पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 1 / 22
1 राजा 1
1अब दाऊद राजा वृद्ध हो गया था और उसकी आयु ढल चुकी थी। वे उसे कपड़े ओढ़ाते, परन्तु वह गर्म नहीं हो पाता था।
2इसलिए उसके सेवकों ने उससे कहा, “हमारे प्रभु राजा के लिए एक कुंवारी युवती ढूंढ़ी जाए; और वह राजा की देखभाल और सेवा-टहल किया करे; और वह तेरे साथ सोया करे जिससे कि हमारा प्रभु राजा गर्म रहे।”
3इसलिए उन्होंने सम्पूर्ण इस्राएल में एक सुन्दर लड़की की खोज की और वे शूनेम निवासिन अबीशग को पाकर उसे राजा के पास लाए।
4और वह लड़की बहुत सुन्दर थी; और वह राजा की देखभाल और सेवा-टहल करने लगी; परन्तु राजा ने उसके साथ सहवास न किया।
5तब हग्गीत के पुत्र अदोनिय्याह ने सिर उठा कर कहा, “मैं राजा बनूंगा।” अतः उसने अपने आगे-आगे दौड़ने के लिए रथों और घुड़सवारों के साथ पचास व्यक्तियों को तैयार कर लिया।
6और उसके पिता ने तो कभी यह कह कर भी उसे उदास न किया था, “तूने ऐसा क्यों किया?” और वह भी बहुत रूपवान था; और अबशालोम के बाद उसका जन्म हुआ था।
7और उसने सरूयाह के पुत्र योआब तथा एब्यातार याजक के साथ मन्त्रणा की और वे उसका अनुसरण करके उसकी सहायता करने लगे।
8परन्तु सादोक याजक, यहोयादा का पुत्र बनायाह, नातान नबी, शिमी, रेई और दाऊद के शूरवीरों ने अदोनिय्याह का साथ नहीं दिया।
9और अदोनिय्याह ने जोहेलेत नामक पत्थर के पास जो एन-रोगेल के निकट है, भेड़, बैल और तैयार किए हुए पशु बलि किए। और उसने अपने सब भाइयों अर्थात् राज-पुत्रों और यहूदा के सब लोगों को जो राजा के कर्मचारी थे आमन्त्रित किया।
10परन्तु उसने नातान नबी, बनायाह, शूरवीरों, और अपने भाई सुलैमान को आमन्त्रित नहीं किया।
11तब नातान ने सुलैमान की माता बतशेबा से कहा, “क्या तूने नहीं सुना कि हग्गीत का पुत्र अदोनिय्याह राजा बन गया है और हमारा प्रभु दाऊद इसे नहीं जानता?
12इसलिए अब आ, मैं तुझे सम्मति दूं जिससे तू अपना और अपने पुत्र सुलैमान का प्राण बचा सके।
13तुरन्त जाकर दाऊद राजा से कह, ‘हे मेरे प्रभु, हे राजा, क्या तूने अपनी दासी से यह शपथ नहीं खाई, “निश्चय, तेरा पुत्र सुलैमान मेरे पीछे राजा होगा, और वह मेरी राजगद्दी पर बैठेगा?” फिर अदोनिय्याह क्यों राजा बन बैठा है?’
14देख, जब तू राजा से ये बातें कर ही रही होगी तभी मैं तेरे पीछे आकर तेरी बातों की पुष्टि करूंगा।”
15अतः बतशेबा राजा के पास शयन- कक्ष में गई। राजा तो बहुत बूढ़ा था और अबीशग शूनेमिन उसकी सेवा-टहल कर रही थी।
16तब बतशेबा ने राजा के सामने गिर कर साष्टांग प्रणाम किया। और राजा ने पूछा, “तू क्या चाहती है?”
