नया नियम · 1 कुरिन्थियों · अध्याय 3 / 16
1 कुरिन्थियों 3
1भाइयो, मैं तुमसे ऐसे बातें न कर सका जैसे आत्मिक लोंगों से, परन्तु जैसे शरीरिक लोगों से, और उनसे जो मसीह में बालक है।
2मैंने तुम्हें दूध पिलाया-अन्न नहीं खिलाया; क्योंकि तुम इसे पचा नहीं सकते थे। वास्तव में तुम अभी भी पचा नहीं सकते,
3क्योंकि तुम अब तक शरीरिक हो। जबकि तुम में द्वेष और झगड़े हैं, तो क्या तुम शरीरिक नहीं? और क्या तुम्हारा आचरण साधारण मनुष्यों की तरह नहीं?
4क्योंकि जब एक कहता है, “मैं पौलुस का हूं,” और दूसरा, “मैं अपुल्लोस का हूं,” तो क्या तुम मनुष्य ही न हुए?
5तो फिर अपुल्लोस क्या है? और पौलुस क्या है? केवल सेवक, जिनके द्वारा तुमने विश्वास किया, जैसा कि प्रभु ने प्रत्येक को अवसर प्रदान किया।
6मैंने बोया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया।
7अतः न तो बोने वाला कुछ है, और न ही सींचने वाला, परन्तु बढ़ाने वाला परमेश्वर ही सब कुछ है।
8बोने वाला और सींचने वाला दोनों एक समान हैं, परन्तु प्रत्येक अपने ही परिश्रम के अनुसार प्रतिफल पाएगा।
9क्योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर का खेत हो और परमेश्वर का भवन हो।
10परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार जो मुझे प्रदान किया गया है, मैंने एक कुशल राजमिस्त्री की भांति नींव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है। परन्तु प्रत्येक व्यक्ति सावधान रहे कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है।
11क्योंकि उस नींव को छोड़ जो पड़ी है- और वह यीशु मसीह है- कोई दूसरी नींव नहीं डाल सकता।
12यदि कोई मनुष्य इस नींव पर सोना, चांदी, बहुमूल्य पत्थर, काठ या घास-फूस से निर्माण करे,
13तो प्रत्येक मनुष्य का कार्य प्रकट हो जाएगा। वह दिन उसे दिखाएगा, क्योंकि वह दिन अग्नि के साथ प्रकट किया जाएगा, और वह अग्नि ही प्रत्येक मनुष्य के कार्य को परखेगी।
14यदि किसी मनुष्य का निर्मित कार्य जो उसने किया है स्थिर रहेगा तो उसे प्रतिफल मिलेगा।
15यदि किसी व्यक्ति का कार्य जल जाएगा तो वह हानि उठाएगा, परन्तु वह स्वयं बच जाएगा, फिर भी मानो आग से जलते-जलते।
16क्या तुम नहीं जानते कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है?
17यदि कोई परमेश्वर के मन्दिर को नष्ट करे तो परमेश्वर उसे नष्ट करेगा; क्योंकि परमेश्वर का मन्दिर पवित्र है, और वह तुम हो।
18कोई अपने आप को धोखा न दे। यदि तुम में से कोई अपने आप को इस युग में बुद्धिमान समझता है तो वह मूर्ख बने जिससे कि बुद्धिमान बन जाए।
19क्योंकि इस संसार का ज्ञान परमेश्वर के समक्ष मूर्खता है, जैसा लिखा है, ‘‘वही है जो बुद्धिमानों को उनकी चतुराई में उलझा देता है,’’
20और यह भी, ‘‘प्रभु ज्ञानियों के तर्क-वितर्क को समझता है, कि वे व्यर्थ है।’’
21इसलिए मनुष्यों पर कोई घमण्ड न करे, क्योंकि सब कुछ तुम्हारा है,
22चाहे पौलुस हो या अपुल्लोस या कैफा, चाहे संसार हो या जीवन या मृत्यु, चाहे वर्तमान बातें हों या आने वाली बातें-यह सब कुछ तुम्हारा है,
23और तुम मसीह के हो, और मसीह परमेश्वर का है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)