से प्रत्येक को उसके कार्यों के अनुसार प्रतिफल दूंगा।
24पर मैं थूआतीरा के शेष लोगों से कहता हूं जो इस शिक्षा को नहीं मानते, और जैसा कि वे कहते हैं कि शैतान की गहरी बातों को जानते हैं, यघपि नहीं जानते, मैं तुम पर और अधिक भार नहीं डालता।
25फिर भी जो कुछ तुम्हारे पास है, उसे मेरे आने तक दृढ़तापूर्वक थामे रहो।
26जो जय पाए और जो मेरे कार्यों को अन्त तक करता रहे, उसे मैं जाति-जाति पर अधिकार दूंगा।
27वह उन पर लोहे के राजदण्ड से शासन करेगा, जैसे कुम्हार के बर्तन टूट कर चकनाचूर हो जाते है। वैसे ही मैंने भी अपने पिता से अधिकार पाया है।
28मैं उसे भोर का तार प्रदान करूंगा।
29जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)