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पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 13 / 22

1 राजा 13

1और देखो, जब यारोबाम धूप जलाने के लिए वेदी के पास खड़ा ही था तो यहोवा की आज्ञा से परमेश्वर का एक जन यहूदा से बेत-एल में आया।

2और उसने यहोवा की आज्ञा से वेेदी के विरफ़द्ध यों पुकारा, “वेदी, हे वेदी, यहोवा यों कहता हैः सुन, दाऊद के कुल में योशिय्याह नाम का एक लड़का उत्पन्न होगा, और ऊंचे स्थान के जो याजक तुझ पर धूप जलाते हैं उनको वह तुझ पर बलि कर देगा, और तुझ पर मनुष्यों की हड्डियां जलाई जाएंगी।”

3और उसने उसी दिन उस बात का एक चिह्न भी बतायाः “यहोवा ने यह चिह्न बताया हैः देख यह वेदी फट जाएगी और इस पर की राख बिखर जाएगी।”

4और ऐसा हुआ कि जब राजा ने परमेश्वर के उस जन का वचन जो उसने बेत-एल में उस वेदी के विरफ़द्ध पुकार कर कहा था सुना, तो यारोबाम ने वेदी के पास से हाथ बढ़ाकर कहा, “उसको पकड़ लो” परन्तु उसका हाथ जो उसने उसकी ओर बढ़ाया था, सूख गया और वह उसे अपनी ओर न खींच सका।

5और उस चिह्न के अनुसार जिसे परमेश्वर के जन ने यहोवा से वचन पाकर दिया था, वेदी भी फट गई और उस पर की राख गिर गई।

6तब राजा ने परमेश्वर के जन से विनती करके कहा, “अपने परमेश्वर यहोवा को मना और मेरे लिए प्रार्थना कर कि मेरा हाथ फिर पहले जैसा हो जाए।” अतः परमेश्वर के जन ने यहोवा को मनाया और राजा का हाथ फिर ज्यों का त्यों हो गया।

7तब राजा ने परमेश्वर के जन से कहा, “मेरे साथ घर चल कर आराम कर और मैं तुझे पुरस्कार दूंगा।”

8परन्तु परमेश्वर के जन ने राजा से कहा, “चाहे तू मुझे अपना आधा घर भी दे दे फिर भी मैं तेरे साथ न चलूंगा, और इस स्थान में मैं न तो रोटी खाऊंगा और न पानी पीऊंगा।

9क्योंकि यहोवा के वचन के द्वारा मुझे ऐसी आज्ञा मिली है, कि न तो रोटी खाना और न पानी पीना और न उस मार्ग से लौटना जिससे तू आया है।”

10इसलिए वह दूसरे मार्ग से चला गया और उस मार्ग से न लौटा जिससे बेत-एल आया था।

11बेत-एल में एक वृद्ध भविष्यद्वक्ता रहता था, और उसके पुत्रों ने आकर उससे उन सब कामों का वर्णन किया जो परमेश्वर के जन ने उस दिन बेत-एल में किए थे; और जो बातें उसने राजा से कही थीं, उनको भी उन्होंने अपने पिता को कह सुनाया।

12और उनके पिता ने उनसे पूछा, “वह किस मार्ग से गया?” उसके पुत्रों ने तो देखा था कि परमेश्वर का वह जन जो यहूदा से आया था किस मार्ग से गया है।

13तब उसने अपने पुत्रों से कहा, “मेरे लिए गदहे पर काठी कसो! अतः उन्होंने उसके लिए गदहे पर काठी कसी और वह उस पर सवार हुआ।

14अतः वह परमेश्वर के जन के पीछे गया और उसे एक बांजवृक्ष के नीचे बैठा हुआ पाया; उसने उससे कहा, “क्या तू परमेश्वर का वही जन है जो यहूदा से आया था?” और उसने कहा, “मैं ही हू।”

15उसने उससे कहा, “मेरे साथ घर चल कर भोजन कर।”

16और उसने कहा, “मैं न तो तेरे साथ लौट सकता और न तेरे साथ जा सकता हूं और न मैं इस स्थान में तेरे साथ रोटी खाऊंगा और न पानी पीऊंगा।

17क्योंकि यहोवा के वचन के द्वारा मुझे यह आज्ञा मिली है, ‘तू वहां न तो रोटी खाना और न पानी पीना; न उस मार्ग से लौटना जिस मार्ग से तू जाएगा’।”

