पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 3 / 22
1 राजा 3
1फिर राजा सुलैमान ने मिस्र के राजा फि़रौन के यहां वैवाहिक सम्बंध स्थापित किया। फि़रौन की बेटी से विवाह करके वह उसे दाऊद नगर में ले आया और उसे उस समय तक वहीं रखा, जब तक कि वह अपना और यहोवा का भवन और यरूशलेम की दीवार न बना चुका।
2प्रजा के लोग तो अभी तक ऊंचे स्थानों पर बलि चढ़ाते थे, क्योंकि उन दिनों तक यहोवा के नाम का कोई भवन नहीं बना था।
3सुलैमान यहोवा से प्रेम रखता और अपने पिता दाऊद की विधियों पर चलता था, इसके अतिरिक्त वह ऊंचे स्थानों पर बलि भी चढ़ाया करता और धूप जलाया करता था।
4और बलि चढ़ाने के लिए राजा गिबोन को गया क्योंकि वही मुख्य ऊंचा स्थान था। सुलैमान ने उस वेदी पर एक हजार होमबलि चढ़ाए।
5गिबोन में यहोवा ने रात के समय सुलैमान को स्वप्न में दर्शन दिया, और परमेश्वर ने कहा, “जो कुछ तू चाहे कि मैं तुझे दूं, मांग।”
6तब सुलैमान ने कहा, “तूने अपने दास मेरे पिता दाऊद पर बड़ी करफ़णा दिखाई है, जैसा कि वह तेरे सम्मुख सच्चाई और धार्मिकता और मन की खराई से चलता रहा। और तूने उस पर यहां तक बड़ी करफ़णा की कि तूने उसे उसकी राजगद्दी पर बैठने वाला एक पुत्र दिया जैसा कि आज है।
7और, अब, हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तूने अपने दास को मेरे पिता दाऊद के स्थान पर राजा बनाया है; परन्तु मैं तो एक छोटा बच्चा ही हूं: मैं भीतर-बाहर आना-जाना नहीं जानता।
8और तेरा दास तेरी प्रजा के मध्य है जिसे तूने चुना है, वह ऐसी जाति है जो बड़ी संख्या के कारण गिनी नहीं जा सकती।
9इसलिए अपने दास की अपनी प्रजा का न्याय करने के लिए समझने वाला मन प्रदान कर कि मैं भले और बुरे का भेद कर सकू। क्योंकि ऐसा कौन है जो तेरी इतनी बड़ी प्रजा का न्याय कर सके?”
10और प्रभु इस बात से प्रसन्न हुआ कि सुलैमान ने यह मांगा है।
11और परमेश्वर ने उससे कहा, “क्योंकि तूने यह वर मांगा है और अपने लिए न तो दीर्घायु मांगी, और न ही अपने लिए धन और न अपने शत्रुओं का विनाश मांगा, परन्तु न्याय करने के लिए तूने समझ मांगी है,
12इसलिए देख, मैंने तेरे वचन के अनुसार किया है। मैंने तुझे बुद्धि और विवेक से भरा मन दिया है जिससे कि तेरे समान न तो तुझसे पहले कोई हुआ और न तेरे बाद कभी कोई होगा।
13और मैंने तुझे वह भी दिया है जो तूने नहीं मांगा अर्थात् धन और महिमा, जिससे कि तेरे जीवन भर कोई राजा तेरे तुल्य न होगा।
14और यदि तू अपने पिता दाऊद के समान मेरे मार्गों पर चले और मेरी विधियों और आज्ञाओं को मानता रहे तो मैं तेरी आयु को बढ़ाऊंगा।”
15तब सुलैमान जाग उठा और देखो, यह तो एक स्वप्न था। फिर वह यरूशलेम में आया और यहोवा की वाचा के सन्दूक के सामने खड़ा हुआ और उसने होमबलि और मेलबलि चढ़ाए और अपने सब कर्मचारियों के लिए भोज किया।
16तब दो स्रियां, जो वेश्याएं थीं, राजा के पास आकर उसके सामने खड़ी हुईं।
17और एक स्री ने कहा, “हे मेरे प्रभु, मैं और यह स्री दोनों एक ही घर में रहती है। और उस घर में उसके साथ रहते हुए मैंने एक बच्चे को जन्म दिया।
18मेरे प्रसव के बाद तीसरे दिन ऐसा हुआ कि इस स्री ने भी एक बच्चे का जन्म दिया और हम दोनों साथ थी। हमारे साथ घर में और कोई दूसरा न था केवल हम दोनों ही उस घर में थी।
19और इस स्री का बेटा रात में इसके नीचे दब कर मर गया।
20इसलिए यह आधी रात को उठी जब कि तेरी दासी सो रही थी, और मेरे बेटे को लेकर इसने अपनी छाती से लगा लिया और अपने मरे हुए पुत्र को मेरी छाती से लगा दिया।
21भोर को जब मैं अपने बेटे को दूध पिलाने को उठी तो क्या देखा कि वह मरा हुआ था; परन्तु सुबह जब मैंने उसे ध्यान से देखा तो वह मेरा बेटा नहीं था जिसे मैं ने जन्म दिया था।”
22तब दूसरी स्री ने कहा, “नहीं, जीवित बेटा तो मेरा है और मरा हुआ बेटा तेरा है।” परन्तु पहली स्री ने कहा, “नहीं, मरा हुआ बेटा तेरा है और जीवित बेटा मेरा है।” उन्होंने राजा के सामने इसी प्रकार कहा।
23तब राजा ने कहा, “एक कहती है, यह मेरा बेटा है, और मरा हुआ तेरा बेटा है,’ और दूसरी कहती है, ‘नहीं! तेरा बेटा तो मरा हुआ है और मेरा बेटा जीवित है’।”
24तब राजा ने कहा, “मेरे पास तलवार लाओ।” अतः वे राजा के पास एक तलवार ले आए।
25और राजा ने कहा, “जीवित बच्चे के दो टुकड़े करो और आधा एक को और आधा दूसरी को दे दो।”
26तब जीवित बच्चे की माता के मन में ममता उमड़ पड़ी। अतः उसने राजा से कहा, “हे मेरे प्रभु, जीवित बच्चा उसी को दे-दे और उसे किसी भी भांति न मार।” परन्तु दूसरी स्री ने कहा, “वह न तो मेरा और न तेरा रहे; उसके टुकड़े करो!”
27तब राजा ने उत्तर दिया, “बच्चे को किसी भांति न मारो, उसे पहली स्री को दे दो; वही उसकी माता है।”
28जब समस्त इस्राएल ने इस न्याय के बारे में जिसे राजा ने चुकाया था सुना तो उन्होंने राजा का भय माना। क्योंकि उन्होंने देखा कि न्याय करने के लिए उसमें परमेश्वर की बुद्धि है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)