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पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 16 / 22

1 राजा 16

1और बाशा के विरफ़द्ध हनानी के पुत्र येहू के पास यहोवा का यह वचन पहुंचा,

2“मैंने तो तुझे मिट्टी पर से उठा कर अपनी प्रजा इस्राएल का प्रधान बनाया, परन्तु तूने यारोबाम के मार्ग पर चलकर मेरी प्रजा इस्राएल से पाप करवाया और उनके पापों से मेरे क्रोध को भड़काया है।

3देख, मैं बाशा और उसके घराने को नष्ट कर दूंगा और तेरे घराने को नबात के पुत्र यारोबाम के घराने के समान कर दूंगा।

4बाशा के घर का जो कोई नगर में मरे, उसको कुत्ते खा जाएंगे और उसका जो कोई मैदान में मरे उसको आकाश के पक्षी खा जाएंगे।”

5बाशा के अन्य कार्य जो उसने किए और उसकी वीरता क्या वे सब इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?

6और बाशा अपने पूर्वजों के साथ सो गया और उसे तिर्सा में मिट्टी दी गई और उसका पुत्र एला उसके स्थान पर राजा बना।

7यहोवा का वचन हनानी के पुत्र येहू नबी के द्वारा बाशा और उसके घराने के विरफ़द्ध उन दोनों बुराइयों के कारण भी आया जो उसने यहोवा की दृष्टि में कीं: यारोबाम के घराने के समान बनकर उसने अपने हाथ के कामों से उसके क्रोध को भड़काया, और इसलिए भी कि उसने उसको मार डाला था।

8यहूदा के राजा आसा के छब्बीसवें वर्ष में बाशा का पुत्र एला तिर्सा में इस्राएल पर राज्य करने लगा और उसने दो वर्ष तक राज्य किया।

9और उसके दास जिम्री ने जो उसके आधे रथों का प्रधान था, उसके विरफ़द्ध षड्यंत्र रचा। जब वह तिर्सा में था तो अर्सा के घर में जो तिर्सा के घराने का प्रधान था, पीकर मतवाला हो रहा था।

10तब जिम्री ने भीतर जाकर उस पर प्रहार किया और उसे मार डाला, और वह उसके स्थान पर राजा बन गया। यह यहूदा के राजा आसा के सत्ताईसवें वर्ष में हुआ।

11और ऐसा हुआ कि जब वह राजा बना तो गद्दी पर बैठते ही उसने बाशा के पूरे घराने को मार डाला; उसने उसके कुटुम्बियों व उसके मित्रों के एक भी पुरफ़ष को न छोड़ा।

12इस प्रकार यहोवा के उस वचन के अनुसार जो उसने येहू नबी के द्वारा बाशा के विरफ़द्ध कहा था, जिम्री ने बाशा का समस्त घराना नष्ट कर दिया।

13इसका कारण बाशा के सब पाप और उसके पुत्र एला के पाप थे जो उन्होंने किए और इस्राएल से करवाए और इस्राएल के परमेश्वर यहोवा को व्यर्थ बातों से क्रोध दिलाया था।

14एला के अन्य कार्य जो उसने किए क्या वे इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?

15यहूदा के राजा आसा के सत्ताईसवें वर्ष में जिम्री ने तिर्सा में सात दिन तक राज्य किया। उस समय लोग पलिश्तियों के देश गिब्बतोन के विरफ़द्ध छावनी डाले हुए थे।

16जब उन लोगों ने जो छावनी में थे यह सुना कि जिम्री ने षड्यंत्र करके राजा को भी मार डाला है तो समस्त इस्राएल ने ओम्री नामक प्रधान सेनापति को उसी दिन छावनी में इस्राएल का राजा बनाया।

17तब ओम्री और उसके साथ समस्त इस्राएल ने गिब्बतोन से चलकर तिर्सा को घेर लिया।

18और ऐसा हुआ कि जब जिम्री ने देखा कि नगर ले लिया गया है तो वह राजभवन के गुम्मट में चला गया और राजभवन में आग लगाकर उसी में जल मरा।

19यह उसके किए हुए पापों के कारण हुआ, क्योंकि उसने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है। वह यारोबाम के समान चाल चला और जो पाप उसने किए वे ही पाप उसने इस्राएल से भी करवाए।

20जिम्री के अन्य कार्य और षड्यंत्र जो उसने किए क्या यह सब इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखा है?

21तब इस्राएल की प्रजा दो भागों में बंट गईः प्रजा के आधे लोग गीनत के पुत्र तिब्नी को राजा बनाने के लिए उसके पक्ष में हो गए और आधे ओम्री के पक्ष मे।

22परन्तु जो लोग ओम्री के पक्ष में थे वे उन पर प्रबल हुए जो गीनत के पुत्र तिब्नी के पक्ष में थे। तब तिब्नी मारा गया और ओम्री राजा बना।

23यहूदा के राजा आसा के इकतीसवें वर्ष में ओम्री इस्राएल का राजा बना और बारह वर्ष तक राज्य करता रहा; उसने तिर्सा में छः वर्ष तक राज्य किया।

24और उसने शेमेर से सामरिया पहाड़ी को दो किक्कार चांदी में मोल लेकर उस पर एक नगर बसाया और अपने बसाए हुए नगर का नाम उस पहाड़ी के स्वामी शेमेर के नाम पर सामरिया रखा।

25और ओम्री ने यहोवा की दृष्टि में बुरा किया वरन् उन सबसे अधिक बुरा किया जो उससे पहले थे।

26क्योंकि वह नबात के पुत्र यारोबाम के समान ही चाल चला और अपने सब पापों के अनुसार उसने इस्राएल से पाप करवाए और इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के क्रोध को अपने व्यर्थ कार्यों से भड़काया था।

27ओम्री के अन्य कार्य जो उसने किए, और जो वीरता उसने दिखाई, क्या वे सब इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?

28अतः ओम्री अपने पूर्वजों के साथ सो गया और उसको सामरिया में मिट्टी दी गई, और उसका पुत्र अहाब उसके स्थान पर राजा बना।

29यहूदा के राजा आसा के अड़तीसवें वर्ष में ओम्री का पुत्र अहाब इस्राएल का राजा बना, और ओम्री का पुत्र अहाब इस्राएल पर सामरिया में बाईस वर्ष तक राज्य करता रहा।

30और ओम्री के पुत्र अहाब ने यहोवा की दृष्टि में उन सबसे अधिक बुराई की जो उससे पहले हुए थे।

31और ऐसा हुआ कि उसने नबात के पुत्र यारोबाम के पापों में चलना इतनी हलकी बात समझी कि उसने सीदोनियों के राजा एतबाल की पुत्री ईजेबेल से विवाह कर लिया। और वह बाल देवता की उपासना और उसको दण्डवत् करने गया।

32अतः उसने बाल का एक भवन सामरिया में बनाकर उसमें बाल की एक वेदी खड़ी कराई।

33और अहाब ने अशेरा भी बनाई। इस प्रकार अहाब ने उन सब इस्राएल राजाओं से बढ़कर जो उससे पहले हुए थे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा को क्रोध दिलाने के कार्य किए।

34उसके दिनों में बेत-एल-वासी हीएल ने यरीहो को बसाया। जब उसने उसकी नीवँ डाली तो उसका पहलौठा पुत्र अबीराम मर गया, और जब उसने उसके फाटक खड़े किए तो उसका छोटा पुत्र सगूब मर गया। यह यहोवा के उस वचन के अनुसार हुआ जो उसने नून के पुत्र यहोशू के द्वारा कहलवाया था।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)