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पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 21 / 22

1 राजा 21

1इन बातों के पश्चात् ऐसा हुआ कि नाबोत नामक एक यिज्रेली की दाख की बारी यिज्रेल में सामरिया के राजा अहाब के राजभवन के बगल में थी।

2और अहाब ने नाबोत से कहा, “अपनी दाख की बारी मुझे दे दे; कि मैं उसमें साग-पात की वाटिका लगाऊं, क्योंकि यह मेरे घर के पास है और उसके बदले मैं उससे अच्छी वाटिका तुझे दूंगा और यदि तू चाहे तो मैं तुझे उसका मूल्य नगद चुका दूंगा।”

3परन्तु नाबोत ने अहाब से कहा, “यहोवा न करे कि मैं अपने पूर्वजों की सम्पत्ति तुझे दू।”

4अतः अहाब उदास और क्रोधित होकर अपने घर आया, क्योंकि यिज्रेली नाबोत ने उससे यह कहा था, “मैं तुझे अपने पूर्वजों की सम्पत्ति नहीं दूंगा।” और वह अपने बिछौने पर लेट गया और मुंह फेर लिया, और कुछ भी न खाया।

5परन्तु उसकी पत्नी ईज़ेबेल ने उसके पास आकर कहा, “क्या बात है कि तेरा मन ऐसा उदास है और तू भोजन नहीं कर रहा है?”

6तब उसने उससे कहा, “क्योंकि मैंने नाबोत यिज्रेली से बात की और कहा, ‘नगद दाम लेकर मुझे अपनी दाख की बारी दे द़े और यदि तू चाहे तो मैं तुझे उसके बदले दूसरी दाख की बारी दे दूंगा।’ परन्तु उसने कहा, ‘मैं अपनी दाख की बारी तुझे न दूंगा’।”

7और उसकी पत्नी ईज़ेबेल ने उससे कहा, “क्या तू इस्राएल पर राज्य नहीं करता है? उठ, भोजन कर, और तेरा हृदय आनन्दित हो। मैं तुझे यिज्रेली नाबोत की दाख की बारी दूंगी।”

8तब उसने अहाब के नाम से पत्र लिखे और उसकी मोहर उन पर लगा दी और पत्रें को उन पुरनियों और रईसों के पास भेज दिया जो नाबोत के साथ उसके नगर में रहते थे।

9उन पत्रें में उसने यह लिखा था, “उपवास की घोषणा करना और नाबोत को लोगों के सामने ऊंचे स्थान पर बैठाना;

10और उसके सामने दो ओछे लोगों को बैठाना जो उसके विरफ़द्ध साक्षी देकर कहें, ‘तूने परमेश्वर और राजा दोनों की निन्दा की।’ तब उसे बाहर ले जाकर पथराव करके मार डालना।”

11तब उसके नगरवासियों अर्थात् पुरनियों और रईसों ने जो उसके नगर में रहते थे, ईज़ेबेल के उस वचन के अनुसार किया जैसा कि उसने उन्हें पत्रें में लिख कर भेजा था।

12उन्होंने उपवास की घोषणा की और नाबोत को लोगों के सामने ऊंचे स्थान पर बैठाया।

13तब दो ओछे व्यक्ति भीतर आकर उसके सामने बैठ गए। और उन ओछे व्यक्तियों ने लोगों के सामने नाबोत के विरूद्ध साक्षी देकर कहा, “ नाबोत ने परमेश्वर और राजा दोनों की निन्दा की है।” इस पर उन्होंने उसे नगर से बाहर ले जाकर पथराव करके मार डाला।

14तब उन्होंने ईज़ेबेल के पास यह सन्देश भेजा, “नाबोत का पथराव हुआ है और वह मर गया है।”

15और ऐसा हुआ कि जब ईज़ेबेल ने सुना कि नाबोत पथराव करके मार डाला गया है तो ईज़ेबेल ने अहाब से कहा, “उठ, यिज्रेली नाबोत की दाख की बारी को अपने अधिकार में ले ले, जिसे उसने नगद दाम पर देने से इनकार किया था, क्योंकि नाबोत अब जीवित नहीें, पर मर गया है।”

16और ऐसा हुआ कि जब अहाब ने सुना कि नाबोत मर गया है तो वहां जाकर यिज्रेली नाबोत की दाख की बारी को अपने अधिकार में लेने के लिए उठा।

17तब यहोवा का यह वचन तिशबी एलिय्याह के पास पहुंचा,

18“उठ, इस्राएल के राजा अहाब से मिलने के लिए सामरिया जा; देख, वह तो नाबोत की दाख की बारी में है, जहां वह उसे अपने अधिकार में लेने गया है।

19और तू उससे यह कहना, ‘यहोवा यह कहता है, “क्या तूने हत्या की और अधिकार भी कर लिया”?’ और तू उससे कहना, ‘यहोवा यह कहता है, “जिस स्थान पर कुत्तों ने नाबोत का लहू चाटा, उसी स्थान पर कुत्ते तेरा, हां, तेरा भी लहू चाटेगें”।’

20और अहाब ने एलिय्याह से कहा, “हे मेरे शत्रु, क्या तुझे मेरे विषय में पता लग गया है?” और उसने उत्तर दिया, “हाँ, लग गया है, क्योंकि जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है उसे करने के लिए तूने अपने आपको बेच डाला है।

21देख, मैं तुझ पर विपत्ति डालूंगा और इस्राएल में अहाब के घराने के प्रत्येक पुरुष को चाहे वह दास हो या स्वतन्त्र, पूरी रीति से मिटा डालूंगा।

22और मैं तेरा घराना नबात के पुत्र यारोबाम, और अहिय्याह के पुत्र बाशा के समान कर दूंगा, क्योंकि तूने इस्राएल से पाप करवा के मेरे क्रोध को भड़काया है।

23और ईज़ेबेल के बारे में भी यहोवा ने यह कहा है, ‘यिज्रेल के किले के पास ईजेबेल को कुत्ते खा जाएंगे, ­

24अहाब का जो कोई नगर में मरे उसे कुते खा जायेंगे, और जो कोई मैदान में मरेगा उसको आकाश के पक्षी खा जाएंगे।”

25सचमुच अहाब के समान और कोई न था जिसने अपनी पत्नी ईज़ेबेल के उकसाने पर अपने आपको वह काम करने के लिए बेच डाला जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है।

26और उसने उन एमोरियों के समान जिनको यहोवा ने इस्राएलियों के सामने से निकाल दिया था मूर्तियों की पूजा करके यहोवा की दृष्टि में बहुत ही घिनौने काम किए थे।

27और ऐसा हुआ कि जब अहाब ने इन वचनों को सुना तो उसने अपने वस्र फाड़े और टाट ओढ़ कर उपवास किया और टाट ओढ़े ही पड़ा रहने लगा और दबे पांव चलने लगा।

28तब यहोवा का यह वचन तिशबी एलिय्याह के पास पहुंचा,

29“क्या तूने देखा कि अहाब मेरे सामने कैसा दीन बन गया है? उसने मेरे सामने अपने आपको दीन बनाया है, इसलिए मैं वह विपत्ति उसके जीवनकाल में उस पर न डालूंगा, परन्तु मैं उसके घराने पर उसके पुत्र के दिनों में वह विपत्ति डालूंगा।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)