17और उसने उससे कहा, “हे मेरे प्रभु, तूने तो अपने परमेश्वर यहोवा की शपथ खाकर अपनी दासी से कहा था, ‘निश्चय, तेरा पुत्र सुलैमान मेरे बाद राजा होगा; और वह मेरी राजगद्दी पर बैठेगा।’
18अब देख, अदोनिय्याह राजा बन बैठा है; और अब तक, हे मेरे प्रभु राजा, तू इसे नहीं जानता।
19और उसने बहुत से बैल, और तैयार किए हुए पशु, और भेंड़ें बलि की हैं, और सब राजकुमारों और एब्यातार याजक और योआब सेनापति को आमन्त्रित किया है परन्तु उसने तेरे दास सुलैमान को आमन्त्रित नहीं किया।
20और अब तो हे मेरे प्रभु राजा, सब इस्राएलियों की दृष्टि तेरी ओर लगी है कि तू उनसे कहे कि हमारे प्रभु राजा की गद्दी पर तेरे बाद कौन बैठेगा।
21अन्यथा ऐसा होगा कि जैसे ही मेरा प्रभु राजा अपने पूर्वजों के संग सो जाएगा, मैं और मेरा पुत्र सुलैमान अपराधी समझे जाएंगे।”
22और देखो, वह राजा से बातें कर ही रही थी कि नातान नबी भीतर आ गया।
23और उन्होंने राजा से कहा, “नातान नबी आया है।” और जब वह भीतर राजा के सामने आया तो उसने भूमि पर मुंह के बल गिर कर राजा को दण्डवत् किया।
24तब नातान ने कहा, “हे मेरे प्रभु राजा, क्या तूने यह कहा है, ‘अदोनिय्याह मेरे बाद राजा होगा, और वह मेरी राजगद्दी पर बैठेगा?’
25क्योंकि देख, आज वह नीचे गया है और उसने बहुत से बैल, तैयार किए हुए पशु, और भेड़़ें बलि की हैं और सब राजकुमारों, और सेनापतियों, और एब्यातार याजक को आमन्त्रित किया है, और देख, वे लोग उसके सामने खा-पी रहे हैं; और वे कहते हैं, ‘अदोनिय्याह राजा चिरंजीव रहे!’
26परन्तु उसने मुझे अर्थात् मुझ तेरे दास को भी और सादोक याजक और यहोयादा के पुत्र बनायाह को और तेरे दास सुलैमान को नहीं बुलाया।
27क्या यह बात मेरे प्रभु राजा की ओर से की गई है, और तूने अपने दासों को यह नहीं बताया है कि मेरे प्रभु राजा की गद्दी पर उसके बाद कौन बैठेगा?”
28तब दाऊद राजा ने उत्तर देते हुए कहा, “बतशेबा को मेरे पास बुलाओ।”और वह राजा के पास आकर उसके सामने खड़ी हुई।
29और राजा ने शपथ खाकर कहा, “यहोवा जो मेरे प्राण को सब संकटों से बचाता आया है उसके जीवन की शपथ कि
30जैसा मैंने तुझसे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की शपथ खाकर कहा था, ‘तेरा पुत्र सुलैमान मेरे बाद राजा होगा और वह मेरे स्थान पर मेरी राजगद्दी पर बैठेगा,’ निश्चय मैं आज वैसा ही करूंगा।”
31तब बतशेबा ने भूमि पर मुंह के बल गिरकर राजा को दण्डवत् करके कहा, “मेरा प्रभु राजा दाऊद चिरंजीव रहे।”
32तब राजा दाऊद ने कहा, “मेरे पास सादोक याजक, नातान नबी और यहोयादा के पुत्र बनायाह को बुला लाओ।” तब वे राजा के सामने उपस्थित हुए।
33और राजा ने उनसे कहा, “अपने प्रभु के कर्मचारियों को अपने साथ लो और मेरे पुत्र सुलैमान को मेरे निज खच्चर पर बैठाकर उसे गीहोन ले जाओ।
34और वहां सादोक याजक और नातान नबी इस्राएल का राजा होने को उसका अभिषेक करें और नरसिंगा फूंक कर कहें, ‘राजा सुलैमान चिरंजीव रहे!’
