Loading account

पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 2 / 22

1 राजा 2

1जब दाऊद के मरने का समय समीप आया तो उसने अपने पुत्र सुलैमान से कहा,

2“मैं संसार की रीति के अनुसार विदा होने पर हूं, इसलिए तू सामर्थी होकर पुरफ़षार्थ दिखा।

3और जो कुछ तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझे सौंपा है उसकी देख-भाल करना, उसके मार्गों पर चलना और जैसा मूसा की व्यवस्था में लिखा है वैसा ही उसकी विधियों तथा आज्ञाओं, नियमों और चेतावनियों का पालन करते रहना जिससे कि जो कुछ तू करे और जहां कहीं तू जाए उसमें तू सफल हो,

4जिससे यहोवा अपनी वह प्रतिज्ञा पूरी करे जो उसने मेरे विषय में इस प्रकार कही, ‘यदि तेरे पुत्र अपने चाल-चलन में सावधान रहें, कि अपने सम्पूर्ण हृदय और अपने सम्पूर्ण प्राण से सच्चाई के साथ चले तो तुझे इस्राएल की राजगद्दी पर बैठने के लिए किसी व्यक्ति की घटी न होगी।’

5फिर तू यह भी जानता है कि सरूयाह के पुत्र योआब ने मुझसे क्या-क्या किया, कि उसने इस्राएल के दो सेनापतियों अर्थात् नेर के पुत्र अब्नेर और येतेर के पुत्र अमासा से क्या किया जिनकी उसने हत्या कर दी। उसने शान्ति के समय भी युद्ध करके लहू बहाया। उसने युद्ध में लहू बहाकर अपनी कमर का कमरबन्ध और अपने पैरों की जूतियाँ भिगो दी।

6इसलिए अपनी बुद्धि से काम लेना और उस पके बाल वाले को अधोलोक में शान्ति से उतरने न देना।

7परन्तु गिलादी बर्जिल्लै के पुत्रों पर कृपा करना और वे तेरी मेज पर खाने वालों में रहें; क्योंकि जब मैं तेरे भाई अबशालोम के सामने से भागा था तो उन्होंने मेरी सहायता की थी।

8और देख, तेरे साथ बिन्यामीनी गेरा का पुत्र बहुरीम वासी शिमी है। यह तो वही है जिसने मुझे उस दिन कठोर शाप दिया था जब मैं महनैम को जा रहा था। परन्तु जब वह मुझसे भेंट के लिए यरदन को आया तब मैंने उससे यहोवा की शपथ खाकर कहा था, ‘मैं तुझे तलवार से नही मारूंगा।’

9परन्तु अब तू उसे दण्डित किए बिना न छोड़ना, क्योंकि तू तो बुद्धिमान व्यक्ति है और तुझे मालूम होना चाहिए कि उसके साथ क्या किया जाए। और तू उस पके बाल वाले का लहू बहाकर उसे अधोलोक में उतार देना।”

10फिर दाऊद अपने पूर्वजों के साथ सो गया और दाऊदनगर में उसे मिट्टी दी गई।

11दाऊद ने इस्राएल पर चालीस वर्ष तक राज्य किया। सात वर्ष तक तो उसने हेब्रोन में, और तैंतीस वर्ष तक यरूशलेम में राज्य किया।

12और सुलैमान अपने पिता दाऊद की राजगद्दी पर बैठा और उसका राज्य दृढ़ता से स्थापित हो गया।

13तब हग्गीत का पुत्र अदोनिय्याह, सुलैमान की माता बतशेबा के पास आया। तब बतशेबा ने पूछा, “क्या तू मित्रभाव से आया है?” उसने उत्तर दिया, “हां, मित्रभाव से।”

14तब उसने कहा, “मुझे तुझसे कुछ कहना है।” उसने कहा, “कह।”

15अतः उसने कहा, “तुझे तो मालूम है कि राज्य मेरा था और समस्त इस्राएल मुझसे राजा बनने की आशा कर रहा था। परन्तु राज्य पलट गया और मेरे भाई का हो गया है, क्योंकि यहोवा की ओर से यह उसी का था।

