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पुराना नियम · 1 इतिहास · अध्याय 28 / 29

1 इतिहास 28

1अब दाऊद ने इस्राएल के समस्त अधिकारियों अर्थात् गोत्रों के प्रधानों और राजा की सेवा में लगे सेना के दलों के सेनापतियों, सहस्रपतियों, शतपतियों और राजा और उसके पुत्रों के सब पशुओं एवं धन-सम्पत्ति के निरीक्षकों और अधिकारीगणों एवं शक्तिशाली और पराक्रमी पुरफ़षों को भी यरूशलेम में इकट्ठा किया।

2तब दाऊद राजा खड़ा हो कर कहने लगा, “हे मेरे भाइयो और मेरी प्रजा, मेरी सुनो, मेरी इच्छा तो थी कि यहोवा की वाचा के सन्दूक एवं परमेश्वर के चरणों की पीढ़ी के लिए एक स्थाई निवासस्थान बनाऊं, और इसलिए मैंने उसके बनाने की तैयारी भी की थी।

3परन्तु परमेश्वर ने मुझसे कहा, ‘तू मेरे नाम के लिए भवन बनाने न पाएगा, क्योंकि तू युद्ध करने वाला पुरफ़ष है और तूने खून बहाया है।’

4फिर भी इस्राएल के परमेश्वर यहोवा ने मेरे पिता के समस्त घराने में से मुझे ही चुन लिया कि मैं सदा इस्राएल का राजा बना रहू। अर्थात् उसने यहूदा को अगुवा होने के लिए; और यहूदा के घराने में से मेरे पिता के घराने को चुन लिया, और मेरे पिता के पुत्रों में से मुझे समस्त इस्राएल का राजा बनाने से प्रसन्न हुआ।

5और मेरे सब पुत्रों में से-यहोवा ने मुझे बहुत से पुत्र दिए हैं-उसने मेरे पुत्र सुलैमान को इस्राएल की राजगद्दी पर विराजने के लिए चुन लिया है।

6और उसने मुझसे कहा, ‘तेरा पुत्र सुलैमान ही मेरे भवन एवं आंगनों को बनाएगा; क्योंकि मैंने उसे चुन लिया है कि वह मेरा पुत्र और मैं उसका पिता ठहरू।

7और यदि वह मेरी आज्ञाओं और नियमों को मानने में दृढ़ रहे जैसा आज तक है तो मैं उसका राज्य सर्वदा स्थिर रखूंगा।’

8इसलिए अब समस्त इस्राएल अर्थात् यहोवा की मंडली के देखते और अपने परमेश्वर के सामने अपने परमेश्वर यहोवा की सब आज्ञाओं को मानो और उन पर चलने का प्रयत्न करो कि तुम इस अच्छे देश के उत्तराधिकारी बने रहो और इसे अपने बाद अपने वंश के लिए सदा की मीरास होने के लिए छोड़ जाओ।

9और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर को जान और सम्पूर्ण हृदय एवं इच्छुक मन से उसकी सेवा कर, क्योंकि यहोवा प्रत्येक हृदय को जांचता एवं विचारों के प्रत्येक उद्देश्य को समझता है। यदि तू उसे ढूढ़े तो वह तुझे मिलेगा; परन्तु यदि तू उसे त्याग दे तो वह सदा के लिए तुझे त्याग देगा।

10इसलिए अब ध्यान रख क्योंकि यहोवा ने पवित्रस्थान के निमित्त एक भवन बनाने के लिए तुझे चुना है; अतः साहस करके काम में लग जा।”

11तब दाऊद ने अपने पुत्र सुलैमान को मन्दिर की डेवढ़ी और उसके मकानों, उसके भंडारघरों, उसकी अटारियों, उसके भीतरी कक्षों एवं प्रायश्चित्त के ढकने का नमूना;

12तथा यहोवा के भवन के आंगनों और चारों ओर के कक्षों और परमेश्वर के भवन के भंडारों और अर्पण की हुई वस्तुओं के भंडारों का सब नमूना जो उसको आत्मा की प्रेरणा से प्राप्त हुआ था, दे दिया;

13और याजकों और लेवियों के दलों और यहोवा के भवन की सेवा के सब कामों और यहोवा के भवन की सेवा के सब बरतन भी;

14अर्थात् सब प्रकार की सेवा के लिए काम आनवाले सोने के पात्रों के निमित्त सोना और सब प्रकार की सेवा के काम आने वाले पात्रों के निमित्त चांदी तौलकर,

15और सोने की दीवटों के लिए और उनके दीपकों के लिए एक एक दीवट और उसके दीपकों का सोना तौलकर और चांदी के दीवटों के लिए हर दीवट और उसके दीपक की चांदी, और हर दीवट के काम के अनुसार चांदी तौलकर,

16और भेंट की रोटी की मेजों के लिए एक-एक मेज के लिए सोना तौलकर और चांदी की मेजों के लिए चांदी,

17और कांटों, कटोरों और सोने की कटोरियों के लिए एक-एक, और सोने की कटोरियों के लिए एक-एक कटोरी के लिए शुद्ध सोना तौलकर, और चांदी की कटोरियों के लिए एक-एक कटोरी की चांदी तौलकर,

18और धूप की वेदी के लिए शुद्ध सोना तौलकर और रथ के नमूने अर्थात् उन करूबों के लिए जो पंख फैलाए यहोवा की वाचा के सन्दूक को ढांके हुए थे, सोना दे दिया।

19“यह सब लिखित रूप में है,” दाऊद ने कहा, “क्योंकि यहोवा का हाथ मुझ पर था, और उसने मुझे नमूने के सब विस्तृत विवरण को समझने के लिए बुद्धि दी।”

20तब दाऊद ने अपने पुत्र सुलैमान से कहा, “हियाव बान्ध और दृढ़ता से इस काम में लग जा; मत डर और न तेरा मन कच्चा हो, क्योंकि यहोवा परमेश्वर जो मेरा परमेश्वर है, तेरे साथ है। वह तुझे न त्यागेगा और न छोड़ेगा जब तक कि यहोवा के भवन की सेवा का सब काम समाप्त न हो जाए।

21और देख, याजकों और लेवियों के दल परमेश्वर के भवन के सब काम के लिए ठहराए गए हैं, और हर प्रकार की सेवा के लिए सब प्रकार के काम में प्रत्येक पुरफ़ष जो निपुण है प्रसन्नतापूर्वक तेरा साथ देगा। और अधिकारीगण और सब लोग भी पूर्णतः तेरी आज्ञाओं का पालन करेंगे।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)