पुराना नियम · 1 राजा · अध्याय 20 / 22
1 राजा 20
1सीरिया के राजा बेन-हदद ने अपनी सारी सेना इकट्ठी की और उसके साथ बत्तीस राजा तथा घोड़े और रथ थे। उनके साथ उसने सामरिया पर चढ़ाई की और उसे घेर लिया और उसके विरफ़द्ध लड़ा।
2तब उसने नगर में इस्राएल के राजा अहाब के पास दूतों को भेजा और उससे कहा, “बेन-हदद यह कहता है,
3‘तेरा चांदी-सोना मेरा है, और तेरी स्रियों और बच्चों में जो अति सुन्दर हैं वे भी मेरे हैं’।”
4इस्राएल के राजा ने उत्तर दिया, “हे मेरे स्वामी, हे राजा, तेरे वचन के अनुसार मैं और जो कुछ मेरा है, सब तेरा है।”
5तब उन दूतों ने लौट कर कहा, “बेन-हदद यह कहता है, ‘मैंने अवश्य तेरे पास यह कहला भेजा था, “तुझे अपनी चांदी-सोना और स्रियां और बच्चे भी मुझे देने पड़ेंगे,”
6परन्तु कल इसी समय मैं अपने कर्मचारियों को तेरे पास भेजूंगा और वे तेरे और तेरे कर्मचारियों के घरों में छान-बीन करेंगे; और ऐसा होगा कि वे प्रत्येक वस्तु को जो तेरी दृष्टि में प्रिय है अपने हाथों में उठाकर ले जाएंगे’।”
7तब इस्राएल के राजा ने अपने देश के सब पुरनियों को बुलावाकर कहा, “कृपया विचार करके देखो, यह मनुष्य हमसे झगड़े पर कैसा उतारू है! क्योंकि उसने मेरी स्रियां, बच्चे और चांदी-सोना मुझसे मंगवा भेजा, और मैंने उसे इनकार न किया।”
8तब सब पुरनियों और सब लोगों ने उससे कहा, “उसकी न तो सुनना, और न मानना।”
9अतः उसने बेन-हदद के दूतों से कहा, “मेरे स्वामी राजा से कहो, ‘जो कुछ तूने अपने दास से पहले चाहा था, वह तो मैं करूंगा, परन्तु यह मैं नही कर सकता’।” तब दूतों ने प्रस्थान कर उसे पुनः संदेश दे दिया।
10तब बेन-हदद ने उसके पास यह कहला भेजा, “यदि सामरिया में इतनी धूल बचे कि उससे मेरे पीछे आने वालों की मुट्ठियां भर भी भर जाएं तो देवता मेरे साथ ऐसा ही वरन् इससे भी अधिक करे।”
11तब इस्राएल के राजा ने उत्तर दिया, “उससे कहो, ‘हथियार बाँधने वाला हथियार उतारने वाले के समान डींग न मारे’।”
12और ऐसा हुआ कि बेन-हदद ने इस समाचार को उस समय सुना जब वह राजाओं के साथ डेरों में मघ-पान कर रहा था, तो उसने अपने कर्मचारियों से कहा, “आक्रमण के लिए तैयार हो जाओ।” तब उन्होंने नगर के विरफ़द्ध आक्रमण की तैयारी की।
13तब देखो, इस्राएल के राजा अहाब के पास एक नबी ने आकर कहा, “यहोवा यह कहता है, ‘क्या तूने यह बड़ी भीड़ देखी है? देख, उन सबको मैं आज तेरे हाथ में कर दूंगा और तू जान जाएगा कि मैं यहोवा हूं’।”
14और अहाब ने पूछा, “किसके द्वारा?” अतः उसने कहा, “यहोवा यों कहता है, ‘प्रदेशों के शासकों के जवानों के द्वारा’।” उसने फिर पूछा, “युद्ध को कौन आरम्भ करेगा?” और उसने उत्तर दिया, “तू।”
15तब उसने प्रदेशों के शासकों के जवानों की गिनती ली, और वे दो सौ बत्तीस निकले; और उनके बाद उसने सब इस्राएल लोगों की गिनती ली, और वे सात हज़ार निकले।
