पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 14 / 22
1 राजा 14
1उस समय यारोबाम का पुत्र अबिय्याह रोगी हुआ।
2और यारोबाम ने अपनी पत्नी से कहा, “अब उठ, ऐसा भेष बना जिससे कोई तुझे पहचान न सके कि तू यारोबाम की पत्नी है, और शीलो को जा; देख, वहां अहिय्याह नबी रहता है जिसने मेरे विषय में कहा था कि तू इस प्रजा का राजा बनेगा
3और उसके पास तू दस रोटी, कुछ टिकियां और एक कुप्पी मधु ले जा, और वह तुझे बताएगा कि इस लड़के का क्या होगा।”
4और यारोबाम की पत्नी ने वैसा ही किया, और चल कर शीलो पहुंची और अहिय्याह के घर आई; अहिय्याह को तो दिखाई नहीं देता था, क्योंकि बुढ़ापे के कारण उसकी आंखें धुंधली पड़ गई थी।
5यहोवा ने तो अहिय्याह से कह दिया था, “सुन, यारोबाम की पत्नी तुझसे अपने बीमार बेटे के विषय में पूछने के लिए आ रही है। तू उससे ऐसा-ऐसा कहना, क्योंकि जब वह यहां आएगी तो अपने आपको कोई दूसरी स्री बताने का ढोंग रचेगी।”
6और ऐसा हुआ कि जब अहिय्याह ने द्वार पर उसके पांव की आहट सुनी तो कहा, “हे यारोबाम की पत्नी, भीतर आ। तूने दूसरी स्री होने का ढोंग क्यों रचा है? क्योंकि मैं तेरे पास कठोर वचन देने लिए भेजा गया हूं,
7यारोबाम से जाकर कह, ‘इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, “मैंने तो तुझे प्रजा में से बढ़ा कर अपनी प्रजा इस्राएल पर प्रधान किया,
8और दाऊद के घराने से राज्य छीन कर तुझ को दिया-फिर भी तू मेरे दास दाऊद के समान न हुआ जो मेरी आज्ञाओं को मानता और पूरे मन से मेरे पीछे-पीछे चलता और केवल वही करता था जो मेरी दृष्टि में ठीक है।
9जो तुझसे पहले थे तूने तो उन सभों से बढ़कर बुराई की है और मेरे क्रोध को भड़काने के लिए तूने जाकर अपने लिए पराए देवता और ढली हुई मूर्तियां बनाई हैं और अपनी पीठ मुझसे फेर ली है,
10इस कारण, देख, मैं यारोबाम के घराने पर विपत्ति डालूँगा और यारोबाम के कुल के प्रत्येक नर-चाहे वह बँधुवा हो अथवा स्वतंत्र-दोनों को इस्राएल में से नष्ट कर डालूँगा,-जैंसे कोई गोबर को तब तक बुहारता रहता है, जब तक कि वह साफ न हो जाए वैसे ही मैं यारोबाम के घराने को पूर्णतः साफ कर दूँगा।
11यारोबाम का जो कोई नगर में मरे उसको कुत्ते खा जाएंगे, और जो मैदान में मरे उसको आकाश के पक्षी खा जाएंगे क्योंकि यहोवा ने यह कहा है।” ’
12अब तू उठ और अपने घर जा, नगर में तेरे पांव पड़ते ही बच्चा मर जाएगा।
13और समस्त इस्राएल उसके लिए शोक मना कर उसे मिट्टी देगा; क्योंकि यारोबाम के घराने में से केवल उसी को कब्र मिलेगी; क्योंकि यारोबाम के घराने में से उसी में कुछ पाया जाता है जो इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में भला है।
14न केवल यह, पर यहोवा अपनी ओर से इस्राएल पर एक राजा ठहराएगा जो यारोबाम के घराने को आज और अब से लेकर सदा के लिए नष्ट करेगा।
15क्योंकि यहोवा इस्राएल को ऐसा मारेगा जैसे पानी में नरकट हिलाया जाता है। और वह इस्राएल को इस अच्छे देश में से जो उसने उनके पूर्वजों को दिया था उखाड़कर पफ़रात नदी के उस पार तितर-बितर करेगा क्योंकि उन्होंने अशेरा-मूर्तियां बना कर यहोवा को क्रोध दिलाया है।
16और वह उन पापों के कारण जो यारोबाम ने किए और इस्राएल से करवाए, इस्राएल को त्याग देगा।”
17तब यारोबाम की पत्नी विदा होकर तिरजा को आई। जैसे ही उसने भवन की ड्योढ़ी मेें प्रवेश किया, बालक मर गया।
18तब यहोवा के वचन के अनुसार जो उसने अपने दास अहिय्याह नबी के द्वारा कहा था, समस्त इस्राएल ने उसे मिट्टी देकर उसके लिए शोक मनाया।
19यारोबाम के अन्य कार्यों का वर्णन अर्थात् उसने कैसा-कैसा युद्ध और कैसे राज्य किया, यह सब तो इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखा है।
20यारोबाम बाईस वर्ष तक राज्य करके अपने पूर्वजों के साथ सो गया, और उसका पुत्र नादाब उसके स्थान पर राजा बना।
21यहूदा में सुलैमान के पुत्र रहूबियाम ने राज्य किया। रहूबियाम जब राजा बना तब वह इकतालीस वर्ष का था। और उसने यरूशलेम में सत्रह वर्ष तक राज्य किया अर्थात् उस नगर में जिसे यहोवा ने सब इस्राएल गोत्रों में से अपना नाम रखने के लिए चुना था। उसकी माता का नाम अम्मोनी नामाह था।
22और यहूदा ने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, और उन्होंने उसके क्रोध को अपने पूर्वजों से भी अधिक भड़काया, अर्थात् उन पापों के कारण जो उन्होंने किये थे।
23क्योंकि उन्होंने प्रत्येक टीले पर और हर एक हरे वृक्ष के नीचे अपने लिए ऊंचे स्थान, लाटें और अशेरा बना लिए,
24और देश में धर्म के नाम पर पुरूषगमन कराने वाले भी थे। ये उन अन्य जातियों के समान सभी प्रकार के घिनौने काम किया करते थे जिन्हें यहोवा ने इस्राएलियों के सामने से निकाल दिया था।
25फिर ऐसा हुआ कि रहूबियाम के राज्य के पांचवें वर्ष में मिस्र के राजा शीशक ने यरूशलेम पर चढ़ाई की।
26और वह यहोवा के भवन का ख़जाना और राजभवन का ख़जाना उठा ले गया और वह सब कुछ ले गया यहां तक कि सोने की उन सब ढालों को भी ले गया जो सुलैमान ने बनवाई थी।
27इसलिए राजा रहूबियाम ने उनके बदले कांसे की ढालें बनवाईं और उन्हें उस रक्षक दल के प्रधानों को सौंप दिया जो राजभवन के द्वार का पहरा देते थे।
28ऐसा होता था कि जब-जब राजा यहोवा के भवन में प्रवेश करता था, रक्षक आकर उन्हें उठा ले जाते थे और उन्हें पहरेदारों की कोठरी में वापस रख देते थे।
29रहूबियाम के अन्य कार्य और जो कुछ उसने किया क्या वे सब यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?
30और रहूबियाम तथा यारोबाम में निरन्तर युद्ध होता रहा।
31और रहूबियाम अपने पूर्वजों के साथ सो गया। उसे दाऊदनगर में उसके पूर्वजों के पास मिट्टी दी गई उसकी माता का नाम नामाह था जो अम्मोनी थी। और रहूबियाम का पुत्र अबिय्याम उसके स्थान पर राजा बना।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)