Loading account

पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 15 / 22

1 राजा 15

1नबात के पुत्र यारोबाम के राज्य के अठारहवे वर्ष में अबिय्याम यहूदा पर राज्य करने लगा।

2उसने यरूशलेम में तीन वर्ष राज्य किया। उसकी माता का नाम माका था, जो अबशालोम की पुत्री थी।

3वह उन सब पापों को करता रहा जो उसके पिता ने उससे पहले किए थे। उसका मन अपने परमेश्वर यहोवा की ओर पूर्ण निष्ठा के साथ लगा न रहा जैसे उसके परदादा दाऊद का लगा था।

4परन्तु दाऊद के कारण उसके परमेश्वर यहोवा ने यरूशलेम में उसे एक दीपक दिया अर्थात् उसके पुत्र को उसके बाद ठहराया कि यरूशलेम को बनाए रखे।

5क्योंकि दाऊद ने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है और हित्ती ऊरिय्याह की बात को छोड़ अपने जीवन भर किसी बात में यहोवा की किसी आज्ञा से कभी न मुड़ा।

6और रहूबियाम और यारोबाम के बीच उसके जीवन भर युद्ध होता रहा।

7अबिय्याम के अन्य कार्य और जो कुछ उसने किया क्या वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हैं? और अबिय्याम और यारोबाम के मध्य युद्ध होता रहा।

8और अबिय्याम अपने पूर्वजों के साथ सो गया; और उन्होंने उसे दाऊदनगर में मिट्टी दी। और उसका पुत्र आसा उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

9अतः इस्राएल के राजा यारोबाम के बीसवें वर्ष में आसा राजा होकर यहूदा पर राज्य करने लगा।

10और उसने यरूशलेम में इकतालीस वर्ष राज्य किया। उसकी माता का नाम माका था जो अबशालोम की पुत्री थी।

11और आसा ने अपने मूलपुरफ़ष दाऊद के समान वही किया जो यहोवा की दृष्टि में उचित है।

12उसने पुरुषगामियोंको देश से निकाल दिया, और उन सब मूर्तियों को जो उसके पूर्वजों ने बनाई थीं, दूर कर दिया।

13उसने अपनी माता माका को भी राजमाता के पद से उतार दिया क्योंकि उसने अशेरा जैसी एक घिनौनी मूर्ति बनाई थी, और आसा ने उसकी घिनौनी मूर्ति को काट डाला और उसे किद्रोन नाले में फूंक दिया।

14परन्तु ऊंचे स्थान ढाए न गए; फिर भी आसा का मन जीवन भर यहोवा की ओर पूरी रीति से लगा रहा।

15और जो सोना-चाँदी और पात्र उसके पिता ने अर्पण किए थे और जो उसने स्वयं अर्पण किए थे उनको उसने यहोवा के भवन में पहुंचा दिया।

16आसा और इस्राएल के राजा बाशा के मध्य उनके जीवन भर युद्ध होता रहा।

17और इस्राएल के राजा बाशा ने यहूदा पर आक्रमण किया और रामा की इसलिए किलेबन्दी की कि यहूदा के राजा आसा के पास कोई आने-जाने न पाए।

18जो सोना-चांदी यहोवा के भवन के भंडारों और राजभवन के भंडारों में रह गया था, सबको लेकर आसा ने अपने कर्मचारियों को सौंप दिया। और राजा आसा ने उनको दमिश्क में रहने वाले सीरिया के राजा बेन-हदद के पास जो हेज्योन का पोता और तब्रिम्मोन का पुत्र था, यह कहने के लिए भेजा,

19“जैसे मेरे और तेरे पिता के मध्य सन्धि की गई वैसे ही मेरे और तेरे मध्य की जाए। देख, मैंने तेरे पास सोने और चांदी की भेंट भेजी है। इसलिए जा, इस्राएल के राजा बाशा के साथ अपनी सन्धि को तोड़ दे जिससे कि वह मेरे पास से चला जाए।”

20अतः बेन-हदद के राजा आसा की बात मानकर अपनी सेना के सेनापतियों से इस्राएल के नगरों पर चढ़ाई करवा दी और इय्योन, दान, अबेल-बेत-माका और समस्त किन्नेरेत को और नप्ताली के समस्त देश को जीत लिया।

21और ऐसा हुआ कि जब बाशा ने यह सुना तो उसने रामा को दृढ़ करना छोड़ दिया और तिर्सा में रहने लगा।

22तब राजा आसा ने समस्त यहूदा में घोषणा करवा दी-कोई न रहा जिसने नहीं सुना-तब वे रामा के पत्थरों और लकड़ी को उठा ले गए जिनसे बाशा ने उसे बनाया था, और राजा आसा ने उनसे बिन्यामीन के गेबा और मिस्पा को बनाया।

23आसा के अन्य सब कार्य और उसकी सम्पूर्ण वीरता और वह सब जो उसने किया और वे नगर जो उसने बनाए क्या वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हैं? परन्तु उसके बुढ़ापे में उसे पैरों का रोग लग गया था।

24और आसा अपने पूर्वजों के साथ सो गया और उसे उन्हीं के पास उसके मूलपुरफ़ष दाऊद के नगर में मिट्टी दी गई। और उसके स्थान पर उसका पुत्र यहोशापात राज्य करने लगा।

25अब यारोबाम का पुत्र नादाब यहूदा के राजा आसा के दूसरे वर्ष में इस्राएल पर राज्य करने लगा, और उसने इस्राएल पर दो वर्ष तक राज्य किया।

26और उसने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है और वह अपने पिता के मार्ग पर वे ही पाप करता हुआ चलता रहा जो उसने इस्राएल से करवाए थे।

27नादाब और समस्त इस्राएल गिब्बतोन नगर को घेरे था। तब इस्साकार के गोत्र के अहिय्याह के पुत्र बाशा ने उसके विरफ़द्ध षड्यंत्र रचकर पलिश्तियों के गिब्बतोन के पास उसे मार डाला।

28अतः यहूदा के राजा आसा के तीसरे वर्ष में बाशा ने नादाब को मार डाला और वह उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

29और ऐसा हुआ कि जैसे ही वह राजा बना उसने यारोबाम के समस्त घराने को मार डाला; उसने यारोबाम के घराने को यहां तक नष्ट किया कि एक भी व्यक्ति जीवित न बचा। यह सब यहोवा के उस वचन के अनुसार हुआ जो उसने अपने दास शीलोवासी अहिय्याह से कहलाया था।

30इसका कारण यारोबाम के पाप थे जो उसने स्वयं किए और इस्राएल से भी करवाए, क्योंकि उसने इस्राएल के परमेश्वर यहोवा को क्रोध करने के लिए भड़काया था।

31नादाब के अन्य कार्य जो उसने किए क्या वे इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?

32आसा और इस्राएल के राजा बाशा के मध्य उनके जीवन भर युद्ध होता रहा।

33यहूदा के राजा आसा के तीसरे वर्ष में अहिय्याह का पुत्र बाशा, तिर्सा में समस्त इस्राएल का राजा बना और चौबीस वर्ष तक राज्य करता रहा।

34और उसने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है और यारोबाम के मार्ग पर चलता हुआ वही पाप करता रहा जिसे उसने इस्राएल से करवाया था।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)