16और वे दोपहर को निकल गए। उस समय अपने बत्तीस मित्र राजाओं सहित बेन-हदद तम्बुओं में मदिरा पीकर मतवाला हो रहा था।
17और प्रदेशों के शासकों के जवान पहले निकले। तब बेन-हदद ने दूत भेजे, और उन्होंने उससे कहा, “सामरिया से निकलकर कुछ मनुष्य आए है।”
18उसने कहा, “यदि वे मेल करने को निकले हों तो उन्हें जीवित पकड़ लाओ, और यदि वे युद्ध करने को निकले हों फिर भी उन्हें जीवित ही पकड़ लाओ।”
19तब प्रदेशों के शासकों के जवान और उनके पीछे सेना के सिपाही नगर से बाहर निकले।
20और उन्होंने अपने-अपने सामने के शत्रु को मार डाला; और सीरियाई भागे, और इस्राएल ने उनका पीछा किया, और सीरिया का राजा बेन-हदद एक घोड़े पर घुड़सवारों के साथ बच कर भाग निकला।
21तब इस्राएल के राजा ने निकल कर घोड़ों और रथों पर प्रहार किया और सीरियाइयों को मार कर बड़ा नरसंहार किया।
22तब उस नबी ने इस्राएल के राजा के पास आकर उससे कहा, “जा, अपने आप को दृढ़ कर और विचार कर और देख कि तुझे क्या करना है क्योंकि नए वर्ष के आरम्भ होते ही सीरिया का राजा तुझ पर चढ़ाई करेगा।”
23तब सीरिया के राजा के कर्मचारियों ने उससे कहा, “उनके देवता पहाड़ पर के देवता हैं इसलिए वे हम पर प्रबल हुए परन्तु यदि हम उनसे मैदान में लड़ें तो अवश्य उन पर प्रबल होंगे।
24और यह कर कि प्रत्येक राजा को उसके पद पर से हटा दे, और उनके स्थान पर सेनापतियों को ठहरा दे,
25और वह सेना जिसे तू खो चुका है उसके समान सेना इकट्ठी कर ले अर्थात् घोड़े के बदले घोड़े और रथ के बदले रथ। तब हम मैदान में उनसे लड़ेंगे और निश्चय हम उन पर प्रबल हो जाएंगे।” और उसने उनकी सुनकर वैसा ही किया।
26और ऐसा हुआ कि नए वर्ष के आरम्भ होते ही बेन-हदद ने सीरियाइयों को इकट्ठा किया, और इस्राएल से लड़ने के लिए अपेक पर चढ़ाई कर दी।
27और इस्राएलियों गिनती की गई, और उनके लिए रसद का प्रबन्ध किया गया, तब वे उनका सामना करने को गए। इस्राएल उनके सामने शिविर डाले हुए बकरियों के दो छोटे झुंड के समान थे, परन्तु सीरियाइयों से देश भर गया।
28तब परमेश्वर के एक जन ने इस्राएल के राजा के पास आकर कहा, “यहोवा यों कहता है, ‘क्योंकि सीरियाइयों ने कहा है कि उनका देवता पहाड़ों पर का देवता है, घाटियों का देवता नहीं, इस कारण मैं उस बड़ी भीड़ को तेरे हाथ में कर दूंगा, तब तुम जान जाओगे कि मैं यहोवा हूं’।”
29तब वे सात दिन तक आमने-सामने डेरे डाले रहे; फिर ऐसा हुआ कि सातवें दिन युद्ध छिड़ गया, और इस्राएलियों ने एक दिन में सीरियाइयों के एक लाख पैदल सैनिक मार डाले।
30परन्तु शेष भाग कर अपेक नगर में गए, और जो सत्ताईस हज़ार लोग शेष रह गये थे उन पर शहरपनाह गिर पड़ी और बेन-हदद भाग कर नगर की एक भीतरी कोठरी में चला गया।