18और उसने उससे कहा, “मैं भी तेरे ही समान एक भविष्द्वक्ता हूं और मुझसे एक दूत ने यहोवा से वचन पाकर कहा कि उसे अपने साथ अपने घर लौटा ले आ कि वह रोटी खाए और पानी पीए।” परन्तु उसने उससे झूठ कहा।

19तब उसने उसके साथ लौट कर उसके घर में रोटी खाई और पानी पीया।

20और ऐसा हुआ कि जब वे मेज पर बैठे थे तो यहोवा का वचन उस भविष्यद्वक्ता के पास पहुंचा जो उसे लौटा लाया था।

21और उसने परमेश्वर के उस जन से जो यहूदा से आया था पुकार कर कहा, “यहोवा यों कहता हैः इसलिए कि तूने यहोवा का वचन न माना, और जो आज्ञा तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझे दी थी उसका उल्लंघन किया,

22वरन् लौटकर उस स्थान पर रोटी खाई और पानी पीया है जिसके लिए उसने तुझसे कहा था, ‘न तो रोटी खाना और न पानी पीना,’ इस कारण तुझे अपने पूर्वजों के कब्रिस्तान में मिट्टी न दी जाएगी।”

23और ऐसा हुआ कि जब वह रोटी खा चुका और पानी पी चुका, तब उसने उस भविष्यद्वक्ता के लिए जिसे वह लौटा लाया था गदहे पर काठी कसी।

24जब वह चला गया तो मार्ग में एक सिंह ने उसे पाकर मार डाला औेर उसकी लाश मार्ग पर पड़ी रही, और गदहा उसके पास खड़ा था, और वह सिंह भी लाश के पास खड़ा था।

25और देखो, उधर से जाने वालों ने लाश को मार्ग पर पड़े हुए और सिंह को लाश के पास खड़े देखा, अतः उन्होंने उस नगर में जाकर जहां बूढ़ा नबी रहता था समाचार सुनाया।

26और जब उस नबी ने जो उसको मार्ग पर से लौटा लाया था यह सुना तो कहा, “यह परमेश्वर का वही जन है। इसने तो यहोवा की आज्ञा का उल्लंघन किया, इस कारण यहोवा ने उसको सिंह के पंजे में पड़ने दिया जिसने उसे यहोवा के उस वचन के अनुसार जो उसने उससे कहा था, फाड़ कर मार डाला।”

27तब उसने अपने पुत्रों से कहा, “मेरे लिए गदहे पर काठी कसो,” और उन्होंने कस दी;,

28और उसने जाकर उस जन की लाश मार्ग पर पड़ी हुई और गदहे और सिंह दोनों को लाश के पास खड़े हुए पाया। सिंह ने न तो लाश को खाया और न गदहे को फाड़ा था।

29तब बूढ़े नबी ने परमेश्वर के जन की लाश उठा कर गदहे पर लादी, और वह शोक मनाने तथा उसे मिट्टी देने के लिए अपने नगर को ले आया।

30और उसने उसकी लाश को अपनी कब्र में दफ़नाया, और उसके लिए यह कह कर शोक मनाया गया, “हाय मेरा भाई!”

31और ऐसा हुआ कि जब वह उसे मिट्टी दे चुका तो उसने अपने बेटों से कहा, “जब मैं मरूं तो मुझे भी इसी कब्र में रखना जिसमें परमेश्वर का यह जन दफ़नाया गया है। मेरी हड्डियाँ उसी की हड्डियों के पास रख देना।

32क्योंकि जो वचन उसने यहोवा की आज्ञानुसार बेत-एल की वेदी और सामरिया के नगरों के सब ऊंचे स्थानों के भवनों के विरुद्ध पुकार कर कहा है, वह निश्चय पूरा हो जाएगा।”

33इस घटना के बाद भी यारोबाम अपनी बुरी चाल से न फिरा, परन्तु फिर से सब प्रकार के लोगों में से उसने ऊंचे स्थानों के लिए याजक ठहराए, वरन् जो कोई चाहता था उसका उसने ऊंचे स्थान का याजक होने के लिए संस्कार किया।

34और यह बात यारोबाम के घराने के लिए पाप ठहरी जिससे उसका विनाश हुआ, और वह पृथ्वी पर से मिटा दिया गया।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)