35और तुम उसके पीछे-पीछे यहां आना और वह आकर मेरे सिंहासन पर बैठे और मेरे स्थान पर राजा हो, क्योंकि मैंने इस्राएल और यहूदा का शासक होने के लिए उसको नियुक्त किया है।”
36तब यहोयादा के पुत्र बनायाह ने राजा को उत्तर देकर कहा, “आमीन! मेरे प्रभु राजा का परमेश्वर यहोवा भी ऐसा ही कहे।
37जैसे यहोवा मेरे प्रभु राजा के साथ रहा वैसे ही सुलैमान के साथ भी रहे और उसके सिंहासन को मेरे प्रभु राजा दाऊद के सिंहासन से भी अधिक महान् बनाए।”
38अतः सादोक याजक, नातान नबी, यहोयादा का पुत्र बनायाह, करेती और पलेती लोग नीचे गए और सुलैमान को राजा दाउद के खच्चर पर बैठाकर उसे गीहोन ले आए।
39तब सादोक याजक ने तम्बू में से तेल भरा हुआ सींग लेकर सुलैमान का अभिषेक किया। फिर उन्होंने नरसिंगा फूंका और सब लोगों ने कहा, “राजा सुलैमान चिरंजीव रहे!”
40और सब लोग उसके पीछे-पीछे ऊपर गए। वे लोग बांसुरियां बजा रहे थे और ऐसा बड़ा आनन्द मना रहे थे कि उनकी आवाज से धरती डोल उठी।
41अब अदोनिय्याह और सब अतिथियों ने जो उसके साथ थे, भोजन समाप्त करते ही इसे सुना। योआब ने नरसिंगे की आवाज को सुनकर पूछा, “नगर में इतना कोलाहल क्यों हो रहा है?”
42वह यह कह ही रहा था कि देखो, एब्यातार याजक का पुत्र योनातान अाया, तब अदोनिय्याह ने कहा, “भीतर आ, तू तो शूरवीर है और अच्छा समाचार लाया होगा।”
43परन्तु योनातान ने उत्तर देते हुए अदोनिय्याह से कहा, “नहीं! हमारे प्रभु दाऊद राजा ने सुलैमान को राजा बना दिया है।
44राजा ने उसके साथ सादोक याजक, नातान नबी और यहोयादा के पुत्र बनायाह, करेतियों और पलेतियों को भेज दिया, और उन्होंने उसे राजा के खच्चर पर चढ़ाया है।
45और सादोक याजक और नातान नबी ने गीहोन में उसका राज्याभिषेक किया है और वे वहां से आनन्द मनाते हुए ऊपर आए हैं, इसलिए नगर में कोलाहल है। और यही वह आवाज है जिसे तुम ने सुना है।
46इसके अतिरिक्त सुलैमान तो राजगद्दी पर बैठ भी चुका है।
47इसके साथ ही राजा के कर्मचारी हमारे प्रभु दाऊद राजा को यह कह कर धन्य कहने आए, ‘तेरा परमेश्वर, सुलैमान का नाम तेरे नाम से भी अधिक महान् करे, और उसका राज्य तेरे राज्य से भी अधिक बढ़ाए!’ और राजा ने अपने पलंग पर दण्डवत् किया।
48राजा ने यह भी कहा, ‘इस्राएल का परमेश्वर यहोवा धन्य हो, जिसने आज मेरे देखते एक व्यक्ति को मेरी राजगद्दी पर बैठा दिया है’।”
49तब अदोनिय्याह के सब अतिथि भयभीत हो गए और वे उठकर अपने-अपने मार्ग पर चले गए।
50और अदोनिय्याह, सुलैमान से डरकर उठा और उसने जाकर वेदी के सींगों को पकड़ लिया।
51अब सुलैमान से यह कहा गया, “देख, सुलैमान राजा से अदोनिय्याह डर गया है क्योंकि उसने यह कहकर वेदी के सींगों को पकड़ लिया है, कि आज राजा सुलैमान मुझसे शपथ खाए कि वह अपने दास को तलवार से नहीं मारेगा।”
52और सुलैमान ने कहा, “यदि वह भला व्यक्ति बना रहेगा तो उसका एक बाल भी बांका न होगा, परन्तु यदि उसमें दुष्टता पाई गई तो वह मारा जाएगा।”
53अतः सुलैमान ने लोगों को भेजा और वे उसे वेदी पर से उतार लाए। तब उसने आकर राजा सुलैमान को दण्डवत् किया, और सुलैमान ने उससे कहा, “अपने घर जा।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)