16और अब मैं तुझसे एक निवेदन करता हूं; मुझे मना न करना।” और उसने कहा, “कह।”

17तब उसने कहा, “सुलैमान राजा तुझे मना नहीं करेगा। इसलिए कृपा करके उससे कह कि वह अबीशग शूनेमिन को मेरी पत्नी होने के लिए मुझे दे दे।”

18और बतशेबा ने कहा, “बहुत अच्छा, मैं तेरे लिए राजा से कहूंगी।”

19इसलिए बतशेबा सुलैमान राजा के पास अदोनिय्याह की ओर से बातचीत करने आई। और राजा उससे भेंट करने को उठा और उसके सामने झुक कर अपनी राजगद्दी पर बैठ गया। फिर उसने राजमाता के लिए एक सिंहासन लगवाया और वह उसके दाहिनी ओर बैठ गई।

20तब वह बोली, “मैं तुझसे एक छोटी सी विनती कर रही हूं, मुझे इनकार न करना।” और राजा ने उससे कहा, “ेहे माता, मांग, मैं तुझे इनकार न करूंगा।”

21अतः उसने कहा, “वह अबीशग शूनेमिन तेरे भाई अदोनिय्याह को ब्याह दी जाए।”

22और सुलैमान राजा ने अपनी माता को उत्तर दिया, “तू अदोनिय्याह के लिए अबीशग शूनेमिन को ही क्यों मांगती है? उसके लिए राज्य भी मांग-क्योंकि वह तो मेरा बड़ा भाई है- फिर एब्यातार याजक और सरूयाह के पुत्र योआब के लिए भी मांग।”

23तब राजा सुलैमान ने यहोवा की शपथ खाकर कहा, “यदि अदोनिय्याह ने यह बात अपने ही प्राण की हानि के लिए न कही हो तो परमेश्वर मुझसे वैसा ही वरन् उससे भी अधिक करे।

24अब यहोवा जिसने मुझे स्थिर किया है और मेरे पिता दाऊद की राजगद्दी पर बैठा दिया है और अपने वचन के अनुसार मेरा घर बसाया है, उसके जीवन की शपथ, निश्चय, अदोनिय्याह आज ही मार डाला जाएगा।”

25अतः राजा सुलैमान ने यहोयादा के पुत्र बनायाह को भेजा, और उसने जाकर उसे ऐसा मारा कि वह मर गया।

26तब राजा ने एब्यातार याजक से कहा, “अनातोत में अपनी भूमि को जा क्योंकि तू प्राणदण्ड के योग्य है; परन्तु इस समय तो मैं तुझे प्राणदण्ड नहीं दूंगा, क्योंकि तू मेरे पिता दाऊद के सामने प्रभु यहोवा का सन्दूक उठाया करता था, और इसलिए कि जो दुख मेरे पिता पर पड़े थे, तू भी उन सबमें सहभागी हुआ था।”

27तब सुलैमान ने एब्यातार को यहोवा के याजक-पद से हटा दिया कि यहोवा का वह वचन पूरा हो जाए जिसे उसने एली के वंश के विषय में शीलो में कहा था।

28यह समाचार योआब तक पहुंचा; यघपि योआब अबशालोम के पीछे नहीं चला था फिर भी वह अदोनिय्याह के पीछे हो लिया था। अतः योआब यहोवा के तम्बू को भाग गया और उसने वेदी के सींगों को पकड़ लिया।

29और राजा सुलैमान को यह बतलाया गया कि योआब तो यहोवा के तम्बू को भाग गया है और देखो, वह वेदी के पास है; तब सुलैमान ने यहोयादा के पुत्र बनायाह को यह कहकर भेजा, “तू जा, उसे मार डाल।”

30तब बनायाह ने यहोवा के तम्बू के पास जाकर उससे कहा, “राजा की यह आज्ञा है, ‘निकल आ’!” परन्तु उसने कहा, “नहीं मैं यहीं मर जाऊंगा।”और बनायाह ने राजा के पास फिर लौट कर कहा, “योआब ने यह कहा है और मुझे ऐसा उत्तर दिया है।”