31तब उसके कर्मचारियों ने उससे कहा, “देख, हमने सुना है कि इस्राएल के घराने के राजा दयालु राजा होते हैं, इसलिए हम इस्राएल के राजा के पास कमर में टाट बांधे और सिर पर रस्सियां बांधे हुए जाएं, सम्भवतः वह तेरा प्राण बचा ले।”
32अतः उन्होंने अपनी कमर में टाट और सिर पर रस्सियां बांधी और इस्राएल के राजा के पास जाकर कहा, “तेरा दास बेन-हदद कहता है, ‘कृपया, मुझे जीवित रहने दे’।” और उसने कहा, “क्या वह अब तक जीवित है? वह तो मेरा भाई है।”
33उसके लोगों ने इसे शुभ शकुन जानकर और तुरन्त उसकी बात को पकड़कर कहा, “हां, तेरा भाई बेन-हदद।” तब उसने कहा, “जाओ, उसे ले आओ।” तब बेन-हदद उसके पास निकल आया, और उसने उसे अपने रथ पर चढ़ा लिया।
34तब बेन-हदद ने उससे कहा, “जो नगर मेरे पिता ने तेरे पिता से ले लिए थे, उनको मैं फेर दूंगा, और जैसे मेरे पिता ने सामरिया में सड़कें बनवाईं वैसे ही तू अपने लिए दमिश्क में सड़कें बनवाना।” अहाब ने कहा, “मैं इसी वाचा पर तुझे छोड़ देता हू।” तब उसने बेन-हदद से वाचा बांधी और उस जाने दिया।
35तब नबियों की सन्तान में से एक पुरफ़ष ने यहोवा से वचन पाकर अपने साथी से कहा, “कृपा करके मुझे मार।” परन्तु उस पुरफ़ष ने उसे मारने से इनकार कर दिया।
36तब उसने उससे कहा, “इसलिए कि तूने यहोवा के वचन को नहीं सुना है, देख, जैसे ही तू मेरे पास से जाएगा, एक सिंह तुझे मार डालेगा।” तब जैसे ही वह उसके पास से गया, उसे एक सिंह मिला और सिंह ने उसे मार डाला।
37तब उसने एक दूसरे मनुष्य को पाकर कहा, “कृपा करके मुझे मार।” और उस पुरफ़ष ने उसे मार कर घायल कर दिया।
38तब वह नबी चला गया, और अपनी आंखों पर पट्टी बांधी और भेष बदलकर मार्ग पर राजा की बाट जोहने लगा।
39और जब राजा वहां से होकर निकला तो उसने पुकार कर राजा से कहा, “तेरा दास युद्ध के मध्य गया था, और देख, एक पुरफ़ष मुड़कर किसी मनुष्य को मेरे पास ले आया और कहा, ‘इस मनुष्य की चौकसी कर; यदि यह किसी प्रकार भाग निकले तो उसके प्राण के बदले तुझे प्राण देना होगा अन्यथा तुझे एक किक्कार चांदी देनी पड़ेगी।’
40और जब तेरा दास यहां-वहां काम में व्यस्त हो गया, तो वह भाग निकला।” तब इस्राएल के राजा ने उससे कहा, “ऐसा ही न्याय तेरा भी होगा, तूने स्वयं अपना न्याय कर लिया है।”
41तब उसने झट अपनी आंखों से पट्टी हटा दी, और इस्राएल राजा ने उसे पहचान लिया कि वह नबियों में से है।
42और उसने उससे कहा, “यहोवा यों कहता है, ‘इसलिए कि तूने अपने हाथ से एक ऐसे मनुष्य को चला जाने दिया जिसे मैंने सर्वनाश हो जाने के लिए ठहराया था, तुझे उसके प्राण के बदले अपना प्राण और उसकी प्रजा के बदले अपनी प्रजा देनी होगी’।”
43तब इस्राएल का राजा उदास और क्रोधित होकर अपने घर गया और इस प्रकार वह सामरिया में आया
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)