31और राजा ने उससे कहा, “उसके कहने के अनुसार उसे मार डाल और मिट्टी दे दे, ऐसा करके तू मुझ पर से और मेरे पिता के घराने पर से उस खून का दोष दूर करेगा जिसे योआब ने अकारण बहाया था।

32और यहोवा उसका खून उसी के सिर पर लौटा देगा, क्योंकि उसने मेरे पिता दाऊद के न जानते हुए दो पुरफ़षों अर्थात् इस्राएल के प्रधान सेनापति नेर के पुत्र अब्नेर और यहूदा के प्रधान सेनापति येतेर के पुत्र अमासा को तलवार से मार डाला था जो उससे अधिक धर्मी और भले थे।

33इस प्रकार उनका खून योआब के सिर पर और उसकी सन्तान के सिर पर सदा रहेगा; परन्तु दाऊद और उसकी सन्तान और उसके घराने और उसकी राजगद्दी पर यहोवा की शान्ति सर्वदा बनी रहे।”

34तब यहोयादा के पुत्र बनायाह ने जाकर योआब को मार डाला, और उसको जंगल में, उसी के घर में मिट्टी दी गई।

35तब राजा ने उसके स्थान पर यहोयादा के पुत्र बनायाह को प्रधान सेनापति ठहराया; और एब्यातार के स्थान पर सादोक को याजक ठहराया।

36तब राजा ने शिमी को बुलवाया और उससे कहा, “तू यरूशलेम में अपने लिए एक घर बनवा कर वहीं रहना और वहां से कहीं बाहर न जाना।

37क्योंकि ऐसा होगा कि जिस दिन तू वहां से बाहर जाए और किद्रोन नाले के पार उतरे, तो जान रख कि उसी दिन तू निश्चय मार डाला जाएगा और तेरा खून तेरे ही सिर पर पड़ेगा।”

38तब शिमी ने राजा से कहा, “बात अच्छी है। जैसा मेरे प्रभु राजा ने कहा है, वैसा ही तेरा दास करेगा।” अतः शिमी यरूशलेम में बहुत दिन रहा।

39परन्तु तीन वर्ष के व्यतीत होने पर शिमी के दो दास गत नगर के राजा माका के पुत्र आकीश के पास भाग गए। और लोगों ने शिमी से कहा, “देख, तेरे दास गत में है।”

40तब शिमी ने उठकर गदहे पर काठी कसी और अपने दासों का ढूंढ़ने गत नगर को आकीश के पास गया। और शिमी जाकर अपने दासों को गत से ले आया।

41और सुलैमान को समाचार दिया गया कि शिमी यरूशलेम से गत जाकर लौट आया है,

42अतः राजा ने शिमी को बुलवाया और उससे कहा, “क्या मैंने तुझे यहोवा की शपथ न खिलाई थी और गम्भीरतापूर्वक चेतावनी न दी थी, ‘तू निश्चय जान रख कि जिस दिन तू निकलकर कहीं चला जाए, उसी दिन तू अवश्य मार डाला जाएगा’? और तूने मुझसे कहा था, ‘जो बात मैंने सुनी वह अच्छी है।’

43तब तूने यहोवा की शपथ और मेरी दृढ़ आज्ञा को क्यों नहीं माना?”

44राजा ने शिमी से यह भी कहा, “तू अपने मन की उस सब दुष्टता को जानता है जो तूने मेरे पिता दाऊद से की थी; इसलिए यहोवा तेरी दुष्टता को तेरे ही सिर पर लौटा देगा।

45परन्तु राजा सुलैमान धन्य रहेगा और दाऊद का राज्य यहोवा के सामने सदैव बना रहेगा।”

46तब राजा ने यहोयादा के पुत्र बनायाह को आज्ञा दी और उसने बाहर जाकर उसे ऐसा मारा कि वह मर गया। इस प्रकार सुलैमान के हाथ में राज्य दृढ़ हो गया।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)